इन 5 चीजों के जरिए जानें कौन सा कुकिंग ऑइल है आपके लिए बेस्ट
कहते हैं कि सेहत का राज हेल्दी खान-पान और हेल्दी लाइफस्टाइल से जुड़ा होता है और इसका रास्ता पेट से होकर गुजरता है। लेकिन जब खान-पान हेल्दी न हो तो इसका असर हेल्थ पर पड़ता है और कई तरह की बीमारियां पैदा हो जाती हैं। स्वस्थ रहने के लिए हेल्दी डायट ही जरूरी नहीं बल्कि यह देखना भी जरूरी है कि आप जिस तेल में खाना बना रहे हैं वह कितना शुद्ध है और सेहत के लिए सही है या नहीं?
आप जब कुंकिग ऑइल खरीदने जाती या जाते हैं तो सबसे पहले क्या देखते हैं? अमूमन लोग देखते हैं कि वह ऑइल किस ब्रैंड का है, उसकी एक्सपायरी डेट क्या है। बेहद कम लोग होंगे जो इस बात पर ध्यान देते होंगे कि उसके इन्ग्रीडियेंट्स क्या हैं और उसमें फैट कितना है।
आखिर कैसे पता करें कि जो कुकिंग ऑइल आप खरीद रहे हैं वह आपके लिए एकदम सही है? यहां कुछ चीजें बताई जा रही हैं, जिन्हें कुकिंग ऑइल खरीदते समय ध्यान में रखें और चेक कर लें:
1- सबसे पहले तो यह ध्यान में रखें जो आप ऑइल खरीदने जा रहे हैं उसमें सैचरेटेड फैट्स का स्तर काफी कम हो। फैट का मिनिमल अमाउंट सेहत के लिहाज से सही होता है लेकिन इसकी जरा सी भी ज्यादा क्वॉन्टिटी आपके दिल को भारी पड़ सकती है।
2- बेस्ट कुकिंग ऑइल वह होता है जिसमें मोनोसैचरेटेड फैट्स प्रचुर मात्रा में हों। मोनोसैचरेटेड फैट्स न सिर्फ हार्ट संबंधी बीमारियों का खतरा कम करते हैं बल्कि वजन घटाने में भी मदद करते हैं। इसके अलावा ये सीने में जलन को भी कम करते हैं।
3- तेल खरीदते समय यह भी देखें कि उसमें विटामिन ए, डी और ई जरूर हो। विटामिन ए आंखों के लिए फायदेमंद है तो विटामिन डी हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है और दिल का भी ख्याल रखता हैं। वहीं विटामिन ई खराब खान-पान से होने वाली बीमारियों से दूर रखता है।
4- जो कुकिंग ऑइल आप खरीदने जा रहे हैं उसमें ओमेगा 3 और ओमेगा 6 जैसे पॉलिअनसैचरेटेड फैट्स होने चाहिए। ये दोनों ही तत्व बॉडी के लिए बेहद जरूरी हैं। बता दें कि ये दोनों ही फैटी ऐसिड हमारी बॉडी में प्रड्यूस नहीं होते और डायट के जरिए ही इनके स्तर को बॉडी में मेनटेन किया जा सकता है। लेकिन ध्यान रहे कि ओमेगा 6 का स्तर ओमेगा 3 से कम ही होना चाहिए।
5- कुकिंग ऑइल में कोई ट्रांस फैट नहीं होना चाहिए। ट्रांस फैट्स बॉडी को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। इनकी वजह से बॉडी में बैड कलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ जाता है और हार्ट संबंधी बीमारियों का भी खतरा बढ़ जाता है।
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