मेगा डील तो हुई पर अहम मसलों पर Jio और Facebook की राय अलग-अलग
बेंगलुरु/नई दिल्ली
फेसबुक ने रिलायंस जियो से कारोबारी नाता (Jio Facebook deal) जोड़ तो लिया है, लेकिन डेटा कलेक्शन, स्टोरेज और शेयरिंग पर भारत में चल रही नीतिगत बहसों में दोनों की राय अलग दिख सकती है। लीगल एक्सपर्ट्स ने कहा कि इन मसलों पर दोनों कंपनियों की राय काफी अलग है। फेसबुक ने जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio platforms) में 9.9 प्रतिशत स्टेक 5.7 अरब डॉलर में खरीदने का निर्णय किया है।
फेसबुक केंद्र सरकार की इस मांग का विरोध करती रही है कि भारतीयों के डेटा भारत में ही स्टोर किए जाने चाहिए। वहीं आरआईएल के चेयरमैन मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) का साफ रुख रहा है कि डेटा पर कंट्रोल भारतीयों का होना चाहिए, न कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों का।
सोशल मीडिया डेटा का एक्सेस कानूनी एजेंसियों को देने के बारे में भी फेसबुक और जियो की राय अलग रही है। पिछले साल जियो ने ट्राई से कहा था कि सभी ओवर द टॉप प्लेटफॉर्म्स को डीक्रिप्शन की सहित पूरा डेटा एक्सेस भारत की कानूनी एजेंसियों के हवाले करना चाहिए। वहीं, फेसबुक की वॉट्सऐप मेसेज ओरिजिन की जानकारी देने के सरकार के अनुरोध का विरोध करती रही है और एंड टु एंड एनक्रिप्शन का हवाला देती रही है। कंपनी का मानना है कि एनक्रिप्शन तोड़ने से प्राइवेसी पर आंच आएगी। फेसबुक ने अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट से भी कहा था कि वह यूजर्स का डेटा भारत सरकार को देने को बाध्य नहीं है।
डील से पहले पॉलिसी मैटर्स पर हुई चर्चा
एक्सपर्ट्स ने कहा कि दोनों नई पार्टनर्स हो सकता है कि अपना रुख नरम न करें, खासतौर से डेटा लोकलाइजेशन या एनक्रिप्शन के मामले में, लेकिन वे कई बातों में तालमेल कर सकती हैं। एक सूत्र ने कहा कि पॉलिसी मैटर्स पर मतभेदों के बारे में डील पर दस्तखत होने से पहले चर्चा की गई थी। इस मसले पर पूछे गए सवाल के जवाब में जियो के एक प्रवक्ता ने रिलायंस के स्ट्रैटेजी हेड अंशुमान ठाकुर के पहले दिए गए एक जवाब का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि फेसबुक और जियो स्वतंत्र इकाइयां हैं और कई क्षेत्रों में वे सहयोग करेंगी और कई अन्य में हो सकता है कि उनकी राय एक न हो।
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