हार वाले जिलों में भंग होगी कार्यकारिणी, उपचुनाव में हार के बाद जिला संगठनों पर भी गिरेगी गाज
भोपाल
उपचुनाव में जिन-जिन जिलों में कांग्रेस की हार हुई है, उन जिलों के पदाधिकारियों पर गाज गिर सकती है। इनमें से कांगे्रेस एक दर्जन से ज्यादा जिलों की कार्यकारिणी को भंग कर सकती है। इसमें सबसे ज्यादा जिले ग्वालियर और मालवा-निमाड़ क्षेत्र के होंगे। कमलनाथ के दिल्ली से वापस आने के बाद संगठन में जिला स्तर तक बढ़े बदलाव की अलकले लगाई जा रही है।
कमलनाथ के दिल्ली से वापस आने के बाद उन्हें जिला संगठनों से संबंधित रिपोर्ट दी जाएगी। दिल्ली जाने से पहले वे प्रदेश कांग्रेस के कुछ चुनिंदा पदाधिकारियों को जिन जिलों में उपचुनाव थे उन जिलों के संगठन की सक्रियता सहित अन्य बिंदुओं को एकत्रित कर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश देकर गए थे। सूत्रों की मानी जाए तो उनके निर्देश पर कुछ जिलों की रिपोर्ट बन चुकी है, जिनमें से अधिंकाश जिलों में संगठन के पदाधिकारियों की सक्रियात उपचुनाव में प्रभावी नहीं मानी गई। ऐसे सभी पदाधिकारियों को पद से हटाया जाना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि इन्हें हटाने के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ पूरे जिले की कार्यकारिणी ही भंग कर सकते हैं।
गौरतलब है कि प्रदेश के 19 जिलों की 28 सीटों पर हुए उपचुनाव हुए थे। जिनमें से कांग्रेस मालवा एवं निमाड के इंदौर, धार, खंडवा, नेपानगर, मंदसौर, देवास जिलों में हारी। यहां से सिर्फ वह आगर मालवा की ही एक सीट जीत सकी। वहीं बुंंदेलखंड के सागर और छतरपुर जिले में भी कांग्रेस उपचुनाव हारी। इसके अलावा गुना, अशोकनगर, दतिया जिले में कांग्रेस जीत नहीं सकी थी। वहीं महाकौशल के अनूपपुर में भी कांग्रेस उपचुनाव में हारी थी।
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