बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस कानून पर जारी बवाल, गृह विभाग ने बताई फोर्स की सीमा
पटना
बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस (पूर्व में बीएमपी) को वारंट के बैगर गिरफ्तारी और तलाशी लेने की शक्तियां सिर्फ राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित उन प्रतिष्ठानों तक ही होगी, जहां वह प्रतिनियुक्त होंगे। इससे इतर विशेष शक्तियों का इस्तेमाल विशेष सशस्त्र पुलिस नहीं कर सकती। गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव चैतन्य प्रसाद ने गुरुवार को पटेल भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी। अपर मुख्य सचिव ने बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस को दिए गए अधिकार के दुरुपयोग की आशंका को सिरे से खारिज कर दिया। कहा कि राज्य के औद्योगिक संस्थान, महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान और ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा में विशेष सशस्त्र पुलिस की प्रतिनियुक्ति राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाने के बाद ही होगी। अधिसूचित प्रतिष्ठान में जहां इनकी प्रतिनियुक्ति होगी वहीं तक इनके अधिकार सीमित होंगे। राज्य सरकार द्वारा जिन प्रतिष्ठानों को अधिसूचित नहीं किया जाता है वहां पर यदि इनकी प्रतिनियुक्ति रहती है तो विशेष सशस्त्र पुलिस को ये अधिकार नहीं होंगे।
लोगों की सुरक्षा के लिए दिए गए अधिकार
उन्होंने कहा कि राज्य में तेजी से विकास हो रहा है। महाबोधि मंदिर और दरभंगा एयरपोर्ट की सुरक्षा में विशेष सशस्त्र पुलिस की तैनाती की गई है। आनेवाले दिनों में मेट्रो और दूसरे जगहों पर भी इनकी प्रतिनियुक्ति की आवश्यकता होगी। ऐसे में लोगों की सुरक्षा और हित में यह कानून बनाया जाना जरूरी था। यदि कहीं उग्रवादी गतिविधियां होती हैं या बम छुपाते कोई दिखता है तो उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जा सके इसके लिए बगैर वारंट के तलाशी और गिरफ्तारी का अधिकार दिया गया है। इससे राज्य की आंतरिक सुरक्षा सुदृढ़ होगी। यह केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के तर्ज पर अपने दायित्वों का निर्वहन करेगा। साथ ही केन्द्रीय बलों पर बिहार की निर्भरता कम होगी।
डीजीपी ने गिरफ्तारी पर चल रही अटकलों को झुठलाया
डीजीपी एसके सिंघल और डीजी आरएस भट्टी ने कहा कि गिरफ्तारी और तलाशी का अधिकार परिसर तक ही सीमित होगा जहां इनकी प्रतिनियुक्ति राज्य सरकार के आदेश पर विशेष तौर पर की जाएगी। जहां तक गिरफ्तारी का सवाल है तो विशेष सशस्त्र पुलिस गिरफ्तार व्यक्ति को तुरंत स्थानीय थाना के सुपुर्द करेगी। यदि वहां थाना का कोई पदाधिकारी मौजूद है तो उसे वहीं सौंप दिया जाएगा। साथ ही एक रिपोर्ट भी दी जाएगी कि किन परिस्थितियों में और कैसे गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी और न्यायालय में पेश करने की जो समय सीमा कानून में तय है उसकी के तहत तमाम कार्रवाई होगी। कांड का अनुसंधान भी संबंधित थाना के स्तर पर ही होगा।
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