सावधान...सेहत के लिए खतरनाक बन सकता है बर्तन धोने का स्पंज

सावधान...सेहत के लिए खतरनाक बन सकता है बर्तन धोने का स्पंज

नई दिल्ली। रोज़मर्रा में इस्तेमाल होने वाला बर्तन धोने का स्पंज आपकी सेहत के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्पंज का सही तरीके से इस्तेमाल, उसकी गुणवत्ता और समय-समय पर उसे बदलना बेहद जरूरी है।

स्पंज माइक्रोप्लास्टिक के स्रोत के साथ ही पानी की खपत भी बढ़ाता है

हाल ही में अप्रैल 2026 में एनवायरनमेंटल एडवांसेज जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, बर्तन धोते समय स्पंज के घिसने से हर व्यक्ति सालभर में कई ग्राम माइक्रोप्लास्टिक उत्पन्न करता है। यह न केवल माइक्रोप्लास्टिक का स्रोत है, बल्कि पानी की खपत भी बढ़ाता है। शोध के दौरान स्पंज को इस्तेमाल से पहले और बाद में तौला गया और लैब में विशेष मशीन की मदद से वास्तविक परिस्थितियों जैसे परीक्षण किए गए।

जितना ज्यादा जोर से रगड़ेंगे, उतनी ही अधिक मात्रा में कण निकलते हैं

शोध में पाया गया कि हर बार इस्तेमाल के साथ स्पंज धीरे-धीरे घिसता है और उससे माइक्रोप्लास्टिक कण निकलते हैं। एक व्यक्ति साल में लगभग 0.68 ग्राम से 4.21 ग्राम तक माइक्रोप्लास्टिक पैदा कर सकता है। अगर इसे बड़े स्तर पर देखा जाए तो यह मात्रा हर साल कई टन तक पहुंच सकती है। स्पंज को जितना ज्यादा जोर से रगड़ा जाता है, उतनी ही अधिक मात्रा में कण निकलते हैं।

स्पंज को हर 7 से 15 दिनों के बीच बदल देना चाहिए

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, स्पंज को हर 7 से 15 दिनों के बीच बदल देना चाहिए। लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर यह बैक्टीरिया का अड्डा बन सकता है और माइक्रोप्लास्टिक का उत्सर्जन भी बढ़ाता है। गीले स्पंज में बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं, जिससे फूड पॉइजनिंग का खतरा भी हो सकता है।

स्पंज को माइक्रोवेव में लगभग 1 मिनट गर्म करें

गीले स्पंज को माइक्रोवेव में लगभग 1 मिनट गर्म करने से लगभग 99.99999% बैक्टीरिया खत्म हो सकते हैं। डिशवॉशर के ड्राई साइकिल में रखने से भी 99.9998% तक बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं। ब्लीच, नींबू पानी या साधारण पानी से सफाई उतनी प्रभावी नहीं होती।

इनका प्रयोग करना बेहतर

डिशवॉशर: बर्तनों को अधिक साफ और कीटाणुरहित करता है। सिलिकॉन डिश ब्रश या ग्लव्स: इनकी सतह चिकनी होती है, जिससे बैक्टीरिया कम पनपते हैं।