मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मेडिकल स्टाफ की नियुक्ति का निर्देश दिया
रायपुर. छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. आलम यह है कि संक्रमित मरीजों को वक्त पर इलाज नहीं मिल पा रहा है. अस्पतालों में चिकित्सकों और मेडिकल स्टाफ की कमी हो रही है. इस स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने कहा है कि रिटायर्ड और निजी चिकित्सकों, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ की सेवा संविदा दर पर ली जाएगी.
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कलेक्टरों को निर्देश दिया कि कोरोना पीड़ितों के इलाज के लिए रिटायर्ड व निजी चिकित्सकों, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ की सेवाएं संविदा दर पर ली जाएं. राज्य में कोरोना संक्रमण की गंभीर स्थिति को देखते हुए दिए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि जिलों में स्थापित डेडिकेटेड हॉस्पिटल, कोविड केयर सेंटर में मेडिकल स्टाफ की भर्ती की जाए. यह नियुक्ति तीन महीने या अधिकतम कोविड संक्रमण अवधि तक के लिए होगी. इन मेडिकल स्टाफ के मानदेय का भुगतान डीएमएफ फंड से किया जाएगा.
इस बीच, केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ को पृथकवास, ऑक्सीजन, आईसीयू बिस्तर और एम्बुलेंस की संख्या बढ़ाने का सुझाव दिया है. केंद्र सरकार ने यह भी कहा कि कोविड-19 के मामलों का जल्द पता लगाकर मृत्यु दर में कमी लाने और राष्ट्रीय उपचार प्रोटोकॉल का पालन किया जाए. केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला ने केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण के साथ छत्तीसगढ़ में कोविड-19 की स्थिति की उच्चस्तरीय समीक्षा की और गैर जरूरी यात्रा नहीं करने वह सार्वजनिक स्थलों पर भीड़भाड़ रोकने का सख्ती और प्रभावी ढंग से पालन करने पर जोर दिया.
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में 7 दिनों की गतिशील औसत के आधार पर साप्ताहिक नए मामले में तकरीबन 6.2 प्रतिशत वृद्धि की रिपोर्ट है. स्वास्थ्य मंत्रालय के बयान के अनुसार, ‘पिछले दो हफ्ते में राज्य में साप्ताहिक नए मामलों में तकरीबन 131 फीसदी की वृद्धि देखने को मिली है. छत्तीसगढ़ के 22 जिलों ने पिछले 30 दिनों में सर्वाधिक मामलों की संख्या पार कर ली है. इनमें सबसे अधिक प्रभावित रायपुर, दुर्ग, राजनंदगांव और बिलासपुर हैं.’
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