शराबबंदी का मजाक उड़ाने वाले दलित-पिछड़ा विरोधी : नीतीश
पटना
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि शराबबंदी के खिलाफ बोलना आत्मघाती है। इसका विरोध करने वाले एससी-एसटी, पिछड़ा-अतिपिछड़ा विरोधी हैं। शराबबंदी और समाज सुधार के सभी विषय पर कोई समझौता नहीं हो सकता। इन अभियानों को कोई रोकना चाहेगा तो हम अंतिम कुर्बानी देने को भी तैयार हैं। मुख्यमंत्री शुक्रवार की शाम शिक्षा मंत्री कृष्ण नंदन प्रसाद वर्मा के सरकारी आवास पर आयोजित जदयू विधानमंडल दल की बैठक को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शराबबंदी सर्वदलीय बैठक, विधानमंडल का संकल्प और राज्यव्यापी मानव शृंखला का नतीजा है। जो लोग इन सबमें शामिल थे आज वही अगर इसका मजाक उड़ा रहे हैं तो उसकी मूल भावना को आहत करना है। शराबबंदी की मांग स्वयं सहायता समूह ने की। इसमें एससी-एसटी, पिछड़ा और अतिपिछड़ा वर्ग की महिलाएं शामिल हैं। शराबबंदी से सबसे अधिक लाभ भी इसी वर्ग को हुआ है। हमने सर्वेक्षण कराया है। उनका जीवन स्तर ऊंचा हो यह बेहतर या उनकी कमाई बर्बाद हो जाए यह बेहतर?
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक संवाद में आयी राय, विधिक राय, निश्चय यात्रा और शराबबंदी कानून की समीक्षा के बाद संशोधन विधेयक आया है। कैसे भ्रामक प्रचार हुए। कहा गया डेढ़ लाख लोग शराबबंदी में बंद हैं। 8 हजार बंद थे और जेलों की क्षमता ही 40 हजार है। कहा कि शराबबंदी में कोई नरमी नहीं होगी। वे क्राइम, करप्शन और कम्युनिलिज्म से कभी समझौता नहीं करेंगे।
बैठक में शिक्षा मंत्री कृष्ण नंदन प्रसाद वर्मा ने मुख्यमंत्री समेत सभी विधायक विधान पार्षदों का स्वागत पार्कर पेन देकर किया। बैठक का संचालन संसदीय मंत्री श्रवण कुमार ने किया। बिजेन्द्र प्रसाद यादव, ललन सिंह, श्याम रजक, संजय गांधी, अशोक चौधरी, नीरज कुमार, रणवीर नंदन समेत सभी वरिष्ठ मंत्री, विधायक, विधान पार्षद मौजूद रहे।
विपक्ष के दुष्प्रचार का करारा जवाब दें
मुख्यमंत्री ने जदयू के मंत्री, विधायक, विधान पार्षदों को टास्क दिया कि वे अपने क्षेत्र में जाएं। विपक्ष के दुष्प्रचार का करारा जवाब दें। सरकार के काम की जानकारी सोशल मीडिया से भी लोगों तक पहुंचाएं। विधानमंडल के मौजूदा सत्र में निरंतर मौजूद रहें और विपक्ष की हर बात का जवाब दें। प्रश्नकाल, शून्यकाल और ध्यानाकर्षण का फायदा उठाएं। क्षेत्र और बिहार के संदर्भ में सवाल उठाएं।
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