समंदर में बढ़ी भारत की ताकत,युद्धपोत VC 11184 नेवी में शामिल
नई दिल्ली
भारत ने चुपके से अपने उस युद्धपोत को नेवी में शामिल कर लिया है जो दुश्मन की न्यूक्लियर मिसाइलों को ट्रैक कर सकता है और समंदर के भीतर होने वाली गतिविधियों पर नजर रख सकता है। 2014 से ही इस पोत को बनाने का काम चल रहा था। VC 11184 नाम के इस पोत के साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है बहुत दूर किए गए मिसाइल लॉन्च को भी ट्रैक कर सकता है। हमारे सहयोगी इकनॉमिक टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि पिछले साल अक्टूबर में ही VC 11184 को नेवी में शामिल कर लिया गया लेकिन इसे सार्वजनिक नहीं किया गया।
अमेरिका, फ्रांस, रूस, चीन के क्लब में शामिल हुआ भारत
भारत से पहले अमेरिका, फ्रांस, चीन और रूस के पास ही इस तरह के पोत मौजूद हैं जो समंदर में मिसाइल लॉन्च को ट्रैक कर सकते हैं। यह सर्विलांस पोत सामरिक मिसाइल प्रक्षेपण और पानी के भीतर होने वाली गतिविधियों पर नजर रखने में सक्षम है। इस पोत के माध्यम से अपने दुश्मनों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए भारत की सर्विलांस क्षमता काफी बढ़ गई है।
2014 में शुरू हुआ था युद्धपोत का निर्माण
इस पोत का निर्माण विशाखापत्तनम में 2014 में हिन्दुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड में शुरू किया था। रक्षा एवं अनुसंधान विकास संस्थान (डीआरडीओ) और इंडियन नेवी सहित अन्य एजेंसियों के सहयोग से पोत का विकास किया गया है। क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के मद्देनजर भारत भी हिन्द महासागर में अपनी सर्विलांस गतिविधियों को विस्तार दे रहा है। VC 11184 से अब भारत की निगरानी क्षमता काफी बढ़ चुकी है।
15 हजार टन के युद्धपोत पर लगे हैं गुंबद के आकार के 3 एंटिना
इसकी बदौलत अब भारत के पास पाकिस्तान, चीन जैसे दुश्मनों की तरफ से किए जा रहे मिसाइल लॉन्च का तुरंत पता लगाने की क्षमता है। 15000 टन के इस पोत पर स्पेशलाइज़्ड सर्विलांस सिस्टम है। गुंबद के आकार के इसके तीन एंटिनों पर सेंसर लगे हुए हैं। 2018 से ही इस पर लगे उपकरणों, सिस्टमों का टेस्ट किया जा रहा था। मेक इन इंडिया पहल के तहत बने इस युद्धपोत पर 725 करोड़ रुपये का खर्च आया है।
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