सरकार की नीतियों से राजस्थान बना निवेशकों की पहली पसंद: उद्योग मंत्री

सरकार की नीतियों से राजस्थान बना निवेशकों की पहली पसंद: उद्योग मंत्री

नए साल में और बेहतर प्रदर्शन करने का संकल्पः उद्योग मंत्री

रीको ने पिछली छमाही में निवेशकों को लगभग 3,200 करोड़ रूपये के 1790 भूखण्ड का आवंटन

भूखण्ड आवंटन हेतु 20 नवीन औद्योगिक क्षेत्र खोले

जयपुर। राज्य सरकार ने अपने कार्यकाल के प्रथम वर्ष में राइजिंग राजस्थान समिट के माध्यम से प्रदेश में औद्योगिक निवेश को लेकर अपनी दूरगामी सोच को जनता के समक्ष स्पष्ट किया। निवेशकों ने भी राज्य सरकार पर भरोसा जताते हुए लगभग 35 लाख करोड़ रुपये के एमओयू किए जिनमें से अब तक 8 लाख करोड़ रूपये से अधिक के एमओयू धरातल पर उतरने में सफल रहे हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की विकासोन्मुख सोच का ही परिणाम है कि गत दो वर्षों में राज्य सरकार ने औद्योगिक विकास को गति देने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। इन निर्णयों के क्रियान्वयन में रीको ने भी अपनी प्रभावी भूमिका निभाई है।

राज्य के औद्योगिक क्षेत्रों में ज्यादा से ज्यादा निवेश हो, लोगों को रोजगार मिले एवं उद्यमियों को अपना उद्योग लगाने एवं संचालन में आसानी हों। इसके लिए राज्य सरकार एवं रीको ने नई नीतियां जारी की तथा नियमों का सरलीकरण किया। राइजिंग राजस्थान में एमओयू करने वाले निवेशकों को आरक्षित दर पर औद्योगिक भूमि उपलब्ध हो सके इसके लिए रीको ने प्रत्यक्ष आवंटन योजना मार्च- 2025 में लागू की जिसके सात चरण पूर्ण हो चुके हैं। इसी तरह रीको औद्योगिक क्षेत्रों में पट्टाधारी अपने आवंटित भूखण्ड को एक अनुमत उपयोग से दूसरे अनुमत उपयोग में ले सकें इसके लिए नियमों में संशोधन किया गया। निवेशकों को अविकसित एवं अर्धविकसित भूमि उपलब्ध कराने के लिए अविकसित एवं अर्धविकसित नीति भी लागू की जिससे निवेशक बहुत कम समय में अपनी परियोजना को स्थापित कर सकते हैं। लॉजिस्टिक एवं वेयरहाउसिंग के लिए भी रीको ने नई नीति लागू की जिसके अंतर्गत औद्योगिक क्षेत्रों में नियोजित भूखण्ड पर लॉजिस्टिक एवं वेयरहाउसिंग इकाई लगाई जा सके।

राज्य सरकार एवं रीको द्वारा लागू की गई नीतियों एवं नियमों के सरलीकरण के कारण ही राजस्थान निवेशकों का पसंदीदा राज्य बना है और रीको के औद्योगिक क्षेत्रों में भूखण्ड आवंटन की गति तेज हुई है। रीको ने अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान औद्योगिक विकास के प्रमुख संकेतकों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में भूमि आवंटन, राजस्व और औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार में तेज बढ़ोतरी देखी गई है। अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान आवंटित भूमि की लागत बढ़कर 3,200 करोड़ रूपये हो गई जो अप्रैल-दिसंबर 2024 में लगभग 700 करोड़ रूपये थी। इसी अवधि में आवंटित भूखंडों की संख्या भी लगभग 670 से बढ़कर 1790 हो गई जो रीको विकसित औद्योगिक क्षेत्रों में निवेशकों की बढ़ती रुचि को दर्शाती है।

औद्योगिक विकास के लिए ली गई सरकारी भूमि का मूल्य लगभग 80 करोड़ रूपये से बढ़कर 1120 करोड़ रूपये हो गया। रीको की प्राप्तियां भी लगभग दोगुनी होकर 1190 करोड़ से बढ़कर 2130 करोड़ रूपये पर पहुंच गईं जबकि जारी किए गए कार्यादेश 350 करोड़ से बढ़कर 670 करोड़ रूपये हो गए।

जमीनी स्तर पर भी औद्योगिक विस्तार की गति तेज हुई है। अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान 20 नए औद्योगिक क्षेत्र खोले गए जबकि एक वर्ष पहले इसी अवधि में छह औद्योगिक क्षेत्र ही शुरू किए गए थे।

राज्य सरकार राजस्थान में पूर्ण इंडस्ट्रियल टाउनशिप के रूप में जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र को लगभग 3600 हैक्टेयर भूमि पर विकसित कर रही है। चरण-ए में 641 हैक्टेयर भूमि पर प्रारम्भिक चरण में लगभग 370 करोड़ रूपये से बुनियादी ढांचे के निर्माण की कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है। द्वितीय चरण लगभग 1100 हैक्टेयर भूमि पर विकसित किया जाना है। इस औद्योगिक टाउनशिप में राज्य का सबसे बड़ा मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब की स्थापना भी प्रस्तावित है। इस औद्योगिक टाउनशिप में भविष्य में कुल 1200 से अधिक इकाइयां स्थापित होने की संभावना है जिनसे वर्ष 2042 तक लगभग तीन लाख लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। चरण-ए में आगामी कुछ माह में उद्यमियों को आकर्षक एवं प्रतिस्पर्धी दरों पर भूमि का आवंटन प्रारम्भ कर दिया जायेगा। इस हेतु सुगम एवं लचीली भू-निपटान नीति को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस वर्ष इसके दौसा और केबीएनआईआर नोड पर भी तीव्र गति से काम किया जाना है। राजस्थान में अगले पांच वर्षों में 10 आईसीडी/एमएमएलएच स्थापित होने की उम्मीद है जो लॉजिस्टिक सेक्टर को नई दिशा देंगे। 

रीको ने औद्योगिक क्षेत्रों में आवंटित भूखण्डों की उपयोगिता को और अधिक व्यावहारिक एवं समयानुकूल बनाने हेतु रीको भू-निपटान नियम, 1979 के नियम 20 (सी) में आवश्यक बदलाव किये हैं। इसके अंतर्गत उद्यमी रीको औद्योगिक क्षेत्रों में पट्टाधारी एक अनुमत उपयोग से दूसरे अनुमत उपयोग में निर्धारित शुल्क का भुगतान कर परिवर्तन की स्वीकृति प्राप्त कर सकते हैं। कुछ समय में ही रीको को 115 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं जिनमें औद्योगिक से व्यावसायिक उपयोग परिवर्तन हेतु सबसे ज्यादा 75 आवेदन प्राप्त हुए। इसके अतिरिक्त आवासीय, होटल, वेयरहाउस, इंस्टीट्यूशनल, हॉस्पिटल एवं होटल आदि गतिविधियों हेतु परिवर्तन के आवेदन शामिल हैं। उक्त अनुमति प्रदान करने से जहां एक ओर भूमि का अधिकतम एवं बेहतर उपयोग हो सकेगा वहीं दूसरी ओर रोजगार के नवीन अवसरों का भी सृजन होगा।

रीको की स्थापना से पूर्व औद्योगिक क्षेत्रों का विकास उद्योग विभाग द्वारा किया जा रहा था। वर्ष 1979 में कुल 37 औद्योगिक क्षेत्रों को रीको को हस्तांतरित किया गया जिनमें रीको द्वारा रीको भू-निपटान नियम, 1979 के अनुसार कार्रवाई की जा रही थी। लेकिन अराफात पेट्रोकेमिकल के प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के आलेक में तथा उद्यमियों को उक्त निर्णय के कारण आ रही कठिनाइयों के निराकरण के लिये राज्य सरकार द्वारा राजस्थान भू-राजस्व संशोधन एवं विधिमान्य अधिनियम 2025 को प्रभावी किया है। इस नवीन कानून के अन्तर्गत नियम बनाये जा रहे हैं ताकि उद्यमियों की वर्षों से लंबित समस्या का निराकरण हो सके तथा भविष्य में रीको को इस संबंध में समस्त अधिकार प्राप्त हो सकें।

पचपदरा (बालोतरा) स्थित एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड के निकट विकसित किए जा रहे रीको के राजस्थान पेट्रो जोन के प्रथम फेज में नियोजित भूखण्ड आवंटन प्रक्रिया निरंतर आगे बढ़ रही है। औद्योगिक क्षेत्र बोरावास कलावा में स्थित राजस्थान पेट्रो जोन में रिफाइनरी के सह-उत्पाद आधारित उद्योगों हेतु 11 भूखण्ड आवंटित किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त इस क्षेत्र में 8 प्लग एवं प्ले फैक्ट्री शेड का निर्माण भी किया जा रहा है। रीको द्वारा डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब भी किशनगढ़ में विकसित किया जा रहा है जिसमें डिफेंस क्षेत्र की एक इकाई को किशनगढ़ में भूमि आवंटित की गई है जो लगभग 160 करोड़ रुपये का निवेश कर अत्याधुनिक डिफेंस उत्पादों का उत्पादन होगा।

विभिन्न क्षेत्रों के उद्यमियों को उत्पादन इकाई के संचालन में सरकार का अधिक से अधिक सहयोग मिले इस हेतु राज्य सरकार द्वारा गत वर्ष नई नीतियॉं लाईं गईं जिनमें ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर पॉलिसी, ट्रेड प्रमोशन पॉलिसी, राजस्थान लॉजिस्टिक पॉलिसी, राजस्थान टैक्सटाइल एंड अपैरल पॉलिसी, रीको डायरेक्ट अलॉटमेंट पॉलिसी आदि सम्मिलित हैं। इसके अलावा राज्य सरकार सेमी कंडक्टर पॉलिसी एवं एयरोस्पेस एंड डिफेंस पॉलिसी भी जल्द लाने जा रही है। इन नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी राज्य सरकार फोकस कर रही है। 

राज्य सरकार ने निजी भूमि की अवाप्ति प्रक्रिया में लगने वाले समय के कारण औद्योगिक परियोजनाओं में होने वाली देरी एवं बढ़ने वाली लागत की समस्या को दूर करने के लिए सहमति के आधार पर निजी भूमि लिये जाने के लिये नवीन निजी भूमि एकत्रीकरण विधेयक लाया जा रहा है जिसके तहत भूमि मालिकों को यभासंभव उनकी सहमति से भूमि ली जायेगी और उन्हें विकास में भागीदार बनाते हुए नकद मुआवजे के एवज में विकसित भूमि दी जायेगी। यह विधेयक औद्योगिक प्रोजेक्ट्स के लिए भूमि की उपलब्धता को सुगम बनाएगा और पारदर्शी व समयबद्ध विकास प्रक्रिया स्थापित करेगा जिससे उद्योगों के साथ-साथ भूमि स्वामियों को भी दीर्घकालिक लाभ मिलेगा तथा किसान विकास में भागीदार बन सकेंगे। 

उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ ने बताया कि राज्य सरकार ने वर्ष 2026 का अपना रोडमेप तैयार कर लिया है। इनमें जेपीएमआईए का विकास, डीएमआईसी के अन्य दो नोड दौसा और केबीएनआईआर, टैक्सटाइल पार्क (भीलवाड़ा) एवं डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग जोन (किशनगढ़) को विकसित करना सम्मिलित है। सरकार की प्राथमिकताओं में इस वर्ष दौसा-बांदीकुई औद्योगिक क्षेत्र को विकसित करने के साथ अन्य औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करना एवं वहां आधारभूत सुविधाओं को उन्नत करना भी है। राज्य सरकार ऐसा बिजनेस मॉडल स्थापित करना चाहती है जिसमें ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के नए आयाम स्थापित हों तथा उद्यमियों को उद्योग स्थापित करने में आसानी हो। 

रीको प्रबंध निदेशक श्रीमती शिवांगी स्वर्णकार ने बताया कि उद्यमियों एवं निवेशकों की सुगमता हेतु राज्य सरकार नियमों एवं नीतियों का सरलीकरण कर रही है। उद्यमियों को हर संभव मदद करने के लिये सरकार द्वारा नई पॉलिसी लाई गई हैं जिनके सफल क्रियान्वयन पर सभी विभागों का फोकस है। सरकार वर्ष 2026 में एयरोस्पेस एंड डिफेंस पॉलिसी, इंडस्ट्रियल डवलपमेंट पॉलिसी, सेमी कंडक्टर पॉलिसी एवं पार्क प्रमोशन पॉलिसी भी ला रही है।