भामाशाहों के सहयोग से बर में बने पशु चिकित्सालय भवन का भव्य लोकार्पण

भामाशाहों के सहयोग से बर में बने पशु चिकित्सालय भवन का भव्य लोकार्पण

जयपुर। पाली जिले के बर कस्बे में नवनिर्मित राजकीय पशु चिकित्सालय भवन का लोकार्पण समारोह गुरुवार को संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान सरकार के केबिनेट मंत्री अविनाश गहलोत एवं विशेष अतिथि पशुपालन, डेयरी एवं गोपालन मंत्री जोराराम कुमावत उपस्थित रहे। मंत्रियों ने संयुक्त रूप से फीता काटकर पशु चिकित्सालय भवन का उद्घाटन किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री अविनाश गहलोत ने कहा कि राजस्थान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार पशुपालन है। प्रदेश के लाखों परिवार पशुपालन से जुड़े हैं और उनकी आजीविका सीधे तौर पर पशुधन पर निर्भर है। ऐसे में पशुओं के इलाज के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त पशु चिकित्सालयों की आवश्यकता बेहद अहम है। उन्होंने कहा कि बर में इस नए भवन के शुरू होने से आसपास के कई गांवों के पशुपालकों को राहत मिलेगी और अब उन्हें पशुओं के इलाज के लिए दूर-दराज के कस्बों में भटकना नहीं पड़ेगा। मंत्री गहलोत ने कहा कि बर गांव के लिए भामाशाहों ने आगे बढ़कर जो योगदान दिया है, वह पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणास्रोत है। भामाशाहों की उदार सोच और सामाजिक जिम्मेदारी के भाव से पशु चिकित्सालय भवन का निर्माण संभव हो पाया। यह भवन केवल एक संरचना नहीं, बल्कि बर गांव के पशुपालकों के विश्वास और सेवा का केंद्र बनेगा। भामाशाहों ने बिना किसी स्वार्थ के जनहित को प्राथमिकता देते हुए गांव की जरूरत को समझा और सहयोग किया। उनके इस योगदान से बर गांव को स्थायी सुविधा मिली है, जो वर्षों तक पशुपालकों और ग्रामीणों के काम आएगी। यह पशु चिकित्सालय केवल एक भवन नहीं, बल्कि पशुपालकों के भरोसे और सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पशुपालकों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि बीमारी के कारण होने वाले नुकसान को रोका जा सके। उन्होंने भामाशाहों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि जनसहयोग से बने ऐसे भवन वर्षों तक सेवा और स्मृति का केंद्र बने रहते हैं।

प्रदेश में 536 मोबाइल वेटरनरी वाहन घर-घर जा रहा

पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि राज्य सरकार पशुपालकों के कल्याण के लिए निरंतर ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि राजस्थान में पशु चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किया गया है। राज्यभर में 536 मोबाइल वेटरनरी वाहन संचालित किए गए हैं, जो गांव-गांव जाकर पशुओं का इलाज कर रहे हैं। पशुपालक हेल्पलाइन नंबर 1962 पर कॉल कर घर बैठे पशु चिकित्सा सेवा प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह सेवा विशेष रूप से आपात परिस्थितियों में पशुओं के लिए जीवनरक्षक साबित हो रही है। कुमावत ने बताया कि गोवंश संरक्षण और गोशालाओं के विकास पर भी सरकार का विशेष फोकस है। राजस्थान में 100 से अधिक गो-केयर सेंटर स्थापित किए गए हैं और 300 से ज्यादा गोशालाओं का क्रमोन्नयन किया गया है। गोशालाओं में दवाइयां पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं और दवाओं की किसी प्रकार की कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य गोवंश संरक्षण के साथ-साथ पशुपालकों की आय बढ़ाना है।