लालू यादव 27 साल बाद दोषी करार, 21 फरवरी को कोर्ट सुनाएगी सजा
ट्रेजरी घोटाले में हिरासत में लेकर रिम्स भेजे गए लालू
वकील ने कहा-उम्र और बीमारी को ध्यान में रखते हुए कम-से-कम सजा दें
घोटाला एक नजर में
139 करोड़ का घपला
99 पर चला मुकदमा
170 कुल आरोपी
55 आरोपियों की मौत
53 मुकदमे किए थे दर्ज
36 आरोपियों का सजा
27 साल फैसला आया
05 केस में लालू दोषी
रांची। 950 करोड़ रुपए के देश के बहुचर्चित चारा घोटाले के सबसे बड़े (डोरंडा ट्रेजरी से 139.35 करोड़ के गबन) केस में मंगलवार को फैसला आ गया। सीबीआई की विशेष अदालत ने आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव सहित 75 आरोपियों को दोषी करार दिया है। वहीं, 24 लोगों को बरी कर दिया। सजा का ऐलान 21 फरवरी को होगा। लालू यादव को कोर्ट की ओर से दोषी करार देते ही पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इसके बाद उनके वकील के अनुरोध पर उन्हें जेल न भेजकर रिम्स में भेजा गया। लालू कागजी प्रक्रिया पूरी करने के लिए कोर्ट से होटवार जेल गए फिर वहां से रिम्स चले गए। 21 फरवरी तक वह यहीं रहेंगे। सीबीआई के स्पेशल पीपी बीएमपी सिंह ने बताया कि मामले में 575 गवाह पेश किए गए। जबकि, बचाव पक्ष से 25 गवाह पेश हुए। सीबीआई ने 15 ट्रंक दस्तावेज अदालत में पेश किए हैं। इस मामले में स्कूटर, मोपेड और बाइक से पशुचारा, सांड, भैंस, बछिया, बकरी और भेड़ झारखंड लाए गए थे। इस गड़बड़ी को साबित करने के लिए सीबीआई ने कई राज्यों के 150 डीटीओ और आरटीओ को गवाह के रूप में शामिल किया था।
सुबह से दोपहर तक बड़ा उलटफेर
जैसे ही लालू के दोषी करार देने की सूचना बाहर आई पटना से लेकर रांची तक उनके समर्थकों में मायूसी छा गई। कोर्ट परिसर आरजेडी नेताओं से पटा है। पुलिस का पहरा सख्त कर दिया गया है। मंगलवार को कोर्ट ने तीन साल से कम वालों को सजा सुनाया है। लालू सहित 10 लोगों की सजा अलग से सुनाई जाएगी। ऐसे में यह माना जा रहा है लालू को तीन साल से अधिक की सजा हो सकती है।
फिर जाना होगा जेल
इससे पहले चारा घोटाले के 4 मामले लालू दोषी करार दिए जा चुके हैं। अभी पहले के सभी मामलों में जमानत पर बाहर थे, लेकिन मंगलवार को कोर्ट के आए फैसले से उन्हें एक बार फिर जेल जाना होगा। 29 जनवरी को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एसके शशि की अदालत ने बहस पूरी होने के बाद 15 फरवरी को फैसले की तारीख निर्धारित की थी। सभी आरोपियों को कोर्ट में स्वयं हाजिर होने का आदेश दिया था। सुनवाई में उपस्थित रहने के लिए लालू 2 दिन पहले 13 फरवरी को ही रांची पहुंच गए थे।
भारी पड़े एस नाम वाले जज
यह दिलचस्प है कि कोर्ट के जिस कक्ष में लालू प्रसाद यादव पर फैसला सुनाया गया, उस कक्ष में तीसरी बार उनकी किस्मत का फैसला लिखा गया है। वर्ष 2013 में कोर्ट के इसी कक्ष में सीबीआई के जज पीके सिंह ने पहली बार लालू प्रसाद यादव को सजा सुनाई थी। इसके बाद लगातार एस नाम के तीन जजों एसएस प्रसाद, शिवपाल सिंह यादव ने उन्हें सजा सुनाई है। अब सबकी नजरें सुधांशु कुमार शशि पर टिकी थी, जिन्होंने भी लालू को दोषी करार दिया।
छह आरोपी फरार
डोरंडा कोषागार मामले में छह नामजद आरोपी फरार हैं। डोरंडा कोषागार मामले में पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद, पूर्व सांसद जगदीश शर्मा, डॉ. आरके राणा, पीएसी के तत्कालीन अध्यक्ष ध्रुव भगत, तत्कालीन पशुपालन सचिव बेक जूलियस, पशुपालन विभाग के सहायक निदेशक डॉ. केएम प्रसाद सहित 99 आरोपी हैं।
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