लंपी रोग के प्रभावी नियंत्रण और रोकथाम पर निगरानी के लिए प्रमुख शासन सचिव ने ली समीक्षा बैठक

लंपी रोग के प्रभावी नियंत्रण और रोकथाम पर निगरानी के लिए प्रमुख शासन सचिव ने ली समीक्षा बैठक

जयपुर। प्रदेश में गोवंश को लंपी स्किन डिजीज से सुरक्षित रखने तथा इसकी प्रभावी रोकथाम और नियंत्रण के लिए पशुपालन विभाग के प्रमुख शासन सचिव विकास सीतारामजी भाले की अध्यक्षता में सोमवार को पशुधन भवन स्थित सभागार में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश में लंपी रोग की वर्तमान स्थिति, टीकाकरण, उपचार व्यवस्था तथा घर-घर जाकर चलाए जा रहे सर्वेक्षण अभियानों की विस्तृत समीक्षा की गई। 
 
भाले ने कहा कि मुख्यमंत्री इस समस्या के प्रति बहुत गंभीर हैं। उनके निर्देशानुसार लंपी रोग की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए विभाग भी  पूरी गंभीरता से कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के पशुपालन आयुक्त डॉ नवीन बी के साथ हुई चर्चा के दौरान डॉ नवीन ने भी राजस्थान में लंपी रोग के नियंत्रण और रोकथाम के लिए किए जा रहे सरकार के प्रयासों की सराहना की है।

बैठक में अधिकारियों को संबोधित करते हुए भाले ने कहा कि जिला स्तर पर प्रतिदिन स्थिति की समीक्षा कर तत्काल आवश्यक कार्रवाई एवं उच्च स्तर पर रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जाए और सभी संबंधित विभागीय अधिकारी आपसी समन्वय से कार्य करते हुए लंपी रोग के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी एवं समयबद्ध कार्ययोजना लागू करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं हो तथा पशुपालकों को समय पर चिकित्सा एवं आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए।

बैठक में विभाग द्वारा की जा रही कार्यवाही के विभिन्न बिंदुओं की समीक्षा करते हुए प्रमुख शासन सचिव ने अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए।

अप्रभावित जिलों पर विशेष फोकसः प्रमुख शासन सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन जिलों में अभी तक लंपी के मामले सामने नहीं आए हैं, वहां विशेष सतर्कता बरती जाए ताकि संक्रमण का प्रसार न हो।  

डोर-टू-डोर सर्वेक्षण एवं सतत निगरानीः चिकित्सा अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में घर-घर जाकर बीमार गोवंश की पहचान एवं सर्वेक्षण के निर्देश दे दिए गए हैं। भाले ने जिला स्तर पर निगरानी समितियों को सक्रिय रखने के लिए संभाग और राज्य स्तर से लगातार मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। 
 
वित्तीय सहायता व दवाइयों की उपलब्धताः प्रत्येक जिला स्तर पर आवश्यक दवाइयों तथा आपातकालीन व्यवस्थाओं के लिए विशेष बजट का आवंटन किया जा रहा है। प्रमुख शासन सचिव ने कड़े निर्देश दिए कि किसी भी स्तर पर दवाइयों की उपलब्धता में कमी नहीं आनी चाहिए विभाग के अधिकारी इसके लिए निरंतर प्रयासरत रहें। साथ ही दवाओं का छिड़काव और फॉगिंग की भी पूरी व्यवस्था की जाए। 

नियंत्रण कक्ष एवं रैपिड रेस्पॉन्स टीम —

राज्य एवं जिला स्तर पर नियंत्रण कक्षों की स्थापना की गई है। त्वरित उपचार सुनिश्चित करने के लिए ब्लॉक स्तर पर रैपिड रेस्पॉन्स टीमों का गठन किया गया है। भाले ने नियंत्रण कक्षों के साथ रेस्पॉन्स टीमों के बेहतर समन्वय के निर्देश दिए जिससे बीमार पशु के इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं हो सके।  

पशु मेलों और हाटों पर अस्थायी रोक —

संक्रमण को नियंत्रित करने तथा गोवंश के आवागमन को सीमित करने के उद्देश्य से पशु मेलों एवं हाटों के आयोजन पर प्रतिबंध लागू किया गया है। प्रमुख षासन सचिव ने इसके अलावा अन्य माध्यमों से भी पशुओं के आवागमन पर अस्थायी रोक लगाने के निर्देष दिए। साथ ही उन्होंने आइसोलेशन सेंटर और साफ सफाई पर विशेष फोकस करने का निर्देश देते हुए कहा कि आधी लड़ाई तो केवल इन दो कार्यवाही से ही जीती जा सकती है। 
 
जागरूकता अभियान

पशुपालकों को रोग के लक्षण, बचाव, स्वच्छता तथा संक्रमित पशुओं को आइसोलेट (पृथक) करने संबंधी आवश्यक जानकारियों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। भाले ने प्रचार प्रसार के लिए विभिन्न प्रिंट और इलेक्ट्रॅानिक माध्यमों के अलावा स्थानीय माध्यमों का भी प्रयोग करने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि अधिक से अधिक पशुपालकों तक यह जानकारी पहुंचे इसका हम हर संभव प्रयास करें।  

प्रमुख शासन सचिव विकास सीतारामजी भाले ने सभी अधिकारियों को आपसी समन्वय से काम करने तथा रोग नियंत्रण में किसी भी प्रकार की कोताही  न बरतने के कड़े निर्देश दिए। पशुपालन विभाग द्वारा यह अपील की गई है कि पशुपालक गोवंश में लंपी के लक्षण दिखने पर घबराएं नहीं और तुरंत निकटतम पशु चिकित्सा केंद्र या कंट्रोल रूम से संपर्क करें।

बैठक में पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. सुरेश मीना ने बताया कि लंपी रोग पर काबू पाने के लिए सभी एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। सभी संबंधित कार्मिकों को हर स्तर पर आपसी समन्वय बनाते हुए काम करने के सख्त निर्देश दे दिए गए हैं जिससे रोग का प्रसार फैलने से बचे और समय रहते रोग पर नियंत्रण पाया जा सके।

बैठक का संचालन करते हुए गोपालन विभाग की निदेशक श्रीमती कश्मी कौर ने कहा कि हम सभी को मिलकर यह प्रयास करना है जिससे लंपी की यह बीमारी इस बार अब तक प्रभावित जिलों से आगे नहीं बढ़े। उन्होंने गौशालाओं से देसी नुस्खों के उपयोग करने का भी आग्रह किया जिससे गौवंशों में इम्यूनिटी बढ़ सके और वे लंपी से प्रभावित न हों। 

बैठक में पशुपालन विभाग के अतिरिक्त निदेशक (मेडिसिन/डिजीज कंट्रोल),पशुपालन तथा गोपालन विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। जिला एवं ब्लॉक स्तरीय अधिकारी तथा गौशाला संचालकों ने बैठक में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से भाग लिया।