साढ़े चार लाख पेंशनर को झटका, मप्र के प्रस्ताव को छत्तीसगढ़ सरकार ने नहीं माना
भोपाल। मध्य प्रदेश के साढ़े चार लाख पेंशनर को छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने बड़ा झटका दिया है। शिवराज सरकार ने पेंशनर की महंगाई राहत जनवरी से पांच प्रतिशत बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा था, जिसे नहीं माना गया।
छत्तीसगढ़ के वित्त विभाग ने जुलाई 2023 से महंगाई राहत पांच प्रतिशत बढ़ाने की सहमति दी है। जबकि, प्रदेश सरकार ने जनवरी से महंगाई राहत बढ़ाने का निर्णय लिया था पर इसका लाभ पेंशनर को नहीं मिलेगा। दरअसल, राज्य पुनर्गठन अधिनियम की धारा 49 के अंतर्गत महंगाई राहत में वृद्धि करने के लिए सहमति अनिवार्य है।
शिवराज सरकार ने 27 जनवरी 2023 को कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में चार और पेंशनर की महंगाई राहत में एक जनवरी से पांच प्रतिशत की वृद्धि करने का निर्णय लिया था। इसका अनुमोदन 28 फरवरी को कैबिनेट ने किया।
वित्त सचिव को दी थी जानकारी
इसके पहले वित्त विभाग के सचिव अजीत कुमार ने 30 जनवरी को छत्तीसगढ़ की वित्त सचिव अलरमेलमंगई डी को पत्र लिखकर प्रदेश सरकार के निर्णय की जानकारी दी और पांच प्रतिशत महंगाई राहत में वृद्धि करने की सहमति मांगी। इस पर उत्तर नहीं मिला तो विभाग ने पांच जून को स्मरण पत्र भेजा। इस पर कोई उत्तर नहीं दिया गया।
दो अगस्त को मिला यह पत्र
दो अगस्त को छत्तीसगढ़ के वित्त विभाग के अवर सचिव इन्द्रप्रकाश अत्रे ने मध्य प्रदेश के वित्त सचिव को भेजे पत्र में कहा कि जनवरी 2023 से 38 प्रतिशत महंगाई राहत बढ़ाने की सहमति मांगी गई है लेकिन छत्तीसगढ़ शासन ने जुलाई से वृद्धि करने का निर्णय लिया है। जुलाई 2023 से पांच प्रतिशत महंगाई राहत में वृद्धि पर सहमति व्यक्त की जाती है।
महंगाई राहत में बढ़ाने में छह माह का विलंब
पेंशनर एसोसिएशन मध्य प्रदेश के वरिष्ठ उपाध्यक्ष गणेश दत्त जोशी का कहना है कि छत्तीसगढ़ ने महंगाई राहत में बढ़ाने में छह माह का विलंब किया। अब प्रदेश सरकार भी जुलाई से महंगाई राहत बढ़ाएगी यानी छह माह में जो आर्थिक लाभ पेंशनर को होता, वो नहीं होगा। यही कारण है कि हम लगातार यह मांग कर रहे हैं कि सहमति की अनिवार्यता को समाप्त किया जाए। इसके लिए दोनों राज्य सहमति बनाएं, जिससे पेंशनर के आर्थिक हित प्रभावित न हों।
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