भाजपा सांसद ज्योति धुर्र्वे का जाति प्रमाण पत्र अमान्य!

भाजपा सांसद ज्योति धुर्र्वे का जाति प्रमाण पत्र अमान्य!
भोपाल। बैतूल लोकसभा सीट से भाजपा सांसद ज्योति धुर्वे का जाति प्रमाण राज्य स्तरीय छानवीन समिति ने फिर से अमान्य कर दिया है। धुर्वे समिति के समक्ष ऐेसे साक्ष्य पेश नहीं कर पार्इं, जिससे वे खुद को अनुसूचित जनजाति वर्ग की साबित कर सकें। साक्ष्यों के अभाव में समिति ने धुर्वे के जाति प्रमाण पत्र को अमान्य करने का फैसला किया है। ऐसी स्थिति में धुर्वे की लोकसभा की सदस्यता भी जा सकती है। क्योंकि धुर्वे ने खुद को अनुसूचित जनजाति की बताकर अजजा वर्ग के लिए आरक्षित बैतूल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। वे यहां से दूसरी बार सांसद हैं। राज्य स्तरीय छानबीन समिति धुर्वे के जाति प्रमाण पत्र को मई 2017 में अमान्य कर चुकी है। लेकिन उस समय राजनीतिक दबाव में धुर्वे ने समिति के समक्ष पुर्नयाचिका पेश की थी। जिस पर समिति ने सुनवाई की। भाजपा सरकार रहे समिति धुर्वे के जाति प्रमाण पत्र पर कोई फैसला नहीं कर पाई, लेकिन कांग्रेस सरकार आते ही समिति ने सुनवाई की और साक्ष्यों के अभाव में धुर्वे के अजजा वर्ग के जाति प्रमाण पत्र को अमान्य करने का फैसला किया है। जल्द ही समिति का फैसला सार्वजनिक हो जाएगा। समिति अपने फैसल में ध्ुार्वे के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश करेगी। दरअसल धुर्वे ने पति की जाति के आधार पर बैतूल जिले की भैंसदेही तहसील से 31 अक्टूबर 2002 को अजजा वर्ग का जाति प्रमाण पत्र बनवाया था। इसी के आधार पर उन्होंने अजजा वर्ग के लिए आरक्षित सीट से दो चुनाव लडेÞ। हाईकोर्ट के निर्देश पर हुई जाति प्रमाण पत्र की जांच ज्योति धुर्वे आदिवासियों के लिए सुरक्षित बैतूल लोकसभा सीट से दूसरी बार सांसद चुनी गई हैं। 2009 में जब पहली बार वे लोकसभा चुनाव जीती थीं तभी उनकी जाति को लेकर शिकायत की गई थी, लेकिन तब 5 साल के भीतर इस मामले की जांच नहीं हो पाई थी इसलिए वह शिकायत स्वत: रद्द मान ली गयी थी। बाद में बीजेपी ने उन्हें फिर से बैतूल से ही लोकसभा प्रत्याशी बनाया। वह चुनाव जीतकर लोकसभा भी पहुंची, लेकिन इस बार उनके जाति प्रमाण पत्र को लेकर राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के निर्देश की वजह से जांच करवाई। पिता की जाति का कोई दस्तावेज नहीं दिया सूत्रों के मुताबिक ज्योति धुर्वे के पिता पवार जाति के थे। वे बालाघाट जिले के रहने वाले थे। ज्योति की शादी बैतूल जिले के रहने वाले प्रेम धुर्वे से हुई थी। धुर्वे गोंड आदिवासी थे। उन्हीं की जाति के आधार पर ज्योति को 31 अक्टूबर 2002 को बैतूल के भैंसदेही ब्लॉक से जातिप्रमाण पत्र जारी हुआ था। ज्योति धुर्वे को अपना पक्ष रखने के लिए कई बार नोटिस देकर बुलाया गया, लेकिन वह संतोषजनक दस्तावेज पेश नहीं कर सकीं। इसके आधार पर समिति धुर्वे के जाति प्रमाण पत्र को अमान्य करने जा रही है। इनका कहना है ज्योति धुर्वे का जाति प्रमाण पत्र अमान्य होना बड़ी बात नहीं है। उन्होंने आदिवासियों का हक मारा है। उन्होंने जो परिजनों को पेट्रोल पंप, नौकरी पाई है, वह आदिवासियों का हक मारकर ली है। आयोग के अध्यक्ष रहते उन्होंने कई नकली लोगों को असली आदिवासी बनाया और लाभ दिलाया। हमारी मांग है कि उन्होंने जो आदिवासियों का हक मारकर फायदा लिया है, उसकी रिकवरी होना चाहिए। साथ ही धोखाधड़ी का केस दर्ज होकर जेल भेजना चाहिए। अजय शाह, कांग्रेस नेता