शासकीय शिक्षक चला रहे कोचिंग सेंटर

शासकीय शिक्षक चला रहे कोचिंग सेंटर
jp rai टीकमगढ़, शासकीय शिक्षक चला रहे कोचिंग सेंटर सुप्रीम कोर्ट के द्वारा यह आदेश दिया गया है कि रिहायशी क्षेत्र में पढऩे वाली छात्र-छात्राओं की कोचिंग न चलाई जाये लेकिन शासकीय शिक्षक वेतन लेते है शासन से और घर में चला रहे कोचिंग सेंटर जो नियम विरूद्ध है और अब शिक्षा भी व्यवसाय बन गई है। कोचिंग सेंटर पढ़ाने वालों में भी अब यह होड़ लगी है कि किस कोचिंग सेंटर में कितने छात्र पढऩे जाते है इन ट्यूशन पढऩे वाले छात्र-छात्राओं के नाम कईयों के शासकीय स्कूलों में दर्ज है और हफ्ते में एकात बार स्कूल हो आते है बाकी उपस्थिति रजिस्टर में शिक्षक गण उपस्थिति लगा देते है। अच्छी शिक्षा ग्रहण करना अच्छी बात है लेकिन शिक्षा और व्यवसाय देा अलग-अलग मार्ग है लेकिन आज शिक्षा को व्यापार का रूप बना दिया है जिसे लोग अब व्यवसाय मान बैठे है और अधिक पैसा कमाने के चक्कर में शासकीय उच्चत्तर कन्या विद्यालय में कई ऐसे शिक्षक पदस्थ है जो महीनेां तक स्कूल नहीं आते केवल वेतन लेने ही पहुचते हेै और घर में कोचिंग सेंटर चला रहे सो अलग है और वेतन ले रहे शासन से जिसकी वजह से अब शिक्षा ने एक व्यापार का रूप धारण कर लिया है और गरीब परिवार के बच्चे तो महगी ट्यूशन ग्रहण नहीं कर पाते है जिसकी वजह से शासकीय स्कूलों में पढऩे वाले छात्रों में हीनता की भावना उत्पन्न होने लगी। सु़प्रीम कोर्ट के द्वारा यह निर्देशित किया गया था कि शहर के बीचो-बीच या रिहायशी क्षेत्र में कोचिंग सेंटर न चलाये जाये जिसकी वजह से भीड़ के कारण कभी-कभी अधिक संख्या में पढऩे वाले छात्र-छात्राओं की भीड़ होने के कारण कई तरह की घटना घटने की संभावना बढ़ जाती है। जिले के शिक्षा अधिकारी को यह भी पता नहीं है कि रिहायशी क्षेत्र में कोचिंग सेंटर नहीं चलाये जा सकते है इस मामले में बार एशोसियशन के अध्यक्ष रद्युवीर सिंह तोमर ने बताया कि कोर्ट की जो रूल रेग्यूलेशन होती है उसका पालन प्रत्येक व्यक्ति और अधिकारियों को करना चाहिए लेकिन जब अधिकारियेां को इस मामले में पता नहीं है तो क्या कार्यवाही कर पायेगे। नगर में कई जगह चल रहे कोचिंग सेंटर स्टेट बैंक कॉलानी, पुराना बस स्टेन्ड, अतूत की गली, कुवरपुरा कॉलोनी, कटरा बाजार, साई कोचिंग सेंटर, पुरानी टेहरी और पीली कोठी बैंक के सामने भी कई जगह गलियों में छोटे-छोटे कोचिंग सेंटर चलाये जा रहे है शिक्षा विभाग के द्वारा या डीपीसी के द्वारा अभी तक इन कोचिंग सेंटरो पर किसी तरह की कोई कार्यवाही नहीं की गई और ना ही इसकी जानकारी ली गई कि कोचिंग सेंटर पर आने वाले शिक्षक शासकीय है या निजी संस्थानों में काम करने वाले शिक्षक है और इन कोचिंग सेंटरो में पढ़ाई के अलावा निरन्तर शासकीय स्कूलों का उपहास किया जाता है। और कोचिंग पढ़ाने वाले शिक्षक गण भी यह कहते है कि अच्छी शिक्षा ग्रहण करना हो तो चाहे प्राइवेट स्कूल हो या शासकीय हम देानेां स्कूलों में बोल देगे तुम्हारा नाम स्कूल में लिखा रहेगा और आराम से कोंचिग की शिक्षा ग्रहण करना चाहिए जिससे छात्र-छात्राओं की तरक्की होती है तो क्या शासकीय स्कूलों में किसी तरह की पढ़ाई नहीं होती है या फिर शिक्षक गण गुमराह करते है पढऩे वाले बच्चों को यह शिक्षा के लिये अमीर और गरीब छात्र-छात्राओं के लिये एक गहरी खाई का काम कर रही है । कोचिंग सेंटर उसका कारण भी यह है कि शासकीय स्कूलों में शिक्षकों के विरूद्ध अगर आला अधिकारी अगर कोई कार्यवाही करते है तो केवल निलंबित ही कर सकते है जिसकी वजह से शासकीय स्कूलों के शिक्षक वेफ्रिक होकर कोचिंग सेंटर चलाते रहते है और सबसे बड़ी बात यह है कि कोचिंग सेंटर चलाने वालों की मनमाफिक फीस पढऩे वाले छात्र-छात्राओं से ली जाती है और प्रचार-प्रसार करते है शासकीय शिक्षक जिसकी वजह से अब शिक्षा पूर्णरूप से व्यवसाय का रूपधारण कर लिया है शिक्षा ने। शासकीय स्कूलों की बद से बदत्तर व्यवस्था होने के कारण और शासकीय शिक्षकों की पढ़ाने में भी रूचि न लेने के कारण शासकीय स्कूलों में पढऩे वाले छात्र-छात्राओं का मनोबल भी गिरा रहता है लोग उपवास उडाते है अरे सरकारी स्कूल में पढ़ रहे हो जिसकी वजह से लोग कर्ज लेकर अपने बच्चों को कोचिंग सेंटरो में पढ़ाने के लिये भेजते है और धीरे-धीरे ज्ञान भी अब पैसे से प्राप्त होने लगा है। इनका कहना है इस मामले मे जब जिला शिक्षा अधिकारी से बात की तो उन्होने कहा कि इतनी अधिक मीटिंगे रहती है कि पूरा दिन मीटिंगों में ही लग जाता है जिसकी वजह से हम लोग फील्ड पर नहीं जा पाते है और कोंचिग सेंटरो के लिए एक टीम गठित कर देगे वह उसकी जानकारी हमे निरीक्षण करके देगे इसके बाद कही जाकर कोई कार्यवाही की जायेगी।