कोरोना वायरस से लडने बढी च्यवनप्राश की मांग

कोरोना वायरस से लडने बढी च्यवनप्राश की मांग
मुंबई, आमतौर पर सर्दियों में इम्यूनिटी बूस्ट करने और शरीर में गर्मी लाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले आयुर्वेदिक औषधि च्यवनप्राश की मांग अचानक से बढ़ गई है। सूत्रों के मुताबिक, पिछले एक सप्ताह में इसकी मांग में औसतन 30-40% की बढ़ोतरी देखी गई है, जबकि पतंजलि के च्यवनप्राश की मांग पिछले एक महीने में 400% बढ़ी है, जैसा पहले कभी नहीं देखा गया। आसमान छू रही मांग उद्योग के सूत्रों के मुताबिक च्यवनप्राश ऐसा उत्पादन है जिसकी मांग आमतौर पर जाड़े के दिनों में होती है, लेकिन इस बार कोरोना वायरस महामारी के कारण मार्च-अप्रैल में इसकी मांग आसमान छू रही है। सप्लाई चेन में बाधा पैदा होने के कारण अधिकतर कंपनियां बढ़ी मांग को पूरा करने का भरपूर प्रयास कर रही हैं। इम्यूनिटी बूस्टर माना जाता है च्यवनप्राश आयुर्वेद के मुताबिक, च्यवनप्राश इम्युनिटी बूस्टर के रूप में जाना जाता है। इसकी मांग में वृद्धि का एक और कारण आयुष मंत्रालय द्वारा कोरोना वायरस से लड़ने के लिए इम्यूनिटी बूस्ट करने को लेकर इस तरह के उत्पादों के इस्तेमाल की सिफारिश भी हो सकता है। 'निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे' डाबर इंडिया के मार्केटिंग हेड (हेल्थकेयर) मुकेश मिश्रा कहते हैं, 'हम देशभर में च्यवनप्राश की मांग में वृद्धि देख रहे हैं। खुद को सुरक्षित रखने के लिए उपभोक्ता इस तरह के उत्पादों की मांग कर रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान हम इन उत्पादों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के काम में लगे हैं।' डाबर सेंगमेंट का मार्केट लीडर डाबर इंडिया च्यवनप्राश में मार्केट लीडर है, जिसकी हिस्सेदारी 60% है। अन्य कंपनियां जैसे इमामी, बैद्यनाथ तथा पतंजलि भी इसका उत्पादन करती है। पतंजलि के एक प्रवक्ता ने बताया कि पिछले महीने की तुलना में 6 मार्च तथा 6 अप्रैल के बीच च्यवनप्राश की मांग में 400% की तेजी दर्ज की गई है। मांग में यह वृद्धि सभी वेरियंट जैसे विंटर, समर (अमृत रसायन) तथा सूगरफ्री वेरियंट में देखी गई है। बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए डाबर इंडिया ने तुलसी पर आधारित च्यवनप्राश का एक नया वेरियंट लॉन्च किया है। प्रवक्ता ने कहा, 'सप्लाई चेन में बाधा उत्पन्न होने के कारण मांग बढ़ने पर हमारे यहां स्टॉक खत्म हो जाता है। अब यह सप्लाई चेन नॉर्मल होने जा रहा है। इस तरह के इम्यूनिटी बूस्टर उत्पाद उपभोक्ताओं को मिले, इसके लिए हम हर संभव प्रयास कर रहे हैं।'