DHFL पर संकट गहराया, डूबने की कगार पर; रिजर्व बैंक के अधिकार बढ़ाएगी सरकार
नई दिल्ली
आईएलएफएस और इंडियाबुल्स के बाद एक और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) डीएचएफएल में वित्तीय संकट गहरा गया है और वह डूबने की कगार पर पहुंच गई है। खबरों के मुताबिक, म्युचुअल फंड हाउसों ने बैंकों से साफ कह दिया है कि वे छोटे निवेशकों के हितों को दांव पर रखकर आगे कोई मदद डीएचएफएल को देने को तैयार नहीं है। उसने सोमवार को संकेत दिया कि वह संभवत: संकट से उबर नहीं पाएगी, क्योंकि कोई भी उसे कर्ज देने को तैयार नहीं है। इससे उसके शेयर 30 फीसदी गिरावट के साथ साल भर के निचले स्तर पर पहुंच गए।
विशेषज्ञों का कहना है कि डीएचएफएल के कर्जदाताओं में बैंक और म्युचुअल फंड हाउस के अलावा बॉन्डधारक भी हैं और ऋण के पुनर्गठन को लेकर उनमें सहमति बेहद मुश्किल है। कंपनी ने कहा कि वह सितंबर 2018 के बाद से कर्ज बांट पाने या ऋण क्षमता का विस्तार करने में असमर्थ है। कंपनी के वित्तीय हालात नाजुक हैं और बाजार से पैसा जुटाने की उसकी क्षमता पंगु हो गई है। ऐसे में कंपनी आगे काम करना जारी रह पाएगी, इसको लेकर संदेह पैदा हो गए हैं।
डीएचएफएल ने हाल ही में आधार हाउसिंग में हाल ही में 9.15 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर 205 करोड़ रुपये जुटाए थे। वहीं अवांस फाइनेंस की 30.63 फीसदी संपत्ति 304 करोड़ रुपये में बेची थी। हालांकि यह उसकी देनदारी के सामने कुछ भी नहीं है। कंपनी के प्रबंध निदेशक और चेयरमैन कपिल वधावन ने कहा कि वह हिस्सेदारों-कर्जदाताओं के साथ व्यापक पुर्नगठन योजना पर काम कर सुनिश्चित कर रही है कि ऋणदाताओं को कोई बोझ न सहना पड़े।
कंपनी ने सितंबर 2018 से परिसंपत्तियों को बेचकर और पुनर्भुगतान से 41,800 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाया है। गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी पर करीब 40 हजार करोड़ रुपये का बैंकों का ही है, लेकिन कर्ज के बदले दी गई गारंटी का मूल्य 500 करोड़ रुपये रह गया है।
कंपनी का 2018-19 की चौथी तिमाही में घाटा बढ़कर 2224 करोड़ रुपये पहुंच गया। उसका बाजार पूंजीकरण भी तिमाही घाटे से 625 करोड़ रुपये कम होकर 1522 करोड़ रुपये रह गया है। जबकि एक साल पहले इसी तिमाही में वह 134.35 करोड़ रुपये के मुनाफे में थी, लेकिन अगस्त 2018 में आईएलएफएस में संकट के बाद से कंपनी हाशिए पर चली गई।
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