मप्र सरकार को हाईकोर्ट का झटका, महिला तथा युवा आयोग के 4 सदस्यों को दिया स्टे

मप्र सरकार को हाईकोर्ट का झटका, महिला तथा युवा आयोग के 4 सदस्यों को दिया स्टे

महिला आयोग सदस्य संगीता शर्मा, युवा आयोग सदस्य कुंदन पंजाबी, अमित शर्मा, विनय सिरवैया बने रहेंगे यथावत

भोपाल, मध्य प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के कई फैसले बदले परंतु विभिन्न आयोगों में की गई संवैधानिक नियुक्तियों के मामले में पेंच उलझ गया है। शिवराज सिंह ने सभी नियुक्तियां निरस्त कर दी थी परंतु हाईकोर्ट ने शिवराज सरकार के फैसलों पर स्टे लगा दिया है। हाईकोर्ट ने महिला आयोग की सदस्य संगीता शर्मा तथा युवा आयोग के सदसय कुंदन पंजाबी, अमित शर्मा व विनय सिरवैया की याचिका पर आगामी आदेश तक यथावत पद पर बने रहने का अंतरिम आदेश पारित किया है। हाईकोर्ट जज सुबोध अभ्यंकर की पीठ ने बुधवार को वीडियो कांफ्र्रेंसिंग के माध्यम से संगीता शर्मा की याचिका पर सुनवाई की। संगीता शर्मा की ओर से अधिवक्ता हिमांशु मिश्रा ने पूर्व में हाईकोर्ट द्वारा अजा आयोग के परिपेक्ष्य में दिए गए स्टे के आधार पर दलील प्रस्तुत की। जज सुबोध अभ्यंकर ने दलील मानते हुए अजा आयोग के अंतरिम आदेश के अनुसार संगीता शर्मा की नियुक्ति निरस्त करने संबंधी शिवराज सरकार के आदेश पर स्टे दे दिया। इसी प्रकार मप्र युवा आयोग के सदस्य कुंदन पंजाबी, अमित शर्मा और विनय सिरवैया की याचिका पर हाईकोर्ट जस्टिस नंदिता दुबे ने सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अजय गुप्ता तथा रविकांत पाटीदार ने दलीलें प्रस्तुत कीं। गौरतलब हो कि शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री बनने के बाद 24 मार्च को कमलनाथ सरकार द्वारा नियुक्त किए गए सभी आयोगों के अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति निरस्त कर दी थी। 4 प्रमुख आयोगों में नियुक्तियां कानूनी दांवपेंचों में फंसी  स्पष्ट है कि कमलनाथ सरकार ने जाते-जाते चार प्रमुख आयोगों के अलग-अलग पदों पर आनन-फानन में नियुक्तियां कर दी थीं, जिन्हें शिवराज सरकार ने सत्ता में आते ही निरस्त कर दिया। संवैधानिक पदों पर हुई नियुक्तियों के निष्कासन के लिए कानूनी तौर पर बिना नियमों का पालन किए पद से अध्यक्ष समेत सदस्यों को अलग कर दिया गया। इन दलीलों के साथ करीब आधा दर्जन याचिकाएं न्यायालय की दहलीज़ पर अब तक पहुंच गई हैं। आपको बता दें कि अब तक प्रदेश के प्रमुख आयोग जिनमें राज्य महिला अयोग, युवा आयोग, अनुसूचित जाति आयोग, अनुसूचित जनजाति आयोग में हुई नियुक्तियां और फिर निरस्तगी कानूनी दांवपेंच में फंसी है। कमलनाथ सरकार ने संवैधानिक पदों पर काबिज़ अध्यक्ष और सदस्यों को जहां राहत की उम्मीद है, वहीं प्रदेश सरकार कानूनन कार्यवाही पूरी होने तक किसी भी आयोग के पदों पर नई नियुक्ति फिलहाल नहीं कर सकती है।