जानिए किसे धारण करना चाहिए सूर्य रत्न माणिक्य

जानिए किसे धारण करना चाहिए सूर्य रत्न माणिक्य
उज्जैन, लगातार 20 वर्षो से हजारो लेख एवं सत्य भविष्यवाणियाँ कर चुके विख्यात भविष्यवक्ता श्री आचार्य प्रणयन एम. पाठक ने बताया कि माणिक- तेजस्विता प्रदान करने वाला तेजोमय ग्रह सुर्य का रत्न माणिक सभी को शुभ फल नही देता है जन्मकुण्डली में सुर्य की स्थिति जाने बिना माणिक धारण करना अनुचित भी हो सकता है । यह रत्न तेज एवं समृद्धि का कारक है। मान - सम्मान एवं लोकप्रियता भी सुर्य की शुभ स्थिति से ही प्राप्त होती है, पेट संबंधी रोगो को भी माणिक नष्ट करता है। इससे शारीरिक शक्ति भी प्राप्त होती है तथा राजनेताओं को माणिक जनता के बीच लोकप्रियता देता है । चुकि सुर्य एक ऊर्जावान ग्रह है । अतः धारक को सुर्य ऊर्जा मुफ्त में ही प्राप्त होती रहती है। सुर्य सिहँ राशि का स्वामी होता है। अतः माणिक धारण करने से व्यक्ति आत्म निर्भर भीबनता है । वर्चस्व की क्षमता भी बढती है मानसिक एवं आध्यात्मिक शक्तियाँ भी बढती है, अस्थिरता नष्ट होकर स्थिरता प्राप्त होती है । आत्मोन्नति एवं संतान सुख भी बढता है। यह ध्यान रखता आवश्यक है कि माणिक लग्न, दशा तथा ग्रह गोचर का अध्ययन करके ही धारण करे । इस रत्न के साथ कभी भी हीरा, गोमेद एवं नीलम नही पहनना चाहिए । अच्छा माणिक आभायुक्त चमकदार होता है, हाथ में पकडने पर भारी लगेगा और हल्की-हल्की गर्मी महसूस होगी।माणिक रक्तवर्धक, वायुनाशक और पेट रोगो में लाभकारी सिद्ध होता है । यह मानसिक रोग एवं नेत्र रोग में भी फायदा करता है । माणिक धारण करने से नपुंसकता नष्ट होती है । मेष-मेष राशि वाले जातको को सुर्य पंचम का स्वामी होने से माणिक धारण करना संतान सुख, इष्ट कृपा तथा शिक्षा में उन्नति होती है । मेष का स्वामी मंगल और सुर्य में मित्रता होने के कारण माणिक धारण करना शासकीय एवं पराक्रम से संबंधी कार्यो में भी विजय प्राप्त होती है।

वृषभ-वृषभ राशि वालो का चतुथेंश सुर्य होने के कारण माणिकहोने के कारण तथा चतुर्थ हृदय भाव होने से यदि आपको हृदय संबंधी रोग हो तो माणिक पहन सकते है । सुर्य की महादशा में भी माणिक पहन सकते है वृषभ राशि का स्वामी शुक्र तथा सुर्य की आपस में शत्रुता होने से वृषभ राशि वाले जातको को माणिक धारण नही करना चाहिए । मिथुन-मिथुन जातको को माणिक सुर्य रोगो को नष्ट करने के लिए ही धारण करना चाहिए अन्यथा नही

मिथुन राशि का स्वामी बुध और सुर्य आपस में मित्र होने से माणिक धारण किया जा सकता है । माणिक पराक्रमेश होने से न खराब न ही अच्छाा होता है । अतः कुंडली का विशेष विश्लेषण करने के बाद ही माणिक धारण करना चाहिए । कर्क-कर्क जातक धन एवे विद्या की प्राप्ति के लिए माणिक धारण कर सकते है सुर्य चन्द्र मित्र होने से भी माणिक धारण किया जा सकता है लेकिन द्वितीय मारक होने से माणिक धारण करना उचित नही है । नेत्र या हृदय रोग हो तो धारण कर सकते है । कई ज्योतिषियों का मानना है कि सुर्य चन्द्र को मारकत्व दोष नही लगता है अतः माणिक धारण कर सकते है । सिहँ-सिहँ राशि वाले जातक माणिक धारण कर सकते है यह जीवन रत्न है जो मान सम्मान और स्वास्थ्य के लिए उत्तम है । क्योंकि यह सिहँ का स्वामी ग्रह का रत्न है अतः शुभ फलदायक है । लग्नेश का रत्न होने से व्यक्तित्व को निखारता है । कन्या-कन्या जातको को माणिक धारण करना अशुभ रहेगा क्योकि सुर्य बारहवें भाव का स्वामी होता है और बारहवाँ भाव त्रिकभाव है । यदि हृदय रोग के लिए रत्न धारण करना है तो ज्योतिषी की सलाह लेकर ही धारण करे। तुला-तुला जातको का सुर्य एकादश भाव का स्वामी होता है और एकादश भाव लाभ है लेकिन तुला राशि का स्वामी शुक्र और सुर्य में शत्रुता होने से माणिक धारण करना कष्टदायी हो सकता है । अतः हड्डी रोग हो तो योग्य ज्योतिषी की सलाह लेकर माणिक धारण कर सकते है ध्यान रहे सुर्य की मित्र दशा होना आवश्यक है। यदि जन्मकुण्डली नही हो तो योग्य हस्तरेखा विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही माणिक पहने । वृश्चिक-वृश्चिक जातको को माणिक धारण करना शुभ है वृश्चिक का स्वामी मंगल, सुर्य का मित्र होने से कल्याणकारी हो गया है । दशम भावेश होने के कारण माणिक धारण करना राज्य सुख प्रदायक तथा ख्ेालकुद, सर्विस, चिकित्सीय व्यापार से लाभ करता है । अतः वृश्चिक जातक सुर्य, मंगल, गुरू, बुध एवं चन्द्र की महादशा में माणिक धारण कर सकते है। धनु-धनु राशि में सुर्य भाग्यवान का स्वामी होता है तथा राशिश गुरू का भी मित्र है अतः धनु राशि वालो को आजीवन माणिक धारण करना चाहिये जिससे भाग्योन्नति के शुद्धावसर प्राप्त होते है। आर्थिक प़क्ष भी मजबुत होता है तथा अचानक भाग्य से धन प्राप्त होता है । पराक्रम की प्राप्ति होती है नेत्र एवं हृदय रोग में लाभ होता है । मकर-मकर राशि से अष्टम होने के कारण माणिक कभी भी धारण नही करना चाहिए, मकर राशि का स्वामी शनि तथा सुर्य में शत्रुता अनुचित होगा । कुंभ-कुंभ से सप्तम सुर्य की राशि होने से धारण करना कष्टप्रद रहेगा राशिश शनि तथा सुर्य में भी शत्रुता होती है फलस्वरूप माणिक भूलकर भी धारण न करे क्योंकि सप्तम मारक स्थान है । मीन-मीन राशि गुरू की राशि है तथा सुर्य और गुरू में मित्रता है। लेकिन सुर्य षष्ठेश होकर अशुभ हो गया है फलस्वरूप माणिकधारण करना शुभ नही है ।