rajesh dwivedi
सतना। इसे डेढ़ दशक से सत्ता के वनवास भोगने का असर कहा जाय अथवा विंध्य की कांग्रेसी राजनीति के बदलते समीकरण का प्रभाव कि इस मर्तबा कांग्रेस में एक ऐसी एकजुटता देखी जा रही है जो इसके पूर्व संभवत: विंध्य में कभी नहीं देखी गई। कभी गुटों व क्षेत्रों में बंटे रहने वाले कांग्रेस के दिग्गज नेता इस बार कंधे से कंधा मिलाकर चुनावी तैयारियां करते देखे जा रहे हैं। कभी कांग्रेस का गढ़ रहे विंध्य क्षेत्र में क्षेत्रीय छत्रपों का दबदबा इस कदर रहता था कि दूसरे क्षेत्र के कांग्रेसी दिग्गज इस क्षेत्र से कटे ही रहते थे।

स्व. कुंवर अर्जुन सिंह व स्व. श्रीनिवास तिवारी के राजनैतिक प्रभाव वाले दौर में शायद ही कांग्रेस का कोई बड़ा नेता विंध्य क्षेत्र की ओर देखता था , लेकिन मौजूदा दौर में दूसरे क्षेत्र के कांग्रेसी दिग्गज भी अपने पांव विंध्य क्षेत्र में पसारने लगे हैं। उस दौर में क्षेत्रीय छत्रपों के दबदबे का अंदाजा महज इस बात से लगाया जा सकता है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी जब कभी विंध्य क्षेत्र आते थे तो सार्वजनिक तौर पर यह कहने से नहीं चूकते थे कि इस क्षेत्र के मुख्यमंत्री तो दादा (श्रीनिवास तिवारी ) ही हैं, मै तो केवल आमंत्रण मिलने पर कार्यक्रमों में शिरकत करने आ गया हूं। कांग्रेस के क्षेत्रीय छत्रपों के दबदबे वाली राजनीति के उस दौर को करीब से देख चुके विंध्यवासी अब कांग्रेस में एक नए राजनैतिक समीकरण का सूत्रपात होते देख रहे हैं। इस समीकरण का सूत्रपात चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया के आगामी 12 जुलाई को होने वाले संभावित दौरे से हो रहा है। बीते दशकों में यह संभवत: पहला मौका है जब विंध्य के बाहर का कोई दिग्गज कांग्रेसी नेता न केवल यहां जनसंवाद करने सभाएं व रैली करने पहुंच रहा हो , बल्कि जमीनी कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद करने की रूपरेखा भी बनाई हो। हालांकि इस कार्यक्रम को कांग्रेस का एक धड़ा राहुल के राजनैतिक गढ़ पर सिंधिया की राजनैतिक सेंध के तौर पर देख रहे हैं।
मिलेंगे हाथ तो बनेगी बात
विंध्य की मौजूदा कांग्रेसी राजनीति में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल निर्विवाद रूप से सबसे कद्दावर नेता हैं। उन्हें उनके पिता स्व. कुंवर अर्जुन सिंह की तरह यहां कांग्रेस में कोई चुनौती देने वाला भी नहीं है जबकि कुंवर अर्जुन सिंह व श्रीनिवास तिवारी की राजनैतिक प्रतिद्वंदिता को समूचा विंध्य करीब से देख चुका है। विगत कुछ वर्षों से अजय सिंह राहुल ने न केवल कांग्रेसी राजनीति में अपना दबदबा भी बनाया है और पार्टी के लिए सकारात्मक परिणाम भी लाकर अपना कद बढ़ाया है। सत्तापक्ष द्वारा तमाम संसाधानों के झोक देने के बावजूद चित्रकूट उपचुनाव व मैहर नगर पालिका में कांग्रेस की जीत ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं व नेताओं में उत्साह का संचार किया है। ऐसे में यदि युवाओं के लिए पालिटिकल आईकान बने ज्योतिरादित्य सिंधिया को विंध्य के कांग्रेसी छत्र उदारमन से स्वीकारते हैं, तो निश्चित ही इसके सकारात्मक परिणाम आएंगे। विंध्य की कांग्रेसी राजनीति में पैनी नजर गड़ाने वाले राजनैतिक विश्लेषकों की मानें तो अजय सिंह राहुल व ज्योतिरादित्य सिंधिया की राजनैतिक जोड़ी विंध्य में भाजपा के लिए परेशानी का सबब बन सकती है।
कार्यकर्ताओं में जोश , नवाचार की संभावना
ज्योतिरादित्य सिंधिया के कार्यक्रम कोलेकर स्थानीय कार्यकर्ताओं में जोश देखा जा रहा है । कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि संगठन ने ज्योतिरादित्य सिंधिया की छवि व युवाओं को साधने की उनकी क्षमता तथा नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल के चुनावी रणनीतिक कौशल के बच संतलन साध लिया तो कांग्रेस चौकाने वाले चुनाव परिणाम दे सकती है। सूत्रों के अनुसार ज्योतिरादित्य चुनावी तैयारियो को पुख्ता करने जिला सरपर चुनाव अभियान समिति का गठन कर नवाचार भी कर सकते हैं।
सिंधिया की सक्रियता के सियासी मायनें
मध्य प्रदेश में चुनाव से पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया की सक्रियता ग्वालियर-चंबल संभाग के बाहर तेजी से बढ़ रही है। उनकी इस सक्रियता के कई प्रकार के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। लंबे अरसे से सिंधिया को पार्टी की ओर से राज्य की कमान सौंपे जाने की चर्चा सियासी गलियारे में है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी आगामी विधानसभा चुनाव में राज्य में कांग्रेस की सत्ता में वापसी हर कीमत पर चाहते हैं। इसके लिए वे तमाम नेताओं को गुटबाजी भुलाकर काम करने के निर्देश भी दे चुके हैं। नतीजतन ऐसे कार्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं,जो जनता में कांग्रेसी एकजुटता का संदेश दे सकें। पार्टी सूत्रों पर भरोसा करें तो सिंधिया पर पार्टी दांव लगाने को तैयार है, जिसके चलते वे चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष की हैसियत से संगठन विस्तार के नाम पर प्रदेश के विभिन्न इलाकों का दौरा कर रहे हैं। सिंधिया पर दांव लगाने की वजह भी हैं। सिंधिया किसी तरह के विवाद में नहीं हैं। युवा व उजार्वान हैं। अपनी बात साफगोई से रखते हैं। उनकी छवि भी साफ सुथरे नेता की रही है। इसके अलावा सिंधिया राजघराने पर विरोधी दल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिए आरोप लगाना आसान नहीं होगा , क्योंकि उनकी दादी विजयाराजे सिंधिया बीजेपी की नींव रखने वाले नेताओं में से एक रही हैं।
वर्जन
नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल के क्षेत्रीय प्रभाव व ज्येतिरादित्य सिंधिया की लोकप्रियता की जुगलबंदी निश्चत तौर पर कांग्रेस को यहां मजबूती देगी। उनके अगमन से नेता प्रतिपक्ष के अधिक सेअधिक सीटें जीतने के संकल्प को बल मिलेगा। दोनो ्रकी जुगलबदी एक-एक ग्यारह साबित होगी।
नीलांशु चतुर्वेदी, विधायक चित्रकूट
ज्योतिरादित्य की लोकप्रियता नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल द्वारा जिले में तैयार किए गए संगठनात्मक ढांचे व राजनैतिक जमीन को और समृद्ध करेगी। दोनों ही एक बड़े वर्ग को प्रभावित करते हैं, जिसका लाभ कांग्रेस को यहां मिलेगा। देखिएगा इस बार कांग्रेस यहां अपने पुराने वैभव की ओर लौटेगी।
यादवेंद्र सिंह, विधायक नागाौद
ऐसा होगा सिंधिया का कार्यक्रम
11 जुलाई- खजुराहो से जनसंवाद यात्रा का शुभारंभ
12 जुलाई-रीवा संभाग के सतना, रीवा, सीधी जिले में सभा करेंगे। इसके अलावा वे प्रत्येक जिले में पार्टी कार्यकर्ताओं से भी संवाद करेंगे।
13 जुलाई-शहडोल में जनसंवाद यात्रा के दौरान सभा को संबोधित करेंगे।