भोपाल। समान्यतौर पर दूल्हे के लिए घोड़े इस्तेमाल में लाए जाते हैं, लेकिन राजधानी में रविवार अखिल भारतीय पाल महासभा द्वारा आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में मामला सोच के विपरीत आया। क्योंकि यहां दूल्हे जहां ऊंट में सवार नजर आए वहीं दूसरी तरफ रथ में सवार दुल्हनों की बारात भी निकली। खास बात यह रही है कि यह ऊंट राजस्थान से विशेष तौर पर मंगवाए गए थे।

गौधूल बेला में में शाहपुरा चौराहे से शुरू हुए इस सामाजिक धार्मिक उत्सव में बाराती नाचते-गाते मस्ती में झूम रहे थे। जबरदस्त आतिशबाजी के साथ उल्लास के रंग बिखरते हुए यह कोलार रोड स्थित मंदाकिनी मैदान पहुंची, जहां द्वार पूजा के साथ खुशनुमा माहौल में बारात की आगवानी की गई।

इस दौरान जगमगाती आतिशबाजी और शहनाइयों की गूंज के साथ मंगल गीतोंकी ध्वनि हर नागरिक को आकर्षित कर रही थी। वहीं दूसरी ओर भव्य और आकर्षक आतिशबाजी के साथ बाराती शहनाइयों और डीजे की मधुर संगीत धुनं पर नाचते-झूमते दिखाई दे रहे थे।

बावजूद इसके रात करीब 8-9 बजे सजाए गए भव्य मंच में हुए वरमाला के उपरांत देर रात विधि-विधान से वैवाहिक रस्में पूरी की गई। जोड़े परिणय सूत्र में बंधकर सात जन्म के लिए एक दूजे के हो गए। इसके संपन्न होने के बाद बेटियों को डोली में बिठाकर विदा किया गया। इस समारोह में शामिल होने के लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों से करीब 25 हजार से अधिक बाराती पारंपरिक परिधानों में पहुंचे थे।

महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शैतानसिंह पाल ने बताया कि अब तक पिछले 38 साल में सामूहिक विवाह सम्मेलनों के माध्यम से देश भर में पाल समाज के गरीब और जरूरतमंद परिवारों की 35 हजार से अधिक कन्याओं के हाथ पीले करा चुके हैं। मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत इस वर्ष 39वें वर्ष विवाह सम्मेलन में पाल समाज के 51 जोड़ों का एक साथ परिणय संस्कार कराया गया है।
यहां से गुजरी बारात
इसके पहले शाहपुरा से बैंड-बाजे के साथ बारात निकली। बारात में समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। बारात में दूल्हों के लिए कार-घोड़ी नहीं, बल्कि ऊंट मंगाए गए थे। शाहपुरा से बंसल अस्पताल होकर नहर तिराहा होते हुए सर्वधर्म के रास्ते भव्य आतिशबाजी के बीच शान के साथ मंदाकिनी मैदान पहुंची। बीच-बीच में परंपरिक नृत्य करते हुए भी पाल समाज के लोग नजर आए।
व्यसन से दूर रहे बाराती
सामान्यत: बारात में शराब और बीड़ी-सिगरेट का उपयोग प्रचलन में है, लेकिन पाल समाज का यह वैवाहिक सम्मेलन व्यसन मुक्त परिवेश में रहा। जबकि इसमें शामिल होने के लिए हजारों लोगों देश व प्रदेश से पहुंचे थे और इसमें युवा और बुजुर्ग सभी तरह के लोग शामिल थे। बाजवूद इसके बीड़ी और शराब का सेवन करने वाला कोई सदस्य नहीं मिला। बताया जाता है दरअसल कुछ साल पहले हुए सम्मेलन में समाज के सभी लोगों को यह शपथ दिलाई गई थी कि ऐसे आयोजनों में नशा आपसी कलह और विनाश का ही मार्ग प्रशस्त करता है। इसलिए उन्होंने में समाज के लोगों को यह शपथ दिलाई थी कि बेटे-बेटियों के परिजनों, रिश्तेदारों के अलावा शराब पीने वाले दूल्हे को भी आयोजन में शामिल नहीं किया जाएगा। यह प्रतिबंध हमेशा जारी रहेगा।
आयोजन का उद्देश्य समाज को मिले खर्चीली शादियों से मुक्ति
राष्ट्रीय अध्यक्ष शैतान सिंह पाल ने बताया कि समाज के बेटे-बेटियों को बेहतर शिक्षा और संस्कार मिलें। खर्चीली शादियों से समाज के लोगों को बचाया जा सके। मुख्यमंत्री कन्यादान का अधिक से अधिक लाभ समाज के लोगों को मिले। बच्चों की बेहतर देखभाल हो सके, उन्हें अपने उज्ज्वल भविष्य निर्माण के लिए बेहतर संसाधन उपलब्ध हो सकें। ऐसे ही प्रमुख उद्देश्यों को लेकर लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं और समाज का चहुमंखी विकास और उत्थान हो सके, इस आयोजन का भी यही लक्ष्य है।
पहली बार बसंत पंचमी होगा आयोजन
पाल महासभा द्वारा आयोजित सामूहिक वैवाहिक सम्मेलनों की कड़ी में यह पहला मौका है, जबकि यह आयोजन अक्षय तृतिया के बजाय बसंत पंचमी के अवसर पर किया गया है। आयोजन समिति के प्रमुख शैतान सिंह पाल की माने तो अक्षय तृतीय, बसंत पंचमी, देव उठनी ग्वारस और भड़ारिया नौवी पर मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती है। वजह यह भी है कि इस बार अक्षय तृतीया पर आचार संहिता प्रभावी रहेगी, इसलिए सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ इन बेटियों को नहीं मिल पाएगा।