rajesh dwivedi
सतना। वर्ष 2014 में विपक्षी दलों के लिए चुनावी मुद्दा बनी सतना-रीवा सड़क समेत विंध्य के जर्जर हाइवे एक बार पुन: चुनावी मुद्दा बन सकते हैं। रीवा संभाग से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग और एक दर्जन स्टेट हाईवे की हालत गांवों को मुख्य मार्गों से जोड़ने वाली पगडंडियों से भी बदतर है। एन-एच 75 स्थित सतना-रीवा सड़क मार्ग की हालत तो विगत 6 वर्षों से बदतर है जिसके चलते घटे सड़क हादसों में सैकड़ों लोग जान गंवा चुके हैं। विडंबना की बात यह है कि जब-जब जनाक्रोश बढ़ता है, तब-तब सत्ताधारी दल के नेता इस हाइवे के निर्माण की कसमें खाते हैं और भूमिपूजन में जुट जाते हैं, लेकिन हाइवे की हालत जस की तस बनी हुई है। अब एक बार पुन: चुनावी मौसम के दस्तक देने के साथ ही हाइवे की सुध सत्ताधारी नेताओं को आई है और भूमिपूजन का खेल शुरू हो गया है। इससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या सत्ताधारी दल के नेताओं के लिए सतना-रीवा सड़क समेत विभिन्न हाइवे की जर्जरता केवल चुनावी मसला है और उन्हें आमजनमानस की क्या कोई फिक्र नहीं है?
बदहाल हाइवे, गड्ढे तोड़ रहे कमर
सतना जिले से दो हाइवे एनएच-75 और 7 गुजरते हैं। स्टेट हाइवे के रूप में नागौद-सिंहपुर, सेमरिया-सुंदरा व सतना-मैहर-ब्योहारी मार्ग हैं। इनकी स्थिति पूरी तरह से बदहाल है। 60 फीसदी से ज्यादा हाइवे जर्जर हो चुके हैं। हाइवे के गड्ढे वाहन चालकों की कमर तोड़ रहे हैं। दो पहिया चालकों के लिए धूल के गुबार मुसीबत बनते नजर आते हैं। जिले के दोनों एनएच के निर्माण कार्य 2010 से चल रहे हैं। कंपनियों ने आधा-अधूरा काम कर छोड़ दिया है। उधर, चार स्टेट हाइवे में से दो का निर्माण पूरा हो सका है। शेष दो का कार्य जारी है। ठेका कंपनियों की इस मनमानी से जिले में 900 करोड़ से ज्यादा का निवेश संकट में पड़ा है। निर्धारित समय पर काम पूरा नहीं होने के बावजूद मॉनीटरिंग एजेंसी एमपीआरडीसी चुप्पी साधे रही। जब लागत दोगुनी हो गई तो कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई। सतना-रीवा रोड के लिए ठेका कंपनी एमपी टॉपवर्थ को ब्लैकलिस्टेड किया गया। हाइवे के खस्ताहाल होने के कारण जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आए दिन दुर्घटनाएं भी हो रही हैं।
निर्माण कंपनियों के बीच विवाद में पिस रही जनता सतना जिले से 2 तथा रीवा जिले से तीन नेशनल हाइवे गुजरते हैं। एक का निर्माण पूरा हो चुका है। दो की स्थिति दयनीय है। निर्माण कंपनी और उसकी सहयोगी कंपनियों के बीच हुए विवाद की वजह से निर्माण रुका हुआ है। अभी ऐसी स्थिति नहीं बन रही कि जल्द निर्माण शुरू हो सके। नेशनल हाइवे-27 में मनगवां से चाकघाट तक कई जगह सड़क बची ही नहीं है। गड्ढे में तब्दील हो चुकी है। यही हाल रीवा से रांची तक के नेशनल हाइवे की है। मोहनिया घाटी की सड़क गड्ढों में तब्दील हो गई। इससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। दोनों हाइवे का निर्माण अधूरा होने के कारण यातायात बाधित हो रहा था। इस पर हाईकोर्ट के निर्देश के बाद एमपीआरडीसी ने पांच करोड़ की राशि खर्च कर बारिश के पहले गड्ढे भरे थे, लेकिन सड़क फिर गड्ढों में तब्दील हो हो गई है। ठीक से मरम्मत नहीं होने के कारण पहले जैसे हालत निर्मित होने की आशंका है।
कछुए की चाल चल रहा हाइवे का निर्माण कार्य
एनएच -75 की सतना-रीवा सड़क तथा सिंगरौली-सीधी नेशनल हाइवे का निर्माण कार्य कछुए की चाल चल रहा है। सतना-बेला 48 किमी सड़क का तथा सीधी सिंगरौली 105 किमी लम्बी सड़क निर्माण का कार्य सितंबर 2015 तक पूरा होना था। मगर, बजट और लेटलतीफी के चलते नहीं हो सका। दरअसल, रांची-रीवा एनएच-75 सिंगरौली से होकर गुजरा है। सिंगरौली-सीधी के बीच फोरलेन निर्माण 105 किमी दूरी में किया जाना है। सितंबर 2013 में निर्माण कार्य शुरू हुआ। लागत 870 करोड़ रुपए है। एमपीआरडीसी निर्माणकारी संस्था है। अब तक 134 किमी टू लेन के निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है। तत्कालीन एमपीआरडीसी के डिवीजनल मैनेजर ने बताया दावा किया था कि दिसम्बर 2017 तक टू लेन निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा, लेकिन उनका दावा भी कोरा साबित हुआ।
सतना-बमीठा मार्ग का भी यही हाल
एनएच -75 पर सतना से बमीठा तक का हाइवे बीते पांच साल से निमार्णाधीन है। कई निर्माण एजेंसियां बदले जाने से मार्ग का निर्माण कार्य अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। उक्त हाइवे के निर्माण का ठेका कोनकॉस्ट नामक कोलकाता की कंपनी को करीब 200 करोड़ में दिया गया था। पेटी कांटे्रक्ट पर कई कंपनियां काम कर रही हैं। मूल ठेका कंपनी द्वारा पेटी कांट्रेक्ट पर काम करने वाली कंपनियों को समय पर भुगतान नहीं किए जाने के कारण काम में लेटलतीफी हो रही है। भुगतान देरी के कारण कई कंपनियां पूर्व में काम को बीच में छोड़कर भाग चुकी हैं। उक्त निमार्णाधीन मार्ग पर देवेंद्रनगर से पन्ना के बीच सड़क का काम अभी भी अटका हुआ है। इस करीब 25 किमी. के हिस्से में काम नहीं हो पाया है। इसके अलवा पूरे मार्ग पर 10 से 15 किमी के पेंच बचे हुए हैं। उन्हें भी जोड़ा जाना जरूरी है।
फैक्ट फाइल
1. रीवा- सतना (बेला) एनएच 75
निर्माण कार्य प्रारंभ- 2013
निर्माण रुका- मई 2015
लंबाई - 48 किमी
लागत - 357 करोड़ रुपए
निर्माण पूरा- 17.01 किलोमीटर
योजना- बीओटी
निर्माण एजेंसी - टापवर्थ प्राइवेट लिमिटेड
2. मनगवां से चाकघाट एनएच 27
कार्य शुरू- वर्ष 2013
निर्माण रुका - मई 2015
सड़क की लम्बाई - 52 किमी
लागत - 410 करोड़
निर्माण सड़क पूरा- 28.01 किलोमीटर
निर्माण कंपनी - टापवर्थ प्राइवेट लिमिटेड
योजना - बीओटी
वर्जन
लगातार डीजल व आटो पार्ट्स की बढ़ती कीमतों , विभिन्न प्रकार के परिवहन करों व संबंधित विभागों की लूट खसोट ने पहले ही ट्रक आपरेटरों की कमर तोड़ रखी है, रही-सही कसर हाइवे की जर्जरता ने पूरी कर दी है। 20 से 25 किमी का अतिरिक्त चक्कर लगने से भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। सरकार से हम नाउम्मीद हो चले हैं।
किशोर शर्मा, अध्यक्ष
ट्रक आनर्स एसोशिएसन
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सतना-रीवा सड़क मार्ग की जर्जरता से न केवल बस आपरेटर बल्कि आम नागरिक भी बेहद परेशान हैं। कई सालों से गड्डे व धूल के गुबार के बीच बसों का संचालन करने से नुकसान उठाना पड़ा है। अब तक सड़क नहीं बनी और न जल्द बनने के आसार नजर आ रहे हैं। यह बेहद तकलीफदायक स्थिति है।
कमलेश गौतम, अध्यक्ष
बस आनर्स एसोशिएशन
हतप्रभ थे हम
याद कीजिए अक्टूबर 2017 की मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अमेरिका यात्रा , जहां की सड़कों पर सफर करने के बाद उन्होने कहा था कि मध्यप्रदेश की सड़कें यूएस से बेहतर नजर आईं। मुख्यमंत्री द्वारा विदेश की धरती में प्रदेश की सड़कों की प्रशंसा से विंध्य की जनता हतप्रभ रह गई थी । बीते पांच साल से पगडंडियों से भी बदतर सड़कों पर हिचकोले खा रही विंध्य की जनता का आक्रोश अब सड़क निर्माण को लेकर चरम पर है। विगत एक साल में रामपुर बाघेलान समेत हाइवे के किनारे बसे अन्य क्षेत्रों के लोगों ने जिस प्रकार से आंदोलन किए और सड़क पर उतरे उससे स्पष्ट है कि बदहाल सड़कों का खामियाजा प्रदेश सरकार को भोगना पड़ सकता है। वैसे भी सुचारू आवागमन, पेयजल व बिजली की व्यवस्था करना सरकार का दायित्व है लेकिन सड़क व हाइवे के निर्माण में जिस प्रकार की राजनैतिक व प्रशासनिक ड्रामेबाजी हुई है उससे एहसास होने लगा है कि सरकारें जनसरोकार से दूर होकर अपने राजनैतिक सरोकारों तक सिमटती जा रही हैं।