उज्जैन में कांग्रेस ने जागृत होकर ली थी आपत्ति,निर्वाचन को लेना पड़ा था निर्णय
brijesh parmar
उज्जैन ।विधानसभा चुनाव 2018 के लिए विडियोग्राफी और सीसीटीवी के ठेके में निर्वाचन में बड़ा गोलमाल हुआ। जिस डिफाल्टर फर्म टीना विडियो विजन को उज्जैन जिला निर्वाचन ने एन मौके पर अनुबंध न कर रवाना कर दिया था उसी डिफाल्टर संस्था से इंदौर, देवास और रतलाम सहित प्रदेश के कुछ जिलों में ठेका देकर काम करवाया गया है। उज्जैन में कांग्रेस के जागृत प्रवक्ता ने जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष फर्म की असलियत उजागर करने के साथ ही इस पर आपत्ति ली थी।जिसके कारण जिला निर्वाचन को अपना निर्णय बदलना पड़ा था। शेष जिलों में बाले झ्र बाले ही संबंधित फर्म को काम देकर स्वहित साधने की कवायद की गई।

विधानसभा चुनाव 2018 के पूर्व समस्त विधानसभा चुनाव कार्य में विडियोग्राफी और सीसीटीवी कार्य के लिए तमाम जिलों में निविदा आमंत्रित कर ठेके दिए गए थे।निविदा की शर्तों के विपरित देवास की डिफाल्टर संस्था टीना विडियो विजन ने निविदा में सहभागिता कर अधिकारियों के साथ जुगत लगाकर तिकडम से ठेके हांसिल किए ।डिफाल्टर फर्म की और से अपने पाक साफ होने को लेकर शपथ पत्र देकर जिला निर्वाचन अधिकारियों के साथ ही निर्वाचन की आंख में धूल झोंकने का काम भी किया और कई जिलों में वह सफल भी होगई मात्र उज्जैन जिले को छोडकर ।इसी के तहत फर्म ने इंदौर , देवास ,रतलाम जिले में काम लेने में सफलता हासिल की। उज्जैन में उसका राज फाश होने पर कांग्रेस की और से उसके प्रवक्ता ने जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष आपत्ति लेने पर डिफाल्टर फर्म की निविदा खुलने के बाद अनुबंध नहीं किया गया और नई निविदा आमंत्रित कर तीन अलग-अलग फर्मों को इस काम को दिया गया। इसके उलट इंदौर जिला निर्वाचन ने डिफाल्टर की जानकारी कतिपय अधिकारियों को होने के बाद भी डिफाल्टर फर्म टीना विडियो विजन को ठेका देने से कोई गुरेज नहीं किया । खास तो यह है कि इंदौर के उपजिला निर्वाचन अधिकारी उज्जैन से ही इंदौर पदस्थ हुए हैं और संपूर्ण डिफाल्टर मामले से अनभिज्ञ भी नहीं माने जा सकते। यही नहीं अधिकारियों की इतनी कृपा फर्म पर बरसी की फर्म ने एक भी बिल नहीं लगाया उसके बावजूद फर्म की और जमा धरोहर राशि और प्रतिभूति राशि मुक्त कर दी गई। अनुबंध के नियम के विपरित जाते हुए कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र और अंतिम भूगतान से पूर्व ही ठेकेदार को धरोहर राशि 1.50 लाख का डीडी लौटा दिया गया। निविदा कायार्देश के समय तीन दिन में अनुबंध और इसी अवधि में प्रतिभूति राशि 4 लाख जमा करने थे। उसे लेकर भी तमाम प्रपंच किए गए हैं। नियमानुसार कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र के साथ अंतिम बिल भूगतान के लिए प्रस्तुत किए जाने पर अंतिम भूगतान के साथ ही धरोहर राशि ठेकेदार को वापस की जाना चाहिए ।ठेकेदार और जिला निर्वाचन इंदौर के सुपरवाईजर और अधिकारियों के बीच का सामंजस्य संपूर्ण ठेके की जांच को अपेक्षित कर रहा है। देवास जिला निर्वाचन में पैठ के चलते चुनाव से कई माह पूर्व ही निविदा कर ली गई जिस कारण योग्य फर्म काम लेने से वंचित रह गई। देवास में भी संस्था की और से जिला निर्वाचन में दिया गया शपथ पत्र गुमराह करने में कामयाब हुआ। इसी आधार पर देवास जिला निर्वाचन का काम लेने में फर्म कामयाब हो सकी ।जबकि देवास में ही संस्था के द्वारा वर्ष 2003 विधानसभा चुनाव के काम को लेकर काफी असंतोष की स्थिति रही थी जिसके कारण एक फाईल भी चल पड़ी थी जो कि अधिकारियों के फर्म को पर्याप्त सहयोग के चलते देवास निर्वाचन में ही दब कर रह गई है। रतलाम जिला निर्वाचन में भी फर्म ने अपने गुमराह करने वाले शपथ पत्र का उपयोग किया।खास तो यह है कि रतलाम जिला निर्वाचन अधिकारी पूर्व में उज्जैन जिला पंचायत सीईओ रही थी उस दौरान भी फर्म के डिफाल्टर होने के मामले का जिन्न बोतल से बाहर आया था। रतलाम जिला निर्वाचन में भी गहरी पेठ होने के चलते डिफाल्टर फर्म ने एक अन्य संस्था को असंतोषपूर्ण काम का तमगा दिलवाकर वहां भी काम हासिल कर लिया।
फर्म ऐसे है डिफाल्टर
इंदौर, देवास, रतलाम जिला निर्वाचन कार्यालय से विधानसभा चुनाव 2018 में विडियोग्राफी और सीसीटीवी का ठेका लेने वाली देवास की फर्म टीना विडियो विजन उज्जैन के जनपद पंचायत तराना से राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना के जांब कार्ड के फोटोग्राफी के कार्य में डिफाल्टर 2013 में हुई। तत्कालीन तराना जनपद सीईओं ने संस्था की अमानत राशि राजसात करते हुए कायार्देश निरस्त कर दिया था। एनआरईजीएस के नियमों के तहत जनपद सीईओं के आदेश की अपील जिला पंचायत सीईओं के समक्ष डिफाल्टर फर्म को 30 दिन में करना थी। इसके विरूद्ध फर्म की और से सांठगांठ की और उसी जनपद सीईओ ने अपने ही आदेश को वापस निरस्त कर दिया। जब कि नियमानुसार जनपद सीईओ के आदेश को अपील के तहत जिला पंचायत सीईओ या कलेक्टर ही निरस्त कर सकता है। इसके बाद तराना जनपद के रेकार्ड में आग लग गई और योजनाबद्ध तरीके से मामला ठंडा हो गया। उज्जैन में संबंधित मामला कांग्रेस के संज्ञान में सामने आने पर टेंडर खोलने के बाद भी जिला निर्वाचन ने ठेका अनुबंध न करते हुए नई निविदा आमंत्रित कर ली और अन्य ठेकेदारों को काम दिया गया।
टीना विडियो विजन ने विधानसभा चुनाव 2018 में रतलाम में काम किया है। हमारी जानकारी में चुनाव के दौरान यह बात आई की फर्म उज्जैन जिले से डिफाल्टर है। फर्म के शपथ पत्र में यह जानकारी छुपाई गई है। अभी भुगतान नहीं किया है। लोकसभा चुनाव को लेकर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। शर्त है राशि राजसात और कार्य की राशि जब्ती की देखते हैं क्या किया जा सकता है। अभी कोई शिकायत नहीं है।
प्रवीण पगारे, उप जिला निर्वाचन अधिकारी, रतलाम
विधानसभा चुनाव के दौरान एक राष्ट्रीय अंग्रेजी दैनिक (द टाईम्स आफ इंडिया) के खुलासे के बाद फर्म की सच्चाई सामने आई तो कांग्रेस की और से मैंने जिला निर्वाचन अधिकारी मनीषसिंह के समक्ष आपत्ति ली थी। जांच में संस्था की सच्चाई सामने आई उसके बाद संबंधित फर्म से अनुबंध न करते हुए नई निविदा आमंत्रित की गई थी।
विवेक गुप्ता, प्रवक्ता, कांग्रेस, उज्जैन
-उज्जैन में हमें जानकारी लगते ही हमने टेंडर निरस्त कर नई निविदा आमंत्रित की थी।डिफाल्टर मामले की जांच में सामने आया था कि फर्म पाक साफ नहीं है। हमने प्रदेश निर्वाचन को भी पत्र से अवगत करवा दिया था। इसके बाद ही नए सिरे से निविदा की थी।
भविष्य खोबरागडे़,निविदा समिति नोडल अधिकारी विधानसभा निर्वाचन-18, उज्जैन
मै मामले की जांच करवाता हूं, संबंधित जिलों से जानकारी ले ली जाएगी। दोषी पाए जाने पर सख्त वैधानिक कार्रवाई करेंगे।
बीएल कांताराव, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी,मप्र