अस्पतालों में एयर सेपरेटर लगाए जाएंगे, दूर होगी आक्सीजन की किल्लत
लखनऊ
प्रदेश के अपर मुख्य सचिव सूचना नवनीत सहगल ने कहा है कि स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा कुल मिलाकर 31 अस्पतालों में एयर सैपरेटर लगाने के निर्देश जारी किये जा चुके है। वह अगले 10-15 दिन के मध्य में 31 अस्पतालों में उपलब्ध करा दिए जाएंगे। प्रदेश में एयर सैपरेटर स्थापित हो जाने से प्रदेश के बाहर से आक्सीजन की आवश्यकता नहीं होगी। इसके साथ-साथ केन्द्र सरकार द्वारा प्रदेश सरकार को 1500 आक्सीजन कंसंट्रेटर आवंटित किये गये है। विभिन्न अस्पतालों में भेजे जा रहे है। इन कंसंट्रेटर को एक-एक मरीज को लगाया जायेगा जिससे मरीज को अतिरिक्त आक्सीजन की आवश्यकता नहीं रहेगी।
प्रदेश में जो औद्योगिक इकाइयां थी, वह औद्योगिक उपयोग के लिए आक्सीजन बना रही थी। उनको भी अब चिकित्सीय प्रयोग के लिए परिवर्तित करने की अनुमति दे दी गयी है। प्रदेश में ऐसी फैक्टरियां जो मेडिकल आक्सीजन लम्बे समय से बंद पड़ी हो उनको भी पुनः संचालित करके इस व्यवस्था में लाया जायेगा। निजी अस्पतालों को भी प्रेरित किया जा रहा है कि स्वयं अपना आक्सीजन प्लांट लगा ले जिससे बाहर से अतिरिक्त आॅक्सीजन की आवश्यकता न हो। इसके लिए एक विशेष योजना बनायी जा रही है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में गुरूवार को कुल 16,514 मरीज कोविड-19 संक्रमण से ठीक होकर डिस्चार्ज हुए है। यह अत्यंत सुखद है प्रदेशवासी धैर्य बनाकर रखे। प्रदेश में उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं तथा जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता में किसी भी प्रकार की कमी नहीं रहेगी। प्रदेश में अस्पतालों में आक्सीजन की समस्याओं के लिए मुख्यमंत्री ने समीक्षा करते हुए कंट्रोल रूम बनाने के निर्देश दिये। प्रदेश सरकार को भारत सरकार से माध्यम से जहां-जहां से आक्सीजन का कोटा आंवटित किया गया है वहा से जल्दी से जल्दी आक्सीजन लाने की व्यवस्था की जा रही है। सरकारी अस्पतालों में स्थानीय स्तर पर हवा से आक्सीजन बनाने के प्लांट लगाने की योजना की भी समीक्षा की जा रही है।
सहगल ने बताया कि प्रदेश में रेमेडेसिविर इंजेक्शन की उपलब्धता के लिए केन्द्र सरकार द्वारा लगभग 1,22,000 वायल आवंटित किये गये है। जैसे-जैसे वायल प्राप्त होते जायेंगे, उनकी उपलब्धता से प्रदेश में रेमेडेसिविर की उपलब्धता में बढ़ोत्तरी हो जायेगी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा 10 जिलों में बेडों की संख्या दुगुना करने के कार्यक्रम की भी समीक्षा की गई। जिसके अन्तर्गत चिकित्सा शिक्षा मंत्री एवं चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री को निर्देशित किया है कि वह लखनऊ में केजीएमयू व बलरामपुर चिकित्सालय और प्रयागराज में निजी अस्पतालों में, वाराणसी व कानपुर में सभी जिलों में उपलब्ध बेडों की संख्या को बढ़ाने के निर्देश दिये है।
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