पूर्व मंत्री लाखन सिंह यादव का कहना बसपा के कार्यकर्ता कांग्रेस में हो रहे शामिल

पूर्व मंत्री लाखन सिंह यादव का कहना बसपा के कार्यकर्ता कांग्रेस में हो रहे शामिल

भोपाल
मध्य प्रदेश की 24 विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में कांग्रेस का सबसे ज्यादा फोकस ग्वालियर चंबल इलाके की 16 विधानसभा सीटों पर है. लेकिन इन सीटों पर बसपा ने चुनाव लड़ने का ऐलान कर कांग्रेस की धड़कन बढ़ा दी है. ग्वालियर चंबल इलाके में बसपा के मजबूत दावेदारों पर कांग्रेस ने नजर रखने के लिए टीम बना दी है. ये टीम इस इलाके के बसपा नेताओं से संपर्क कर उन्हें कांग्रेस के पक्ष में लाने की कवायद में जुट गई है. इसके लिए पार्टी ने ग्वालियर चंबल इलाके के नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है.

कांग्रेस का फोकस अब बीजेपी के असंतुष्ट नेताओं के साथ प्रदेश बीएसपी नेताओं पर भी हो गया है. ग्वालियर-चंबल वो इलाका है जहां जातीय समीकरण जीत-हार का फैसला करते हैं. इसलिए इस इलाके में बीएसपी का अच्छा-खासा प्रभाव है. यही वजह है कि जैसे ही बीएसपी ने अपने प्रत्याशी उतारने का ऐलान किया, कांग्रेस उसे साधने में जुट गयी. पार्टी ने इलाके में बसपा के मजबूत दावेदारों पर नज़र रखने के लिए जो टीम बनायी है उसमें रामनिवास रावत, लाखन सिंह यादव सहित स्थानीय नेताओं को शामिल किया है. लाखन सिंह यादव का बीएसपी के नेताओं से अच्छा संपर्क है. इसके अलावा बहुजन संघर्ष मोर्चा से कांग्रेस में आए फूल सिंह बरैया की भी मदद पार्टी ले रही है.

खबर इस बात को लेकर भी है कि उपचुनाव में बसपा के मजबूत उम्मीदवार उतरने पर पार्टी को नुकसान से बचाने के लिए खुद पीसीसी चीफ कमलनाथ ने मोर्चा संभाला है. हाल ही में कमलनाथ के दिल्ली दौरे के दौरान बसपा प्रमुख मायावती से उपचुनाव को लेकर चर्चा हुई है. कांग्रेस पार्टी की कोशिश है कि उपचुनाव में बसपा कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ें. लेकिन इस पर फिलहाल कोई सहमति नहीं बन पाई है. यदि कांग्रेस की कवायद असरदार होती है तो बसपा मजबूत उम्मीदवार ना उतारकर कांग्रेस के सामने कमजोर उम्मीदवार खड़ा कर समर्थन दे सकती है.

पूर्व मंत्री लाखन सिंह यादव का कहना है चुनाव से पहले बड़ी संख्या में बसपा के कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं. ऐसे में ग्वालियर चंबल इलाके में बसपा कांग्रेस के लिए कोई बड़ी चुनौती नहीं बनेगी.

कांग्रेस की रणनीति पर बीजेपी की भी नजर है. कैबिनेट मिनिस्टर प्रभु राम चौधरी ने कहा कांग्रेस उपचुनाव को लेकर किसी भी तरह की कसरत करे, जीत बीजेपी की होना तय है. दरअसल2018 के चुनाव में बसपा ने मजबूती के साथ चुनाव लड़ा था और उसने 2 सीटों पर जीत हासिल की थी. लेकिन कई सीटें ऐसी थी जहां बीएसपी दूसरे या फिर तीसरे नंबर पर रही थी. यानी बीजेपी और कांग्रेस का सियासी समीकरण बिगाड़ने में बसपा का बड़ा रोल रहता है.  इस बार भी 24 विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में ग्वालियर चंबल की 16 सीटों पर बसपा बड़ा रोल अदा कर सकती है जो बीजेपी से ज़्यादा कांग्रेस का खेल बिगाड़ सकती है. यही कारण है कि बहुजन समाज पार्टी को साधने के लिए कांग्रेस एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा रही है.