लगातार बढ़ रहे बस संचालन के खर्चे, किराया बढ़ाने को लेकर फिर आंदोलन के मूड में बस आॅपरेटर
भोपाल
प्रदेश के बस आॅपरेटर किराये में साठ फीसदी इजाफे की मांग को लेकर एक बार फिर सरकार से दो-दो हाथ करने की तैयारी में है। बस आपरेटरों का कहना है कि रेलवे मनमाने ढंग से किराया बढ़ा रहा है और राज्य सरकार किराया बोर्ड समिति के प्रस्ताव पर भी किराया बढ़ाने पर कोई निर्णय नहीं ले पा रहा है।
मध्यप्रदेश प्राइम रूट बस आॅनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गोविंद शर्मा और सदस्य मध्यप्रदेश किराया बोर्ड समिति चरणजीत सिंह गुलाटी ने परिवहन मंत्री गोविंद राजपूत को पत्र लिखकर कहा है कि तैंतीस माह से मध्यप्रदेश की बसों के किराये में संशोधन नहीं किया है इससे बसों का संचालन पूर्णत: बंद होने के कगार पर है। उन्होंने मंत्री को लिखे पत्र मे कहा है कि केन्द्र सरकार का रेलवे विभाग मनमाने तरीके से किराया बढ़ा रहा है। जबकि किराया बढ़ाने का प्रस्ताव संसद में रखा जाता है। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा गठित किराया बोर्ड समिति ने 18 सितंबर 2020 को किराया बढ़ाने के प्रस्ताव पर निर्णय ले लिया था लेकिन इसके बाद भी मध्यप्रदेश का परिवहन विभाग सुध नहीं ले पा रहा है। उन्होंने कहा कि है कि प्रदेश के सभी 52 जिलों के बस आपरेटर चाहते है कि तैतीस माह से जो किराया नहीं बढ़ाया गया है उसमें संशोधन कर 60 प्रतिशत वृद्धि की जाए। किराया नहीं बढ़ाए जाने पर बस आॅपरेटर फिर आंदोलन करने को मजबूर हो सकते है।
गोविंद शर्मा का कहना है कि कोरोना के चलते 22 मार्च से प्रदेश में बसों का संचालन बंद हुआ था। इसके बाद 15 सितंबर से कुछ बसे चली और एक अक्टूबर से संचालन थोड़ा और बढ़ा है। कोरोना काल में वाहन सेनेटाईजेशन और अन्य खर्चे बढ़ गए है। वर्ष 2018 में डीजल 67 रुपए 62 पैसे प्रति लीटर से 84 रुपए तक आ पहुंचा है।
शर्मा ने बताया कि प्रदेश के बस आॅपरेटरों को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चार फरवरी को रतलाम में मुलाकात के लिए समय दिया है। उनसे फिर किराया बढ़ाने की मांग रखी जाएगी। मांगे मंजूर नहीं हुई तो आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।
bhavtarini.com@gmail.com 
