विद्यार्थियों को मिलेगी विश्वविद्यालयों की फीस से मुक्ति
भोपाल
देशभर के सरकारी और निजी विश्वविद्यालय संचालित हो रहे हैं। डिग्री करने के बाद विद्यार्थियों की डिग्रियों का वेरीफिकेशन करने में काफी कठिनाई आती है। इसलिए एमएचआरडी ने नेशनल एकेडमिक डिपोजेट्री (एनएडी) में सभी विद्यार्थियों की डिग्रियां अपलोड करने के निर्देश जारी किए हैं, जिसमें प्रदेशभर के विवि पिछड़ रहे हैं। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय अंतिम तिथि बीतने के बाद प्रोसेस शुरू ही कर सका है।
फर्जी डिग्रियों से मुक्त करने एमएचआरडी ने एनएडी बनाया है। इसमें यूजीसी से मान्यता प्राप्त विवि की डिग्री ही अपलोड की जाएंगी। इसके लिए एमएचआरडी ने 12 सितंबर अंतिम तिथि रखी थी, जिसमें प्रदेश के सभी विवि पिछड़े हुए हैं। अंतिम तिथि बीतने के बाद बीयू अपनी प्रोसेसिंग तक शुरू नहीं कर सका है। जबकि उन्हें वर्तमान सत्र में जारी होने वाली डिग्रियों को एनएडी में अपलोड कर देना थी, जिससे नौकरी मिलने के बाद एजेंसियां उनका वेरीफिकेशन कर सकें। इससे बीयू में वेरीफिकेशन करने वाले विद्यार्थियों की संख्या बढ़ रही ही है।
आयोग ने सख्ती से जारी किए पत्र
मप्र निजी विवि विनियामक आयोग के चेयरमेन मोरध्वज सिंह परिहार ने सभी निजी विवि को पत्र जारी करते हुए कहाकि वे अपने विद्यार्थियों की डिग्रियों को समय रहते एनएडी पर अपलोड करें। हालांकि कुछ निजी विवि ने आयोग के आदेश को नजरअंदजा कर दिया है। इसके चलते चेयरमेन ने उन्हें स्मरण पत्र देखकर आयोग की तरफ से होने वाली कर्रवाई से सचेत कर दिया है। आयोग चेयरमेन परिहार का कहना है कि उन्होंने स्मरण पत्र भेज दिया है। इसके बाद भी विवि विद्यार्थियों की डिग्रियां एनएडी पर नहीं देते हैं, तो इससे परेशानी बढ़ सकती है।
बीयू को होगा आर्थिक नुकसान
बीयू विद्यार्थियों की डिग्री वेरीफाई करने का 300 रुपए लेता है। वहीं देश के बाहर की एजेंसी द्वारा वरीफिकेशन होने की दशा में बीयू विद्यार्थियों ने स्पीडपोस्ट का 1490 तक जमा करा लेता है, जिसके कारण विद्यार्थियों को अपना वेरीफिकेशन 1800 रुपए तक का पड़ता है। वहीं जरूरी होने पर कर्मचारी अपनी सेवाओं का मेहनताना तक विद्यार्थियों से वसूलने से नहीं चूकते हैं। वहीं एनएडी पर डिग्री का वेरीफिकेशन होने से विद्यार्थी उक्त सभी प्रकार की वसूली से मुक्त हो जाएंगे।
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