घाटी में घट रही पत्थरबाजी, सिविल प्रोटेस्ट बढ़ा
नई दिल्ली
जम्मू और कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाओं में कमी आई है हालांकि लोग अपना विरोध जताने के लिए सिविल प्रोटेस्ट का सहारा ले रहे हैं। इसका खुलासा आर्मी की इंटरनल रिपोर्ट में हुआ है। तीन दिन चली आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में आर्मी के सीनियर अधिकारियों ने इस पर चर्चा की और आर्मी की इंटरनल रिपोर्ट साझा की गई।
आर्मी की इंटरनल रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल अगस्त के बाद घाटी में पत्थरबाजी की घटनाएं कम हुई हैं। जहां पिछले साल अगस्त में पत्थरबाजी की 66 घटनाएं हुईं वहीं इस साल मार्च में इस तरह की 17 घटनाएं हुईं। लोग ज्यादा सिविल प्रोटेस्ट के जरिए अपने गुस्से का इजहार कर रहे हैं। इस साल मार्च में इस तरह के 69 प्रोटेस्ट हुए।
आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में घाटी के हालात पर चर्चा के दौरान बताया गया कि आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन के दौरान लोग जो प्रोटेस्ट करते हैं, उनकी इंटेंसिटी कम हुई है। आतंक की राह पर जाने वाले युवाओं की संख्या भी कम हुई है और आतंकियों का लोकल रिक्रूटमेंट अब साउथ कश्मीर में सीमित दिख रहा है।
घाटी में इस साल जनवरी में 5, फरवरी में 7 और मार्च में 6 युवा आतंकी राह में गए। इन 6 में से 5 साउथ कश्मीर के हैं और एक बांदीपुरा का। पिछले साल शुरुआती तीन महीने में 32 युवाओं ने आतंक की राह पकड़ी थी। घाटी में इस साल अबतक 68 आतंकी मार गिराए गए हैं। मार्च में 21 आतंकी मारे गए थे जिनमें 11 जैश-ए-मोहम्मद, 5 हिज्बुल मुजाहिदीन और 5 लश्कर-ए-तैयबा के थे।
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