ट्रेन में लावारिस मिले थे 1.40 करोड़ रुपए, मामले में रेलवे कनेक्शन जांच

ट्रेन में लावारिस मिले थे 1.40 करोड़ रुपए, मामले में रेलवे कनेक्शन जांच
कानपुर, पिछले महीने नई दिल्ली से बिहार जा रही स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस के पैंट्रीकार से मिले 1.40 करोड़ रुपए भरे बैग की जांच में नया मोड़ आ गया है। पुलिस ने नोटों पर दावा करने करने वाली कंपनी बीए-4एस के भूमिका की जांच शुरू कर दी है।

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जागत गांव डाट काम

कंपनी के रेलवे कनेक्शन की भी पड़ताल हो रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि रेलवे का कौन अधिकारी है जिसने बैग रिसीव करने के लिए इंटरकॉम फोन का इस्तेमाल किया था। रेलवे के फोन का इस्तेमाल या तो कोई रेल कर्मचारी या फिर उसका करीबी ही कर सकता है। प्रारंभिक जांच में ही यह तो साफ हो गया कि फोन कानपुर से ही किया गया लेकिन यह नहीं पता चल पाया कि रेलवे के किस दफ्तर के फोन का इस्तेमाल किया गया।

कानपुर से ही किया गया था फोन

पुलिस की जांच में पता चला कि 15 फरवरी-2021 को दिल्ली से ट्रेन छूटते ही काला कोट पहने व्यक्ति ने लाल रंग का बैग पैंट्रीकार में रखा था। पूछताछ में पैंट्रीकार के वेंडर ने बताया कि काला कोट पहने व्यक्ति ने कहा था कि यह बैग कानपुर सेंट्रल पर उतारा जाएगा। कानपुर सेंट्रल पर ट्रेन पहुंचने के एक घंटे पहले  डिप्टी एसएस कामर्शियल में इंटरकाम पर फोन आया कि स्वतंत्रता सेनानी के पैंट्रीकार में लाल रंग का बैग रखा है उसे यहां उतरवा लिया जाए। बैग उतारते ही दोबारा फोन किया गया कि टी शर्ट पहने व्यक्ति को बैग दे दिया जाए। हालांकि गेस्ट हाउस तक बैग पहुंचने की भी बात सामने आई लेकिन इस दिशा में कोई जांच नहीं की गई। केवल बयान ही लिए गए। जांच कर रही जीआरपी का मानना है कि नोट भरे बैग का कनेक्शन सीधे तौर पर रेलवे के किसी व्यक्ति से जुड़ा है। इसलिए भी कि इंटरकॉम का इस्तेमाल रेलवे कर्मचारी या फिर उसका कोई करीबी ही कर सकता है। फोन कानपुर से ही किया गया। यह पता नहीं कि सेंट्रल से ही किसी विभाग से किया गया या फिर गोविंदपुरी, या दूसरे स्टेशनों से।

बी-4एस सॉल्यूशन के दावे की जांच

उधर, एक  मार्च को गाजियाबाद की कंपनी बी-4एस ने नोटों पर अपना दावा किया है। जीआरपी मुख्यालय के व्हाट्सएप नंबर पर पैसे रिलीज करने का दावा किया गया। स्टेशन पर मिले रुपए आयकर विभाग के हवाले कर दिए गए हैं, इसलिए कंपनी के दावे का पत्र भी आयकर विभाग को ही भेज दिया गया। अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बी-4एस सॉल्यूशन का रेलवे के कनेक्शन क्या है। किस अधिकारी या कर्मचारी से कंपनी की यारी है। रेलवे के किस दफ्तर से डिप्टी एसएस कार्यालय के इंटरकॉम पर फोन किया गया। हालांकि इंटरकॉम का कोई रिकार्ड नहीं होने के नाते यह पता लगा पाना मुश्किल हो रहा है कि किस नंबर और किस स्थान से फोन किया गया। कई कर्मचारियों, वेंडरों के बयान हो चुके हैं। फोन रिसीव करने वाले ने यह तो माना कि उसे बैग देने के लिए फोन किया गया लेकिन यह नहीं बता पाया कि फोन किस नंबर और कहां से आया था।

जरूरत पड़ी तो दोबारा बयान दर्ज करेंगे

राममोहन राय, प्रभारी निरीक्षक कानपुर सेंट्रल कहते हैं कि पैंट्रीकार से मिले 1.40 करोड़ रुपए के से जुड़े सभी के बयान लिए जा चुके हैं। पैंट्रीकार मैनेजर, वेंडर और रेलवे कर्मचारियों ने बयान दर्ज कराए हैं। इस बात की जांच कर रहे हैं कि किस नंबर और रेलवे के किस कार्यालय से फोन किया गया। जरूरत पड़ी तो दोबारा बयान दर्ज किए जाएंगे। कंपनी का रेलवे से कनेक्शन सहित कई बिंदुओं पर विवेचना चल रही है।