भोपाल
स्टायपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल पर गए प्रदेश के पांचों मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टरों में से 19 के पंजीयन मप्र मेडिकल काउंसिल से 2 अगस्त तक के लिए निलंबित कर दिए गए हैं। इसके साथ ही सरकार ने एस्मा के तहत कार्रवाई के लिए हड़ताली जूनियर डॉक्टरों को चिन्हित कर दिया है।
वहीं शासन के हाथ वे सबूत लग गए हैं, जिसमें ग्वालियर, इंदौर और जबलपुर मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर जूडा को भड़का रहे हैं। इनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है। इधर हड़ताल को लेकर अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा राधेश्याम जुलानिया ने गुरुवार को सुबह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को फोन पर पूरी स्थिति से अवगत कराया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि हड़ताल खत्म किए बगैर कोई चर्चा नहीं होगी।
गौरतलब है कि बुधवार को हाईकोर्ट द्वारा हड़ताल को अवैध करार देने के बाद जूडा ने हड़ताल वापसी का पत्र सौंप दिया था, लेकिन देर रात 24 जूडा पदाधिकारियों का निष्कासन वापस लेने के बाद ही हड़ताल खत्म करने का जूडा ने निर्णय लिया। इसके चलते गुरुवार को भी प्रदेश पांचों मेडिकल कॉलेजों में जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर रहे।
दो के निरस्त हो सकते हैं दाखिले
इंदौर के दो पीजी छात्रों का मप्र मेडिकल काउंसिल में पंजीयन ही नहीं मिला है। नियमानुसार बिना पंजीयन वे पढ़ाई ही नहीं कर सकते। मप्र मेडिकल काउंसिल में पंजीयन नहीं कराने पर मप्र मेडिकल काउंसिल के रस्ट्रिार डॉ.सुबोध मिश्रा को मामले की जांच करने व इन छात्रों के दाखिले निरस्त करने के लिए पत्र लिखा है। इनके नाम डॉ. मोहित टाक व डॉ. अदम्मय गुप्ता हैंं।