खतरे में प्रदेश की 259 मंडियों का अस्तित्व

खतरे में प्रदेश की 259 मंडियों का अस्तित्व

कल से तीन दिन के लिए मंडियां बंद

भोपाल। प्रदेश भर में 259 कृषि उपज मंडियां हैं। इन मंडियों का कार्यभार मंडी समिति संभालती हैं। मंडी प्रांगण के अंदर आने वाले माल वाहकों, लाइसेंसधारियों और गल्ला से जो आय होती है उसी से मंडी समीतियों में पदस्थ कर्मचारियों का वेतन बनता है। प्रदेश भर में पांच हजार से ज्यादा अधिकारी कर्मचारी मंडियों में पदस्थ हैं। अब मंडी मॉडल एक्ट लागू होने से किसानों का माल सीधे बाजार में उतारा जा रहा है। जिसका विरोध लगातार मंडी समिति कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा है। अब इसके विरोध में अधिकारियों ने भी हुंकार भर दी है। जिसके बाद प्रदेश भर की 259 कृषि उपज मंडियां तीन सितंबर से तीन दिन के लिए बंद की जा रही हैं। इससे पूरे प्रदेश में करोड़ों रुपए का व्यापार चौपट होने का अंदेशा है। इसमें अधिकारी और कर्मचारी काम नहीं करेंगे जिसके समर्थन का आश्वासन मंडी व्यवसायियों ने भी दिया है। ऐसा हुआ तो बिक जाएंगी मंडियां संयुक्त संघर्ष मोर्चा मध्य प्रदेश मंडी बोर्ड भोपाल के संयोजक बीबी फौजदार का कहना है कि प्रस्तावित संचालनालय विपणन में शामिल कर राज्य शासन के कर्मचारी घोषित किया जाए या मंडी बोर्ड में करोड़ों रुपये जो समितियों से आय के रूप में जमा हैं उनसे अधिकारियों व कर्मचारियों को पेंशन के रूप में क्षतिपूर्ति मिले। इसके लिए अतिशय राशि में से 350 करोड़ रुपये आरक्षित निधि मद का निर्धारित किया जाए। अगर ऐसा नहीं कर सकते हैं तो प्रदेश भर की मंडियों की भूमि बेचकर उनकी क्षतिपूर्ति की जाए वे घर बैठकर जीवन यापन कर लेंगे। इसका हो रहा विरोध प्रदेश भर में संयुक्त संघर्ष मोर्चा मप्र मंडी बोर्ड द्वारा विरोध जारी है। मोर्चा के सदस्यों का कहना है कि इस अध्यादेश के जरिए मंडी के बाहर अनाज की खरीदी व बिक्री की अनुमति देने के साथ टैक्स में छूट दी जा रही है। जिससे मंडियों की आय बंद हो जायेगी। स्पष्ट नहीं है आध्यादेश के नियम संयुक्त संघर्ष मोर्चा के अनुसार मप्र शासन द्वारा 1 मई 2020 को मॉडल एक्ट लागू करने का अध्यादेश जारी किया गया लेकिन उसके विस्तृत नियम व दिशा निर्देश वर्तमान तक जारी नहीं हुए अर्थात उपरोक्त एक्ट वर्तमान में क्रियाशील नहीं हैं। केंद्र शासन द्वारा 5 जून 2020 से कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) अध्यादेश जारी किया गया। किंतु राज्य शासन द्वारा आज तक अध्यादेश को अंगीकृत करने के संबंध में भी स्पष्ट नियम व दिशा निर्देश जारी नहीं किए गए। भारत सरकार द्वारा भी उपरोक्त अध्यादेश के संबंध में नियम प्रक्रिया जारी नहीं की गई है। अर्थात यह अध्यादेश अभी वर्तमान में क्रियाशील नहीं है।