राज्य शिक्षा केंद्र कक्षा पहली से आठवीं तक की स्कूलों में पढ़ाई के फामूर्ले को बदलने जा रहा
भोपाल, कोरोना संकट के कारण मार्च से स्कूल बंद हैं। स्कूल शिक्षा विभाग के मुताबिक अब कक्षा पहली से आठवीं तक के पाठ्यक्रम का पुर्ननियोजन किया जाएगा। 60 फीसदी पढ़ाई आनलाइन, रेडियो-टीवी व घर-घर जाकर कराई जाएगी, जबकि कठिन विषयों की 40 फीसदी पढ़ाई स्कूल में ही प्रोजेक्टर के माध्यम से होगी। यानी स्कूल खुलने पर शिक्षक विद्यार्थियों को कठिन विषयों को बोर्ड, प्रोजेक्टर के माध्यम से समझाकर उनकी कठिनाइयों को दूर करेंगे।
राज्य शिक्षा केंद्र कक्षा पहली से आठवीं तक की स्कूलों में पढ़ाई के फामूर्ले को बदलने जा रहा है। इसके कुछ बिंदुओं पर काम करने के लिए राज्य शिक्षा केंद्र ने जिला प्रशिक्षण संस्थाओं को जिम्मेदारी सौंपी है। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान ने भी उन बिंदुओं पर काम करना शुरू कर दिया है। राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा पाठ्यक्रम का पुर्ननियोजन इसलिए किया जा रहा है, जिससे कोरोना के कारण बच्चों की पढ़ाई ना रुके, सीखने सिखाने की प्रक्रिया भी चलती रहे। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार पहले कक्षा पहली से आठवीं तक इसके बाद 9वीं से 12वीं तक के पाठ्यक्रम में बड़े बदलाव की तैयारी में है।
अभी ऐसे हो रही पढ़ाई
जिला शिक्षा केंद्र द्वारा पहली से आठवीं तक के बच्चों को तीन बिंदुओं में ह्यहमारा घर हमारा विद्यालय, रेडियो, टीवी के माध्यम से पढ़ाया जा रहा है। 15 नवंबर तक स्कूल नहीं खुलेंगे। ऐसे में शासन की सोच है कि कोर्स को दो माध्यमों में बांटा जाए, जिसे बच्चे आसानी से समझ सकें।
ऐसे कराई जाएगी 60 फीसदी पढ़ाई
जिन बच्चों के पास आनलाइन पढ़ाई के इंतजाम हैं उनके लिए मोबाइल से ही आनलाइन पढ़ाई कराई जाएगी। साधन न होने की स्थिति में शिक्षक घर-घर जाकर बच्चों को पढ़ाएंगे। साथ ही रेडियो टीवी के माध्यम से पढ़ाई कराई जाएगी। इन तीनों फार्मूलों से 60 फीसदी पढ़ाई होने के बाद कठिन विषयों के लिए पढ़ाई स्कूल में ही कराए जाने की योजना है।
30 तक देनी होगी जानकारी
राज्य शिक्षा केंद्र ने जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान से लर्निंग आउटकम्स की प्राप्ति किस प्रकार होगी, लनिंज्ग आउटकम्स प्राप्त करने में क्या परेशानी हो सकती है, पाठ्यक्रम पूरा करने में छात्रों की समझ कैसे बनेगी आदि बिंदुओं पर जानकारी 30 अक्टूबर तक मांगी है।
ऐसे होगा पुर्ननियोजन
पाठ्यक्रम के 60 प्रतिशत हिस्से को पोर्टल से बच्चों को आनलाइन भेज दिया जाएगा। 40 प्रतिशत पाठ्यक्रम का ऐसा हिस्सा जो कठिन होगा, उसे 15 नवंबर के बाद स्कूल खुलने पर शिक्षकों द्वारा पढ़ाया जाएगा। यानी जो सरल विषय हैं वे प्रेक्टिकल या होम असाइनमेंट के माध्यम से पढ़ाए जाएंगे, वहीं कठिन विषयों को शिक्षक स्कूल में ही पढ़ाएंगे।