मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ऊर्जा आत्मनिर्भरता की नई रोशनी, पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से बदल रही लोगों की जिंदगी

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ऊर्जा आत्मनिर्भरता की नई रोशनी, पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से बदल रही लोगों की जिंदगी

रायपुर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना तेजी से लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। राज्य सरकार के प्रभावी क्रियान्वयन और जनहितैषी प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रदेश में बड़ी संख्या में परिवार सौर ऊर्जा को अपनाकर ऊर्जा आत्मनिर्भर बन रहे हैं। इससे जहां बिजली के खर्च में उल्लेखनीय कमी आई है, वहीं स्वच्छ एवं पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा के उपयोग को भी नई गति मिली है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशा है कि प्रदेश का प्रत्येक पात्र परिवार आधुनिक, किफायती और टिकाऊ ऊर्जा व्यवस्था से जुड़े। इसी उद्देश्य से योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार, सरल आवेदन प्रक्रिया तथा समयबद्ध सब्सिडी वितरण के माध्यम से अधिकाधिक लोगों को इसका लाभ दिलाया जा रहा है। यही कारण है कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में सैकड़ों घर आज सौर ऊर्जा से रोशन हो रहे हैं और लोग आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं।

इस जनकल्याणकारी योजना की सफलता की प्रेरक मिसाल गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड स्थित गुरुकुल परिसर, पेंड्रारोड निवासी त्रिलोक मिश्रा हैं। उन्होंने अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित कर यह सिद्ध कर दिया कि सौर ऊर्जा केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम ही नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक बचत का भी प्रभावी उपाय है।

त्रिलोक मिश्रा को सोलर प्लांट स्थापना के लिए केंद्र सरकार से 78 हजार रुपये की सब्सिडी सीधे उनके बैंक खाते में प्राप्त हुई। उन्होंने पूरी प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और उपभोक्ता हितैषी बताते हुए कहा कि योजना का लाभ लेना बेहद आसान रहा और किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। इससे शासन की पारदर्शी व्यवस्था और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता स्पष्ट दिखाई देती है।

सोलर प्लांट स्थापित होने से पहले मिश्रा को हर महीने लगभग 3 हजार से 3 हजार 500 रुपये तक बिजली बिल का भुगतान करना पड़ता था। लेकिन सौर ऊर्जा प्रणाली शुरू होने के बाद उनकी स्थिति पूरी तरह बदल गई। अब उनके घर की अधिकांश बिजली आवश्यकता छत पर लगे सोलर प्लांट से पूरी हो रही है। इतना ही नहीं, अतिरिक्त उत्पादित बिजली ग्रिड में भेजी जा रही है, जिसका समायोजन बिजली बिल में होने से उन्हें माइनस बिजली बिल का लाभ भी मिल रहा है। इससे उनके परिवार को हर महीने उल्लेखनीय आर्थिक राहत मिल रही है।

त्रिलोक मिश्रा का कहना है कि अब उन्हें बिजली बिल की चिंता नहीं रहती। उनकी जरूरत की बिजली उनके अपने घर की छत से तैयार हो रही है। यह अनुभव न केवल आर्थिक रूप से लाभदायक है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने अन्य लोगों से भी इस योजना का लाभ उठाकर सौर ऊर्जा अपनाने की अपील की है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ऐसी योजनाओं के माध्यम से प्रदेश में हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने, कार्बन उत्सर्जन कम करने और आम नागरिकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना आज केवल बिजली बचत की योजना नहीं रह गई है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत, स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने का प्रभावी माध्यम बन चुकी है।

त्रिलोक मिश्रा की सफलता इस बात का प्रमाण है कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का समय पर लाभ लेकर कोई भी परिवार ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकता है। प्रदेश में बढ़ती सौर ऊर्जा की यह नई रोशनी आने वाले समय में हजारों परिवारों के लिए प्रेरणा बनेगी और छत्तीसगढ़ को स्वच्छ, हरित तथा ऊर्जा-संपन्न राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।