सीड-कम-फर्टी ड्रिल तकनीक से दलहन उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा

सीड-कम-फर्टी ड्रिल तकनीक से दलहन उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा

रायपुर, खरीफ मौसम में दलहन उत्पादन बढ़ाने तथा किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से राज्य में समूह अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के मार्गदर्शन में कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसानों के खेतों में सीड-कम-फर्टी ड्रिल जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर अरहर की वैज्ञानिक बोवाई कराई जा रही है। इस पहल का उद्देश्य दलहन फसलों का रकबा एवं उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों की उत्पादन लागत कम करना और उनकी आय में वृद्धि करना है।

इसी क्रम में सरगुजा जिले के ग्राम सोहगा, बरकेला, खजूरी, कुबेरपुर एवं कुमडेवा में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी), जबलपुर के सहयोग से लगभग 130 एकड़ क्षेत्र में अरहर का समूह अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन स्थापित किया गया है। इस प्रदर्शन के माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक खेती की नवीन तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि बदलती जलवायु परिस्थितियों एवं सिंचाई जल की सीमित उपलब्धता को देखते हुए अरहर किसानों के लिए लाभकारी एवं टिकाऊ फसल के रूप में उभर रही है। वैज्ञानिक पद्धति से इसकी खेती करने पर कम पानी में भी बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से किसानों के खेतों में सीड-कम-फर्टी ड्रिल के माध्यम से कतार पद्धति से बोवाई कराई गई।

उन्होंने बताया कि सीड-कम-फर्टी ड्रिल तकनीक से बीज एवं उर्वरक का एक साथ संतुलित प्रयोग संभव होता है, जिससे बीज और उर्वरक की बचत होती है, श्रम लागत कम होती है तथा पौधों की समान दूरी बनाए रखने से बेहतर अंकुरण एवं स्वस्थ वृद्धि सुनिश्चित होती है। इसके साथ ही किसानों को खरपतवार नियंत्रण के लिए अनुशंसित शाकनाशी उपलब्ध कराकर प्रारंभिक अवस्था में प्रभावी खरपतवार प्रबंधन पर भी जोर दिया जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान किसानों को संतुलित उर्वरक प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य, पोषक तत्वों के समुचित उपयोग तथा अरहर फसल में कीट एवं रोग प्रबंधन की वैज्ञानिक जानकारी भी दी गई। वैज्ञानिकों ने किसानों को समेकित पोषक तत्व प्रबंधन एवं समेकित कीट प्रबंधन अपनाने की सलाह देते हुए समय पर कृषि कार्यों के निष्पादन और वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुरूप खेती करने का आग्रह किया।

बोवाई कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया तथा सीड-कम-फर्टी ड्रिल और कतार पद्धति से बोवाई के लाभों को समझते हुए आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने में रुचि दिखाई। कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा प्रदर्शन प्लॉटों का नियमित तकनीकी मार्गदर्शन एवं निगरानी जारी रखी जाएगी, ताकि किसानों को अधिकतम उत्पादन एवं बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त हो सके।