जयपुर। राजस्थान में जारी सियासी खींचतान में मंगलवार को बड़ा उलटफेर हुआ। कांग्रेस पार्टी ने सचिन पायलट पर एक्शन लेते हुए उन्हें उपमुख्यमंत्री पद और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटा दिया है। कांग्रेस पार्टी ने बड़ा एक्शन लेते हुए सचिन पायलट को प्रदेश अध्यक्ष पद और उपमुख्यमंत्री के पद से हटा दिया है। साथ ही पायलट समर्थक मंत्रियों को भी हटाया गया है। सचिन पायलट के अलावा विश्वेंद्र सिंह और रमेश मीणा को मंत्रिमंडल से बाहर निकाला गया है। प्रदेश के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है।
इसस पहले जयपुर की एक होटल में हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में यह प्रस्ताव पारित हुआ है कि सचिन पायलट समते जो विधायक इस बैठक में नहीं आए हैं, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। दूसरी ओर, दिल्ली से प्रियंका गांधी ने सचिन पायलट को फोन कर मनाने की आखिरी कोशिश की। प्रियंका ने कहा कि राहुल और उनका, सचिन के प्रति लगाव है। यदि वे विधायक दल की बैठक में नहीं जाना चाहते हैं तो कोई बात नहीं। जहां वे वहीं से बयान जारी कर कहें कि वे कांग्रेस के साथ हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, 'भाजपा ने राजस्थान की बहादुर जनता द्वारा चुनी गई कांग्रेस सरकार को अस्थिर कर गिराने की साजिश की है। भाजपा ने धनबल और सत्ताबल के दुरुपयोग से, ईडी और इनकम टैक्स विभाग के दुरुपयोग से कांग्रेस और स्वतंत्र विधायकों को खरीदने की कोशिश का जुर्म किया है। मुख्यमंत्री गहलोत ने बताया कि किस तरह विधायकों को खरीदने की कोशिश की जा रही है। सचिन पायलट और कुछ साथी दिग्भ्रमित होकर भाजपा के जाल में उलझकर भाजपा की साजिश में शामिल हो गए। जिस तरह विधायकों को मानेसर के फाइव स्टार होटल में खट्टर जी की पुलिस के संरक्षण में रखा गया है। पिछले 72 घंटे से सोनिया गांधी ने राहुल गांधी के नेतृत्व में, कांग्रेस के नेताओं ने सचिन पायलट और दूसरे साथी मंत्रियों और विधायकों से लगातार संपर्क करने की कोशिश की। कांग्रेस नेतृत्व ने सचिन पायलट से आधा दर्जन बार बातचीत करने की कोशिश की। केसी वेणुगोपाल ने कई बार सचिन पायलट से बात की।'
सूत्रों के मुताबिक, सचिन पायलट अब गहलोत के साथ काम नहीं करना चाहते। उन्होंने अपनी यह मंशा कांग्रेस के सीनियर नेताओं के साथ बातचीत में जाहिर की है।
राजस्थान कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडे ने मंगलवार सुबह विधायक दल की बैठ्क के पहले कहा कि हम सचिन पायलट को दूसरा मौका दे रहे हैं, उनसे आज की विधायक दल की बैठक में भाग लेने के लिए कहा। मुझे उम्मीद है कि आज सभी विधायक आएंगे और नेतृत्व को एकजुटता देंगे, जिसके लिए राजस्थान के लोगों ने मतदान किया, हम सभी राज्य के विकास के लिए काम करना चाहते हैं।
राजस्थान भाजपा अध्यक्ष सतीश पुनिया ने कहा, 'कांग्रेस दावा कर रही है कि उनके नेता एकजुट हैं, लेकिन यह साफ है कि उनके बीच आंतरिक विवाद है। इसलिए सचिन पायलट पार्टी छोड़ रहे हैं। अभी हमने फ्लोर टेस्ट की मांग नहीं की है।
22 विधायक बैठक में नहीं आए
कांग्रेस विधायक: सचिन पायलट, रमेश मीणा, इंद्राज गुर्जर, गजराज खटाना, राकेश पारीक, मुरारी मीणा, पीआर मीणा, सुरेश मोदी, भंवर लाल शर्मा, वेदप्रकाश सोलंकी, मुकेश भाकर, रामनिवास गावड़िया, हरीश मीणा, बृजेन्द्र ओला, हेमाराम चौधरी, विश्वेन्द्र सिंह, अमर सिंह, दीपेंद्र सिंह और गजेंद्र शक्तावत।
गहलोत ने कराई थी विधायकों की परेड
इससे पहले, सोमवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने विधायकों की परेड कराई थी। इस दौरान, उन्होंने कहा कि हमारे पास बहुमत (101 विधायक) से ज्यादा 109 एमएलए हैं। वहीं, पायलट ने सोमवार शाम अपने विधायकों का वीडियो जारी किया। कहा कि उनके पास 19 विधायक हैं। हालांकि, वीडियो में 17 विधायक नजर आए। खेमे ने कहा कि गहलोत सरकार अल्पमत में है। फ्लोर टेस्ट कराए। गहलोत खेमे के विधायक जयपुर के पास कूकस के फेयर माउंट होटल में ठहरे हैं। वहीं, पायलट खेमे के विधायक हरियाणा के मानेसर में रुके हैं।
पायलट समझौते के लिए राजी नहीं
कांग्रेस पायलट को मनाने में जुटी है। सोमवार को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के अलावा पी। चिदंबरम और केसी वेणुगोपाल ने उनसे संपर्क साधा था। कांग्रेस सूत्रों ने कहा कि पायलट समझौते को राजी नहीं हुए। उन्होंने राहुल गांधी के साथ मुलाकात से भी इनकार कर दिया। हालांकि, सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि पायलट ने शीर्ष नेतृत्व के समक्ष चार शर्तें रखी हैं। इनमें कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष का पद बरकरार रखने के अलावा गृह और वित्त विभाग दिए जाने की मांग भी शामिल है। उधर, पायलट सीधे कुछ बोलने और ट्वीट करने के बजाय करीबियों से बयान दिला रहे हैं, ताकि पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए उन पर कोई कार्रवाई न हो सके।
राजस्थान विधानसभा की मौजूदा स्थिति: कुल सीटें: 200
पार्टी विधायकों की संख्या
कांग्रेस 107
भाजपा 72
निर्दलीय 13
आरएलपी 3
बीटीपी 2
लेफ्ट 2
आरएलडी 1
राजस्थान की विधानसभा में दलीय स्थिति को देखें तो कांग्रेस के पास 107 विधायक हैं। सरकार को 13 में से 10 निर्दलीय और एक राष्ट्रीय लोकदल के विधायक का भी समर्थन है। लिहाजा गहलोत के पास 118 विधायकों का समर्थन है। उधर, भाजपा के पास 72 विधायक हैं। बहुमत जुटाने के लिए कम से कम 29 विधायक चाहिए।