vinod upadhyay
भोपाल। भोपाल संसदीय सीट से कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह को जिताने के लिए कंप्यूटर बाबा हजारों साधुओं के साथ हठ योग के तहत धूनी रमाए हुए हैं। जानकारों का कहना है कि कंप्यूटर बाबा का यह हठ योग दिग्विजय सिंह पर भारी पड़ सकता है। इसकी एक वजह है हठयोग का दुरूपयोग और दूसरा कंप्यूटर बाबा का अतीत।

ज्योतिषियों के अनुसार, हठयोग चित्तवृत्तियों के प्रवाह को संसार की ओर जाने से रोककर अंतर्मुखी करने की एक प्राचीन भारतीय साधना पद्धति है, जिसमें प्रसुप्त कुंडलिनी को जाग्रत कर नाड़ी मार्ग से ऊपर उठाने का प्रयास किया जाता है और विभिन्न चक्रों में स्थिर करते हुए उसे शीर्षस्थ सहस्त्रार चक्र तक ले जाया जाता है।

हठयोग साधना की मुख्य धारा शैव रही है। यह सिद्धों और बाद में नाथों द्वारा अपनाया गया। मत्स्येन्द्र नाथ तथा गोरख नाथ उसके प्रमुख आचार्य माने गए हैं। गोरखनाथ के अनुयायी प्रमुख रूप से हठयोग की साधना करते थे। उन्हें नाथ योगी भी कहा जाता है। ज्योतिषियों का कहना है कि राजधानी भोपाल में कंप्यूटर बाबा के सानिध्य में जो हठयोग किया जा रहा है, उसका उद्देश्य और तरीका दोनों गलत है। ऐसे में उसका दुष्प्रभाव पड़ सकता है।
यम, नियम और आसन का पालन नहीं
ज्योतिषाचार्यो और यज्ञाचार्यो के अनुसार, राजधानी भोपाल में साधुओं द्वारा जो हठयोग किया जा रहा है उसमें यम, नियम और आसन का पालन नहीं किया जा रहा है। हठयोग में 'ह' सूर्य है और 'ठ' चन्द्रमा। इन दोनों के योग को हम सूर्य-चन्द्रमा, इड़ा-पिंगला, और प्राण-अपान का योग भी समझ सकते हैं। इन दोनों के योग से जो प्राणायाम (जिससे प्राण को साधा जा सके) होता है वही हठयोग है।

भोपाल में साधुओं द्वारा किए जा रहे हठयोग में इसके नियमों का पालन नहीं हो रहा है। बिना सुषुम्ना नाड़ी में प्राणवायु के प्रवेश हुए मन का स्थिर होना लगभग असंभव है। ऐसे में इसका प्रभाव निष्प्रभावी होगा। ज्यातिषियों के अनुसार, हठयोग में ही कहीं-कहीं आष्टांग योग और कहीं-कहीं षडांग योग का जिक्र मिलता है । यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि यह आठ अंग अष्टांग योग के अंग है। इनमें से यम और नियम को छोड़कर शेष छह षडांग योग के अंग है। योग के इन आठ अंगो का साधन करने से हठयोग पूरा होता है। भोपाल में साधुओं द्वारा किया जा रहा है हठयोग केवल हठ है। इसका लाभ तो कुछ नहीं होगा, बल्कि यह हानिकारक हो सकता है।
बाबा का अतीत बिगाड़ेगा गणित
कंप्यूटर बाबा सत्ता का लाभ प्राप्त करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं यह सर्वे विदित हो गया है। ऐसे में दिग्विजय सिंह ने उनको अपने पक्ष में उतार कर अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार ली है। कंप्यूटर बाबा ने कुर्सी पाने के लिए भाजपा शासन में किस तरह का उपक्रम कर चुके हैं, यह सभी जानते हैं।

भगवा चोला पहनकर उन्होंने सत्ता सुख पाने के लिए सारे ढोंग कर डाले हैं। उन्हें जैसे ही लगा कि प्रदेश में सत्ता बदलने वाली है उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया। विधानसभा चुनाव में तो उनका कोई फायदा कांग्रेस को हुआ नहीं। फिर भी दिग्विजय सिंह ने न जाने क्यों उन्हें अपने समर्थन में उतारा है। कंप्यूटर बाबा राजधानी में धर्म की हाड़ में जो ढोंग कर रहे हैं वह कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को भी पसंद नहीं आ रहा है।

गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह के लिए महामंडलेश्वर स्वामी वैराग्यानंद पांच क्विंटल लाल मिर्ची से हवन कर चुके हैं। हवन की शुरुआत उन्होंने पांच मई से कर दी थी। इस हवन में वैराग्यानंद के साथ कई और भी साधु-संत थे। वैराग्यानंद ने प्रण लिया है कि अगर दिग्विजय सिंह नहीं जीते तो वे परिणाम आने के बाद जिंदा समाधि ले लेंगे। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश भी दिग्विजय सिंह के पक्ष में आ गए हैं। राजनीतिक विश£ेषकों का मानना है कि कांग्रेस द्वारा साधु-संतों का जिस तरह प्रयोग किया जा रहा है वह उनके लिए शुभ नहीं है। चुनाव मतदाताओं के लिए महापर्व होते हैं। जो मतदाताओं को अपनी भावी योजनाओं से प्रभावित करता है उसकी जीत होती है।

दिग्विजय सिंह ने भोपाल के विकास के लिए विजन भा जारी किया है। लेकिन बाबाओं ने उन्हें ऐसे भ्रमजाल में फंसा दिया है कि वे अपने विजन को ही भूल गए हैं।