राजनीतिक हवाला कांड की ईडी-सीबीआई भी करेगी जांच

राजनीतिक हवाला कांड की ईडी-सीबीआई भी करेगी जांच

मचा हडक़ंप: मध्यप्रदेश से लेकर दिल्ली तक जुड़े तार

मंत्री, विधायक, उम्मीदवार, विभाग, कंपनी पर शिकंजा

कमलनाथ के तीन खास अफसरों पर एफआईआर दर्ज कराने का आदेश

कमलनाथ पर 2019 लोस चुनाव में हवाला के पैसे के इस्तेमाल का आरोप

आयोग के आदेश से पूर्व सीएस एसआर मोहंती की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

भोपाल। लोकसभा चुनाव 2019 से ठीक पहले मप्र में पड़े इनकम टैक्स छापे में बड़ा राजनीतिक हवाला कांड सामने आया है। इस मामले में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड यानी सीबीडीटी की रिपोर्ट पर चुनाव आयोग ने राज्य सरकार को सभी तत्कालीन मंत्रियों और अफसरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा है।

आयकर नियमों के खिलाफ मामला पाया गया

इसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ के कई करीबियों समेत कांग्रेस के कई तत्कालीन मंत्रियों, मप्र के आईएएस और आईपीएस अफसरों के नाम भी सामने आ रहे हैं। आयकर अधिनियम 1961 की धारा 132 के तहत आयकर नियमों के खिलाफ मामला पाया गया है।

बड़े पैमाने पर नगदी के लेन-देन और ट्रांजेक्शन का मामला

यह मामला बड़े पैमाने पर नगदी के लेन-देन और ट्रांजेक्शन का है। इसलिए राज्य सरकार जब ईओडब्ल्यू में या फिर अपनी दूसरी एजेंसी से एफआईआर दर्ज कराने के बाद जांच कराती है तो आगे ईडी के साथ सीबीआई भी भ्रष्टाचार की जांच करने के लिए सामने आ सकती है।
डेढ़ माह पड़ी रही रिपोर्ट
चुनाव आयोग ने 28 अक्टूबर 2020 को मप्र के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को सीबीडीटी की रिपोर्ट के साथ पत्र भेजा था। पत्र में छापों में आए नामों के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज या ईओडब्ल्यू में एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा था। अब फिर भारत चुनाव आयोग ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर राज्य सरकार से लेकर केंद्र सरकार को इस मामले में कार्रवाई के लिए कहा है।
281 करोड़ मिले थे
2019 में कमलनाथ के करीबी सहयोगियों और अन्य के खिलाफ की गई आयकर विभाग की छापेमारी में 281 करोड़ रुपए की बेहिसाबी नगदी का पता चला था। इस दौरान टीम ने मध्य प्रदेश और दिल्ली के बीच हुए संदिग्ध भुगतान से जुड़ी डायरी और कंप्यूटर फाइलें अपने कब्जे में ली थीं।
चर्चा में थी तुगलक रोड
आयकर विभाग को 20 करोड़ की संदिग्ध नगदी के तुगलक रोड पर रहने वाले महत्तवपूर्ण व्यक्ति के घर से दिल्ली की बड़ी राजनीतिक पार्टी के मुख्यालय तक कथित तौर पर जाने के सुराग भी मिले थे। यह कांग्रेस का मुख्यालय बताया जा रहा है। शराब की 252 बोतलों, कुछ हथियारों और बाघ की खाल के अलावा 14.6 करोड़ रुपए की बेहिसाबी नगदी मिली थी। आयोग ने कार्रवाई के लिए मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव और केंद्रीय गृह सचिव को भी कहा है। अफसरों के भी नाम शामिल आयकर को मिले दस्तावेजों में प्रदेश के कई तत्कालीन मंत्रियों, विधायकों और लोकसभा उम्मीदवारों के साथ लेन-देन का भी जिक्र था। तीन आईपीएस अफसरों सुशोभन बैनर्जी, संजय माने और बी मधुकुमार के साथ राज्य पुलिस सेवा के अरुण मिश्रा पर पहले केस दर्ज होगा। कमलनाथ सरकार में संजय माने एडीजी लोकायुक्त, पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन थे। अभी संजय माने एडीजी महिला अपराध पीएचक्यू हैं। सुशोभन बनर्जी ईओडब्ल्यू डीजी थे। अभी बनर्जी पुलिस अकादमी सागर में डायरेक्टर हैं। वी मधुकुमार एडीजी उज्जैन और डीजी ईओडब्ल्यू और ट्रांसपोर्ट कमिश्नर थे। मधुकुमार को नहीं मिली जिम्मेदारी वी मधुकुमार अब वो पुलिस मुख्यालय में अटैच हैं। उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं मिली है। अरुण मिश्रा एसपी ईओडब्ल्यू थे। अभी वो एसएएफ में हैं। छापे में पीडब्ल्यूडी, शिवा कॉर्पोरेशन, मोंटाना, डिजियाना, कार्निवल ग्रुप, नगरीय विकास, सिंचाई, महिला एवं बाल विकास (पोषण आहार) और परिवहन विभागों-कंपनियों के नाम भी सामने आ रहे हैं। ये है मामला कमलनाथ सरकार के दौरान उनके सलाहकार रहे राजेंद्र मिगलानी, रिश्तेदार रतुल पुरी की कंपनी मोजर बियर के लोगों, ओएसडी रहे प्रवीण कक्कड़, इंदौर के हवाला कारोबारी ललित कुमार छजलानी, कांट्रेक्टर अश्विनी शर्मा, प्रतीक जोशी, हिमांशु शर्मा समेत 52 ठिकानों पर छापे की कार्रवाई हुई थी।