प्रदेश में पहली बार विधानसभा चुनाव में पुर्नमतदान नहीं हुआ

प्रदेश में पहली बार विधानसभा चुनाव में पुर्नमतदान नहीं हुआ
भोपाल। सूबे में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान शांतिपूर्ण तरीके से निपट गए। एक ही चरण की राज्य की सभी 230 सीटों पर हुए मतदान में छुटपुट घटनाओं के अलावा कहीं भी हिंसा नहीं हुई। प्रदेश में विधानसभा चुनाव में ऐसा पहली बार हुआ है कि 65367 केंद्रों पर कहीं भी पर पुर्नमतदान की नौबत नहीं आई। इसके पीछे की वजह चुनाव आयोग की टीम की कड़ी मेहनत और सख्ती है। मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत के निर्देशन एवं राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाअधिकारी वीएल कांताराव के नेतृत्व में आयोग में पदस्थ आला पदाधिकारियों ने शांतिपूर्ण चुनाव कराने में अहम भूमिका निभाई है। जिसमें पुलिस, जिला प्रशासन एवं मतदान दलों की टीम भी शामिल हैं। इस बार चुनाव में मतदाताओं ने भी जागरूकता का परिचय दिया। यही वजह रही कि मतदान का प्रतिशत बढ़ा और किसी भी केंद्र पर उपद्रव जैसी नौवत नहीं आई। राज्य के किसी भी हिस्से में बूथ कैप्चरिंग जैसे हालात नहीं बनने दिए। चुनाव आयोग ने मप्र में विधानसभा चुनाव के लिए राज्य इकाई में पांच आईएएस अफसरों की टीम तैनात की थी। जिसकी कमान ईमानदार एवं सख्त अफसर वीएल कांताराव को सौंपी गई। इसके अलावा अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रूप में संदीप यादव, लोकेश कुमार जाटव एवं संयुक्त सीईओ की जिम्मेदारी विकास नरवाल एवं राजेश कौल को सौंपी गई। इन अफसरों ने मतदाताओं में जागरूकता बढ़ाने से लेकर, आचार संहिता उल्लंघन से जुड़ी शिकायतों के निराकरण, मतदाता सूची तैयार करन में अहम भ्ूामिका निभाई। चुनाव में जिला प्रशासन की टीम, पुलिस बल से निष्पक्ष काम कराने में इस बार आयोग सफल रहा है। आयोग की इस टीम ने जिला निवार्चन अधिकारियों से सतत संपर्क रखा, जिसका परिणाम रहा कि आयोग की सख्ती दिखी। चुनाव में किसने क्या दायित्व निभाया वीएल कांताराव, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव के लिए प्रदेश भर का दौरा। देर रात तक बैठकर चुनाव की तैयारियां की। आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत पर कलेक्टर और एसपी स्तर के अधिकारियों को हटाने की तत्काल सिफारिश। चुनाव में पक्षपात की शिकायत पर कई अफसरों पर गाज गिरी। जिसका असर रहा कि प्रशासन में आयोग का खौफ रहा। संदीप यादव, अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विधानसभा चुनाव में लगे अधिकारियों को समय पर प्रशिक्षण दिलाने से लेकर। कानून व्यवस्था के लिए पुलिस एवं पैरामिलिट्री फोर्स की टीमों की ड्यूटी। मतदाता सूचियों का अपडेशन से लेकर इलेक्शन इंडेक्स का दायित्व इन्हीं के पास था। लोकेश जाटव, अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी पूरे चुनाव में इन्होंने शिकायतों का प्रभार देखा। प्रदेश के किसी भी हिस्से आने वाली हर तरह की शिकायत का त्वरित परीक्षण कराकर। कार्रवाई के लिए अनुशंसा की। यही वजह रही कि आयोग को शिकायत मिलने के कुछ ही घंटों के भीतर कार्रवाई की गई। शिकायतों के आधार पर जाटव ने आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में कई अफसरों पर कार्रवाई की सिफारिश की। विकास नरवाल, ज्वाइंट सीईओ प्रदेश में पहली बाद मतदान का प्रतिशन इतना पहुंचा है। मतदान का प्रतिशन बढ़ाने के लिए आयोग ने प्रदेश भर में जागरूकता अभियान चलाया था। जागरूकता अभियान की कमान नरवाल ने संभाल रखी थी। इसके लिए नरवाल खुद मैदान में उतरे, कई जिलों का दौरा भी किया। यही वजह रही कि मतदान का प्रतिशत 74.13 प्रतिशत तक पहुंच गया। राजेश कौल, ज्वाइंट सीईओ विधानसभा चुनाव में मीडिया एवं प्रचार-प्रसार का काम राजेश कौल ने संभाला। साथ ही राज्य शासन और आयोग के बीच समन्वय का दायित्व भी कौल के पास रहा। चुनाव से जुड़ी हर तरह की खबरों को मीडिया में बेहतर तरीके से उठाया गया। दिल्ली से निगाहें गढ़ाए रहे ओपी रावत देश के मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से रिटायर्ड हो रहे ओपी रावत ने मप्र विधानसभा चुनाव में विशेष रुचि रही। मतदान से पहले उन्होंने प्रदेश के इंदौर-भोपाल में चुनावी तैयारियों की बारीकी से समीक्षा की। इसके बाद पूरे चुनाव के दौरान दिल्ली से निगाहें गढ़ाए रहे। हर गतिविधियों पर नजर रखी। यही वजह रही कि आयोग ने चुनाव आचार संहिता से जुड़े हर मामले में ताबड़तोड़ फैसल किए। इन कलेक्टर-एसी को हटाया चुनाव आयोग ने आचार संहिता उल्लंघन एवं निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए आधा दर्जन कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षकों पर भी गाज गिराई। जिसमें भिंड कलेक्टर आशीष कुमार , सतना कलेक्टर मुकेश कुमार शुक्ला, राजगढ़ एसपी सिमाला प्रसाद समेत अन्य अफसरों को हटाया। एक नजर में चुनाव मतदान का प्रतिशत: 74.13 कुल मत गिरे 3,73,85,825 पुरूष 19845173 महिला 17480415 कुल मतदान केंद्र 65367 मतदान कर्मी 300782 महिला कर्मी 45904 महिला मतदान केंद्र 3046