शिवराज सरकार के 100 दिन पूरे होने पर विशेष
डॉ. आनंद शुक्ल
प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मन में संकल्प अडिग हो तो कोई भी परिस्थिति आपके सामने बाधा नहीं बन सकती। संकल्प शक्ति का ही परिणाम है कि वैश्विक महामारी कोरोना से उत्पन्न हुई विषम परिस्थिति में प्रदेश की कमान संभालने के बाद उन्होंने लगातार युद्ध स्तर पर कई निर्णय लिया और प्रदेश में संक्रमण की स्थिति को थामने में अन्य राज्यों से बेहतर काम किया। यही कारण है कि देश के अन्य राज्यों की तुलना में मध्यप्रदेश में कोरोना से पीड़ित होने वालों की रिकवरी दर 76.47 प्रतिशत है। सरकार ने अभी तक 3 करोड़ 22 लाख से भी अधिक व्यक्तियों को आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक और यूनानी दवाओं के पैकेट वितरित किए हैं, जिससे आम आदमी में रोग प्रतिरोधक क्षमता को विकसित किया जा सके। यही कारण है कि अब आम आदमी इस बात की चर्चा करने लगा है कि संकटकाल में शिवराज सरकार आम आदमी का सहारा और संबल बनकर खड़ी है।

गौर करने वाली बात यह है कि कोरोना संकट के कारण एक और जहां मजदूरों का पलायन जारी था, वहीं शिवराज सरकार ने अन्य राज्यों से अपने प्रदेश के प्रवासी मजदूरों को सकुशल वापस लाने के लिए तत्काल केन्द्र सरकार से समन्वय स्थापित किया और 140 टेªनों तथा लगभग 20 हजार बसों के माध्यम से प्रवासी मजदूरों को वापस लाने में सफल रही। आंकड़े बताते हैं कि लगभग 15 लाख प्रवासी मजदूर और उनके परिजन सकुशल वापस आए। इन मजदूरों को आर्थिक सहायता, भोजन और परिवहन के साथ-साथ उनके रोज़गार के लिए भी युद्ध स्तर पर प्रयास किया गया। सी.एम. शिवराज ने स्पष्ट निर्देश दे दिया कि मजदूरों की सहायता हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यही कारण है कि प्रदेश में रोज़गार सेतु पोर्टल लांच किया गया, जिसमें लाखों मजदूरों ने पंजीयन कराकर आज नए सिरे से रोज़गार शुरू कर दिए हैं। प्रवासी श्रमिक अब अपने घर के आस-पास ही रोज़गार करके खुश हैं।
सी.एम. शिवराज ने अत्यन्त प्रतिकूल परिस्थितियों में सत्ता की कमान संभाली थी किन्तु दृढ़ इच्छाशक्ति के चलते वे परिस्थितियों पर एक-एक कर नियंत्रण पाते गये। उन्होंने प्रवासी मजदूरों के साथ-साथ किसानों, छात्रों, बिजली उपभोक्ताओं की भी सुध ली। किसान पुत्र शिवराज के कुशल नेतृत्व का परिणाम है कि समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन करने के मामले में अब म.प्र. देश का पहला राज्य बन गया है। गेहूं उपार्जन में एक करोड़ 29 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपार्जन कर म.प्र. ने इतिहास रच दिया है।
15 लाख किसानों को 2981 करोड़ रुपए की फसल बीमा राशि एक क्लिक के माध्यम से भुगतान की गई। इसी प्रकार प्रधानमंत्री किसान योजना के अन्तर्गत प्रदेश के 72.37 लाख किसान है, जिनके लिए 2000 की राशि के मान से कुल 1700 करोड़ की राशि जारी की जा चुकी है।
इसी प्रकार संबल योजना के अन्तर्गत 24 हजार पांच सौ हितग्राहियों के खाते में सीधे 137 करोड़ से अधिक की राशि जारी की गई। सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं में 46 लाख 86 हजार से अधिक हितग्राहियों के खातों में पेंशन की राशि 562.34 करोड़ जमा की गई। म.प्र. देश का ऐसा पहला राज्य है जिसने अन्य राज्यों के प्रवासी मजदूरों के लिए भी परिवहन, भोजन तथा आर्थिक सहायता देने का काम किया। सी.एम. शिवराज ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि मजदूर हमारे अतिथि है, उन्हें किसी भी हाल में पैदल नहीं चलने दूंगा। यही कारण है कि मजदूरों को उनके गृह राज्य की सीमा तक परिवहन सुविधा मुहैया कराई गई।
इस प्रकार देखें तो सी.एम. शिवराज सिंह चैहान ने अल्प समय में ही प्रदेश के सर्वहारा वर्ग की सहायता के लिए लगातार निर्णय लेकर उन्हें सहायता पहुंचाने का काम किया है। केन्द्र की मोदी सरकार के आत्मनिर्भर भारत के ध्येय को म.प्र. सरकार अपने निर्णयों से साकार कर रही है और आने वाले समय में प्रदेश को पूर्णतः आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध भी है।