नई दिल्ली, डायबिटीज को लेकर लोगों को जागरूक करने की जरूरत है. भारत में करोड़ों लोग मधुमेह से पीड़ित है. आज भारत को दुनिया में मधुमेह राजधानी कहें तो गलत नहीं होगा. यह कहना है स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार बनाने का अभियान चला रहे वरिष्ठ समाजसेवी अजय कुमार का.

अजय कुमार वर्ल्ड डायबिटीज दिवस पर एसोचैम के कार्यक्रम में बोल रहे थे. इस मौके पर उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की हाल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक भारत में करीब 9.8 करोड़ लोग मधुमेह से पीड़ित होंगे. अजय कुमार ने कहा कि इतना ही नहीं एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडिया की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, गरीब शहरी आबादी अपनी आय का करीब 34 फीसदी मधुमेह के इलाज पर खर्च करती है, जबकि ग्रामीण आबादी इसी पर 27 फीसदी खर्च करती है.

उन्होंने कहा कि सबसे खतरनाक और चिंताजनक बात यह है कि हमारे देश में बहुत सारे लोगों को इस बात का पता ही नहीं चल पाता कि उन्हें डायबिटीज की बीमारी है. अजय कुमार ने कहा कि इसके लिए बडे पैमाने पर जनजागरूकता की जरूरत है.

उन्होंने स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार बनाए जाने पर जोर देते हुए कहाकि स्वास्थ्य एक गंभीर विषय है और ऐसे विषयों पर एसोचैम लगातार सक्रियता से काम कर रहा है. अजय कुमार ने इसके लिए एसोचैम की जमकर सराहना की. इस मौके पर एसोचैम के सेक्रेटरी जनरल दीपक सूद, एसोचैम के चेयरपर्सन अनिल राजपूत, जॉइन्ट डायरेक्टर संदीप जैन, डॉ हेमा दिवाकर, डॉ अम्बरीष मित्तल, डॉ सुनील गुप्ता, रवि भटनागर, डॉ धीरज कपूर, डॉ नवीन वर्मा, डॉ अंशिता अग्रवाल, डॉ राजेश केशरी आदि उपस्थित रहे.