बीते 5 सालों में बतौर सूचना आयुक्त आत्मदीप किए कई नवाचार

बीते 5 सालों में बतौर सूचना आयुक्त आत्मदीप किए कई नवाचार
भोपाल। काम काज का ब्योरा सार्वजनिक करने का एक और नवाचार कर आत्मदीप ने राज्य सूचना आयुक्त पद से विदाई ले ली है। बीते 5 वर्षों में कई ऐतिहासिक व साहसिक फैसलों के लिए हमेशा जाना जाएगा। शुक्रवार राज्य सूचना आयोग कार्यालय में आयोजित समारोह में सूचना आयुक्त सुखराज सिंह, डीपी अहिरवार, सुरेंद्र सिंह, आरके माहिर, विजय मनोहर तिवारी और अरूण पांडेय सहित आयोग सहयोगी अधिकारी कर्मचारियों ने अपनी शुभकमानाएं प्रदान कीं। बहरहाल बता दें कि केन्द्रीय व राज्य सूचना आयोगों के इतिहास में देश-प्रदेश में यह पहला अवसर है जब किसी सूचना आयुक्त ने अपना रिपोर्ट कार्ड को सार्वजनिक किया है। सेवानिवृत्त हुए आयुक्त आत्मदीप का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सार्वजनिक दायित्व का निर्वहन करने वाले सभी लोग जनता के प्रति जवाबदेह है। इसलिए ऐसे सब जिम्मेदार लोगों को स्वत: पहल कर, पदेन हैसियत से किए गए कामों का ब्योरा जनता के सामने पेश करना चाहिए। यहां उन्होंने कहा कि आम आदमी को सशक्त बनाने, शासन व उसके तंत्र को जनता के प्रति उत्तरदायी बनाने तथा सार्वजनिक व्यवस्था में शुचिता व पारर्दशिता को बढ़ावा देने के पवित्र उद्देश्य से दिए गए सूचना के अधिकार के क्षेत्र में आत्मदीप की सेवाएं सबके लिए सदैव नि:शुल्क उपलब्ध रहेंगी। वह सर्वउपयोगी मार्गदर्शिका भी तैयार करेंगे। निपटाए 5 हजार से अधिक प्रकरण 11/2/14 से अब तक के 5 वर्षीय कार्यकाल में आत्मदीप ने ग्वालियर, चंबल व रीवा संभागों की 5 हजार से अधिक अपीलों व शिकायतों का न केवल निराकरण किया है, बल्कि सूचना के अधिकार कानून को नजर अंदाज करने वाले 21 लोक सेवकों पर तीन लाख 13 हजार 500 रूपए का जुर्माना भी लगाया है। आयुक्त ने जानने के हक का फायदा अधिकाधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए अपने प्रभार के सभी जिलों के दौरे करने की भी पहल की। कैम्प कोर्ट व वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए 600 अपीलों का निराकरण किया। सोशल मीडिया पर नि:शुल्क हेल्पलाइन सूचना के अधिकार कानून का लाभ आम जन को दिलाने के लिए संभागीय व जिलों में दौरे करते हुए बतौर सूचना आयुक्त आत्मदीप ने लोक अदालत, वीडियो क्रांफेसिंग व कैंप कोर्ट की पहल भी कर चुके हैं। यही नहीं फेसबुक पर राईट टू इंर्फोमेशन (जर्नलिस्ट) नाम से पेज बनाकर महत्वपूर्ण फैसलों व संबंधित कानूनी प्रावधानों से आम जन को अवगत कराने की पहल की है। नि:शुुल्क हेल्प लाईन का लाभ तो मप्र के अलावा दूसरे राज्यों के लोग भी ले रहे हैं। इसके तहत कोई भी नागरिक /लोक सेवक आयुक्त से मिलकर या उनसे फेसबुक पेज, व्हाट्सएप, इंस्ट्राग्राम, फोन, मोबाईल, ई मेल आदि के जरिए संपर्क कर सूचना के अधिकार से संबंधित कोई भी जानकारी प्राप्त कर सकता है। यह रहे अहम फैसले सहकारी समितियों द्वारा संचालित उचित मूल्य की दुकाने व भारतीय रेडक्रास सोसायटी जैसी संस्थाओं को लोकहित में आरटीआई एक्ट के दायरे में लाकर आत्मदीप ने जनता के प्रति उत्तरदायित्व व जबावदेही तय करने का प्रयास किया। इसके साथ ही ऐसे विभागों, संस्थाओं व निकायों से भी जानकारी प्राप्त करने का कानूनी रास्ता जनता के लिए खोला, जिन्हें केन्द्र व राज्य सरकार ने आरटीआई एक्ट के प्रावधानों से छूट प्रदान की थी। इसमें लोकायुक्त की विशेष पुलिस स्थापना, आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो, विशेष सशस्त्र बल जैसी संस्थाएं अहम है।