"के अतिरिक्त" में देश के ख्यातिलब्ध कलाकारों के चित्र होंगे प्रदर्शित
25 दिसम्बर को कान्हा सरई आर्ट गैलेरी ने तीन दिवसीय प्रदर्शनी की होगी शुरुआत
Syed Javed Ali
मंडला - कान्हा के गहन जंगल में बनी इस नयी गैलरी कान्हा सरई में तीन दिवसीय प्रदर्शनी ‘के अतिरिक्त’ में भाग ले रहे तीन कलाकारों के लिए यह एक अनूठा अवसर है कि वे शहर की आपाधापी के बीच भागदौड़, शोरगुल से परे जंगल के एकान्त में अपने चित्र प्रदर्शित कर रहे हैं। 25 दिसम्बर से 27 दिसम्बर 2019 तक लग रही इस प्रदर्शनी में देश 3 मशहूर चित्रकार अपनी कला को प्रदर्शित करेंगे।
अखिलेश के चित्रों को परिचय की आवश्यकता नहीं वे देश के मूर्धन्य कलाकारों की श्रेणी से आते हैं और युवा कलाकारों के प्रोत्साहन और सहयोग के लिये हमेशा तत्पर पाये जाते हैं। उनके चित्र दर्शकों के लिये एक नया संसार रचते हुए प्रतीत होते हैं, जिसमें निरंतर कुछ नया घटता सा महसूस होता है। अखिलेश के चित्रों में रंग हर बार नये और रोचक संबंध बनाते नजर आते हैं। हर चित्र एक यात्रा करते हुए अगले चित्र तक पहुँचा है, यह देखा जा सकता है। वे उतने ही नैसर्गिक और आकर्षक हैं जितना कान्हा का जँगल।
योगेन्द्र त्रिपाठी के चित्र इस वातावरण से उपजे चित्र हैं। वे देश के महत्वपूर्ण अमूर्त चित्रकार हैं। पिछले कई वर्षों में उन्होंने इस आकार-विहीन चित्र संयोजन की साधना की है। दूसरी तरफ़ युवा संभावनाशील चित्रकार प्रीति मान के चित्र रंगों की अपूर्व छटा से दर्शकों को आकर्षित कर लेने की क्षमता रखते हैं। वे अपने चित्रों का विन्यास उसी ज्यामितिक परिप्रेक्ष्य में करती हैं जिसका प्रमाण प्रकृति स्वयं है। कान्हा के जंगल के बीच इस तरह की समकालीन कला प्रदर्शनी नया प्रयास है। शहरी कलाकारों का यह कदम आदिवासी अंचल में हो रहे अनचाहे बदलाव के बीच रचनात्मक सार्थक पहल है। इससे कलाकारों के बीच हो रहे संवाद में दोनों तरफ़ सीखने की राह खुलेगी।
25 दिसम्बर की शाम 4 बजे इस प्रदर्शनी का शुभारंभ अधिवक्ता विभूति दत्त झा के मुख्य आतिथ्य में होगा। विभूति दत्त झा म् प्र के जानेमाने वकील और सामाजिक कार्यकर्ता है। पिछले तीस वर्षों से वे लोगों के मुकदमे ब्लाक से लेकर हाईकोर्ट तक लड़ रहे है। इन दिनों वे मंडला में रहकर बिछिया ब्लाक के गाँव में अलख जगाने का कार्य कर रहे है। सहज, सरल और एकदम ठेठ देसी अंदाज में और धोती में रहने वाले विभूति दा को देखकर कहना मुश्किल है होता है कि ये वही शख्स है जिसकी तूती कोर्ट में बोलती है या थी, अब वे आदिवासी लोक भाषाओं में पारंगत है।