कांग्रेस के मंत्रियों पर आम चुनाव जिताने की जिम्मेदारी
भोपाल। प्रदेश में 15 साल बाद सत्ता में आई कांग्रेस अब लोकसभा चुनाव में नया फार्मूला लागू करने जा रही। पार्टी यह फार्मूला मप्र की 29 सीटों की फतह के लिए है। संभवत: प्रदेश की राजनीति में एक यह पहला प्रयोग होगा जब अपना गृह क्षेत्र और प्रभार का जिला नहीं जिताने वाले मंत्रियों की कैबिनेट से छुट्टी होगी।

दरअसल, प्रदेश सरकार में शामिल मंत्रियों को लोकसभा चुनाव में ‘अग्नि परीक्षा’ से गुजरना होगा। मंत्रियों के गृह जिले और प्रभार वाले जिलों में पार्टी उम्मीदवार हारे तो खामियाजा इनको ही सीधे तौर पर भुगतना पड़ सकता है। अपने गृह और प्रभार वाले क्षेत्र हारने पर मंत्रियों की कमलनाथ कैबिनेट से छुट्टी कर दी जाएगी। कांग्रेस ने यह रणनीति बना ली है। इस पर अंतिम मुहर आठ फरवरी को राहुल गांधी अपने भोपाल दौरे के दौरान लगाएंगे। कांग्रेस इस बार हर स्थिति में प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में से कम से कम बीस सीट जीतना चाहती है। इसके लिए कांग्रेस ने अपने मंत्रियों को जिम्मेदारी देने की रणनीति बना ली है। प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों के लिए एकएक मंत्री के पास दो-दो जिलों की जिम्मेदारी दी जाएगी। इसमें एक जिला मंत्री का गृह क्षेत्र वाला होगा, जबकि दूसरा उनके प्रभार वाला जिला होगा।
मंत्रियों में मचा हड़कंप
दोनों जिलों की हर विधानसभा कांग्रेस को जीताकर देना मंत्रियों की जिम्मेदारी होगी। इस जिम्मेदारी पर खरे नहीं उतरने वाले मंत्रियों की कैबिनेट से छुट्टी कर दूसरे विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है। कांग्रेस की इस रणनीति पर काम करने की सुगबुगाहट के बाद मंत्रियों में हड़कंप मच गया है। मंत्रियों को अब गुटबाजी से ऊपर उठकर लोकसभा चुनाव में काम करना होगा।
राहुल गांधी तय करेंगे फार्मूला
दर्जन भर मंत्रियों के सामने कठिन चुनौती कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी 8 फरवरी को मप्र दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान इस संभावित फार्मूले पर मुहर लग सकती है। दर्जन मंत्रियों के लिए यह फार्मूला कड़ी चुनौती है।
मंत्रियों रहें अलर्ट
इधर, मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने मुख्यमंत्री के उस बयान का भी समर्थन किया जिसमें कमलनाथ ने कहा है कि लोकसभा में जिस भी मंत्री का क्षेत्र पार्टी हारेगी उस मंत्री को तत्काल इस्तीफा देना होगा। वर्मा ने कहा कि यह एक अच्छा निर्णय यह है कि अपने मंत्रियों को तो अलर्ट होना ही चाहिए। उन्होंने कहा है कि जो मंत्री परफार्म नहीं कर पा रहे हैं उनका हट जाना ही बेहतर है। मंत्री ने कहा लोकसभा चुनाव के लिए सभी को अपनी पूरी ताकत से काम करना होगा।
किसके पास कहां का प्रभार
डॉ. गोविंद सिंह भोपाल जिले के प्रभारी है। भोपाल लोकसभा सीट में भोपाल की 7, सीहोर की दो विधानसभा आती है। सीहोर के प्रभारी मंत्री आरिफ अकील है।
भोपाल से पीसी शर्मा मंत्री है। भोपाल लोस सीट कांग्रेस 29 सालों से हार रही है। इस सीट को जिताना आरिफ अकील, डॉ. गोविंद सिंह व पीसी शर्मा के भरोसे रहेगी।
29 साल से इंदौर भी कांग्रेस हार रही है। जिले से जीतू पटवारी, तुलसी सिलावट मंत्री हैं। जबकि प्रभारी मंत्री बाला बच्चन हैं।
विदिशा सीट विदिशा, रायसेन, सीहोर और देवास जिलों के विधानसभा क्षेत्रों से मिलकर बनी है। इन जिलों से प्रभुराम चौधरी और सज्जन सिंह वर्मा मंत्री हैं।
विदिशा और रायसेन के प्रभारी मंत्री हर्ष यादव हैं, सीहोर के आरिफ अकील और देवास के जीतू पटवारी प्रभारी मंत्री है।
वर्ष 1996 से कांग्रेस जबलपुर सीट भी नहीं जीती है। जबलपुर के प्रभारी मंत्री प्रियव्रत सिंह हैं जबकि यहां से तरुण भनोत और लखन घनघोरिया मंत्री हैं।
इनका कहना है
राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ संगठन हित में कोई भी फैसला ले सकते हैं। यह सोच-समझकर ही लिया जाएगा।
दुर्गेश शर्मा, प्रवक्ता मप्र कांग्रेस