प्लाज्मा तकनीक से कोरोना को मात देगा मप्र!

प्लाज्मा तकनीक से कोरोना को मात देगा मप्र!
भोपाल, कोरोना आपदा के खिलाफ जारी लड़ाई में एक राहत भरी खबर आई है. राहत इस बात की कि मध्य प्रदेश में भी कोरोना पॉजिटिव मरीजों का इलाज प्लाज्मा टेक्निक के जरिए किया जा सकता है. स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने प्लाज्मा टेक्निक को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन सिंह के साथ हुई वीडियो कांन्फ्रेंसिंग में चर्चा की. नरोत्तम मिश्रा ने प्लाज्मा टेक्निक से इलाज का मुद्दा उठाते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में कुछ अस्पताल इस तकनीक के जरिए इलाज की अनुमति चाहते हैं. इस पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन सिंह की ओर से जानकारी दी गई कि संबंधित अस्पताल ईमेल के जरिए जानकारी भेज कर इस तकनीक पर काम शुरू कर सकते हैं. हालांकि इसके लिए उन्हें आईसीएमआर की गाइडलाइन का पालन करना होगा. आपको बता दें कि कोरोना आपदा के बीच प्लाज्मा तकनीक के नतीजे सकारात्मक आ रहे हैं. दिल्ली समेत कुछ राज्यों में इस तकनीक से ट्रायल के तौर पर इलाज भी शुरू किया गया है. अगर मध्य प्रदेश में भी इसके नतीजे सकारात्मक आते हैं तो यह बड़ी राहत की खबर होगी. जानकारों के मुताबिक ऐसे मरीज जो कोरोना पॉजिटिव हैं और ठीक हो चुके हैं उनके प्लाज्मा का इस्तेमाल बाकी कोरोना पीड़ित मरीजों के इलाज में किया जा सकता है. हालांकि यह तकनीक भी पूरी तरह कारगर साबित नहीं हुई है. लेकिन अब तक के इसके नतीजे सकारात्मक रहे हैं, इसलिए राज्य इस तकनीक से इलाज की अनुमति चाहते हैं. मध्यप्र देश के स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन के साथ कोरोना संक्रमित के संबंध में VC के जरिए मध्य प्रदेश के निम्न बिंदुओं पर चर्चा की. नरोत्तम मिश्रा ने सबसे पहले केंद्रीय नेतृत्व को मध्य प्रदेश की वस्तुस्थिति के संबंध में अवगत कराया. मध्य प्रदेश का सबसे ज्यादा पश्चिमी मध्य प्रदेश का क्षेत्र इंदौर और उज्जैन का कोरोना संक्रमण से प्रभावित है, जहां सबसे ज्यादा कोरोना पाॅजिटिव केस मिले हैं. लेकिन मध्य प्रदेश के लिए राहत की बात है कि अब मध्य प्रदेश में कोरोना संक्रमित की मृत्यु दर 10 से घटकर 4.8% हो गई है और अब स्थिति नियंत्रण में है. इसके साथ नरोत्तम मिश्रा ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से मध्य प्रदेश में प्लाज्मा थेरेपी के माध्यम से कोरोना संक्रमित मरीज के इलाज के लिए अनुमति के लिए कहा और साथ ही मध्य प्रदेश में अधिक से अधिक सैंपल जांच के लिए किट उपलब्ध कराने के लिए भी अनुरोध किया. आशा की किरण साबित हो सकता है प्लाज्मा कोविड 19, यानी करोना का फिलहाल कोई सटीक उपचार उपलब्ध नहीं है। भारत में इस बीमारी से मौतों का आँकड़ा यूरोपीय देशों के मुकाबले बेहद कम है इसलिए गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए, ठीक हो चुके मरीजों की बहुत बड़ी संख्या होने से उनका रक्तद्रव्य यानी प्लाज्मा एक आशा की किरण साबित हो सकता है, हालांकि अभी इसके सुदीर्घ परिणामों के आकलन में समय लगेगा, किन्तु चिकित्सक अंतिम साँस तक प्रयास तो करते ही हैं और और वैश्विक चिकित्सा एथिकल समिति भी यही कहती है, कि यदि किसी मरीज का कोई अंग या जीवन बचाने के सारे रास्ते बंद हो जाएँ, तो जो भी संभव हो, वो किया जाना चाहिए, भले ही फिर वो कोई ज्ञात पध्दति ना हो! डॉ भुवनेश्वर गर्ग, सर्जन, प्रोमोटर एवं इनोवेटर