नारायण सिंह पट्टा के मंत्री बनने की उम्मीद

नारायण सिंह पट्टा के मंत्री बनने की उम्मीद

नारायण सिंह पट्टा के मंत्री बनने की उम्मीद

उम्मीदों के बीच मंत्री बनाने की मांग ने पकड़ा जोर

narayan-singh-patta-hopes-to-become-minister
Syed Sikandar Ali 
मण्डला - मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने का रास्ता साफ़ होते ही मंत्री पद की दौंड भी शुरू हो गई है। मण्डला जिले की बिछिया विधानसभा से दूसरी बार भारी मतों से जीत हासिल करने वाले कांग्रेस के कद्दावर आदिवासी नेता और पार्टी संगठन में गहरी पैठ रखने वाले नारायण सिंह पट्टा को कांग्रेस सरकार में मंत्री बनाया जा सकता है। राजनीतिक विश्लेषक और पार्टी संगठन के नेता भी आदिवासी नेतृत्व के रूप में नारायण सिंह पट्टा को मंत्री बनाकर मण्डला जिले सहित आसपास की सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत बनाने के लिए विचार कर रहे हैं। चुनाव के पहले कांग्रेस पार्टी ने नारायण सिंह को प्रदेश संगठन की टीम में प्रदेश सचिव बनाकर संगठन में आदिवासी नेतृत्व की भूमिका को स्पष्ट किया था। उसी के अनुसार आगामी लोकसभा चुनाव में मण्डला सीट से जीतने के लिए मंत्री पद की ताकत देकर मण्डला जिले सहित डिंडोरी जिले को साधा जाएगा। इस लिहाज से बिछिया विधानसभा से दूसरी बार निर्वाचित हुए नारायण सिंह पट्टा मंत्री पद के सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।
वायरल हो रहा है यह मैसेज -
नारायण सिंह पट्टा को मंत्री बनाने की मांग जोर पकड़ रही है। ऐसे उनके पक्ष में लॉबिंग करने वालों की तरफ एक मैसेज भी सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा है। जिसमे भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टी पर आदिवासी प्रतिनिधित्व को महत्त्व न देने का आरोप लगाया गया है। मैसेज के अंत में सवाल किया गया है क्या कांग्रेस नारायण सिंह पट्टा को कैबनेट मंत्री बनाकर भूल सुधर करेगी।
यह है वायरल मैसेज -
आदिवासी बाहुल्य मण्डला जिला जहां प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता तो है पर आजादी के बाद से लेकर अब तक इस जिले के विकास के लिए आदिवासी प्रतिनिधित्व को कभी महत्व नही दिया गया। इसी कारण मण्डला का विकास आज भी छटपटा ही रहा है। कांग्रेस ने अपने शासनकाल में एक राज्यमंत्री बनाया था और भाजपा ने भी अपने शासनकाल में एक राज्यमंत्री बनाया। दोनों ने ही अपनी औपचारिकता पूरी की लेकिन मण्डला के विकास को वो तरजीह नही दी जिसके लिए मण्डला अपेक्षित रहा। 67 प्रतिशत से भी अधिक आदिवासियों की आबादी यहां निवास करती है। जिनके जीवनयापन के लिए सिर्फ प्राकृतिक संसाधन मात्र हैं। औद्योगिक संसाधनों का विकास अब तक शून्य पड़ा हुआ है। स्थानीय स्तर पर रोजगार मुहैया कराने की कोई औद्योगिक पहल अब तक नही हुई है। जिसका मुख्य कारण सिर्फ और सिर्फ मण्डला के आदिवासी प्रतिनिधित्व को सरकारों में उचित स्थान न मिल पाना रहा है। 15 साल बाद इस बार प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ है जनता की अपेक्षाओं का कौतूहल चारों ओर सुनाई दे रहा है। इस बीच मण्डला का संभावित विकास भी सत्ता के मंत्रिमंडल में जगह पाने के लिए राजधानी में अपनी उम्मीदें तलाश रहा है। कैबिनेट मंत्री का दर्जा ही मण्डला के विकास की संभावनाओं को मूर्त रूप दे सकता है। ऐसे में जनता के लिए अपने वचनों का पिटारा खोलने वाली कांग्रेस, मण्डला जिले के लिए क्या सोच रखती है यह प्रतीक्षित है। जिले का आदिवासी प्रतिनिधित्व भाजपा और कांग्रेस दोनों से ही छला गया है, क्या अब कांग्रेस अपनी भूल को सुधार पाएगी, यह मण्डला के भविष्य के लिए भी एक बड़ा सवाल है, जिसका जबाब सिर्फ कांग्रेस आलाकमान ही दे सकती है।