कोरोना: केंद्र सरकार ने प्लाज्मा थैरेपी पर लगाई रोक, नई दवा के ट्रायल का काम शुरू

कोरोना: केंद्र सरकार ने प्लाज्मा थैरेपी पर लगाई रोक, नई दवा के ट्रायल का काम शुरू

भोपाल
कोरोना के कहर को रोकने के लिए और मरीजों के उपचार के लिए भारत में प्लाज्मा थैरेपी को कारगर माना जा रहा था. लेकिन केंद्र सरकार ने फिलहाल प्लाज्मा थैरेपी पर रोक लगा दी है. भोपाल में राहत की बात ये है कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स भोपाल में मरीजों पर नई दवा के ट्रायल का काम शुरू हो गया है। मंगलवार रात को एम्स को यह दवा मिल गई, अब गुरुवार को चयनित मरीजों पर इसका ट्रायल शुरू किया जाएगा। करीब एक सप्ताह में इसके परिणाम सामने आने लगेंगे। मालूम हो कि एम्स भोपाल को कोरोना की नई दवा के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ इंडिया (आईसीएमआर) के साथ अमेरिका केा फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की मंजूरी भी मिल गई है।

जानकारी के मुताबिक एम्स भोपाल ट्रायल में माइकोबैक्टीरियम डब्ल्यू (एमडब्ल्यू) दवा को कोरोना के मरीजों पर इस्तेमाल करेगा। इस दवा का निर्माण अहमदाबाद में किया जाता है। एम्स के डायरेक्टर डॉ. सरमन सिंह ने बताया कि ट्रायल के लिए मरीजों को तीन कैटेगरी में बांटा गया है इस दौरान कोरोना के अति गंभीर (आक्सीजन सपोर्ट वाले) कम गंभीर मरीज (जिन्हें कोई गंभीर लक्षण नहीं ) और हेल्थ वर्कर्स को इस दवा का एक निश्चित डोज दिया जाएगा और उनका तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक इस ट्रायल के लिए दो मरीजों का चुनाव किया गया है। बुधवार को इन मरीजों के औपचारिक सहमति के साट अन्य जरूरी काम किए जाएंगे। गुरुवार से मरीजों को नई दवा के डोज दिए जाएंगे। बताया जा रहा है कि मरीजों को एक सप्ताह में तीन डोज देकर परिणामों का तुल्नात्मक अध्ययन किया जाएगा।

जानकारी के मुताबिक यह दवा शरीर में बाहरी संक्रमण को रोकने के के लिए शशीर में प्रतिरोधक क्षमता पैदा करती है। सीधी भाषा में कहें तो इस दवा का इस्तेमाल मरीजों की इम्युनिटी बढ़ाने के लिए किया जाता है। दरअसल कोरोना के दौरान शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले प्रोटीन बढ़ जाते हैं। इस दवा से इन प्रोटीन को बढऩे से रोका जा सकता है। मालूम हो कि इस दवा का उपयोग कुष्ठ के साथ कुछ प्रकार के कैंसर में भी उपयोग किया जाता है।