सरकार के कर्ज को कम करने हर विभाग को करना होगा रेवन्यू जनरेट
भोपाल
सरकार का खजाना भरने के लिये अब हर विभाग को रेवन्यू जनरेट करना होगा। अनुदान से संबंधित योजनाओं में भी पारदर्शिता होगी। वित्त विभाग द्वारा तैयार किये गये इस तरह के प्लान की झलक आने वाले बजट में देखने को मिलेगी।
सरकार पर करीब 1 लाख 80 हजार करोड़ का कर्ज है। इससे निबटने के लिये वित्त विभाग का प्लान है कि अब ऐसे विभागों को भी राजस्व प्राप्ति के प्रयास करने होंगे जो अभी तक सिर्फ खर्च ही करते आ रहे हैं।
जैसे कि महिला एवं बाल विकास विभाग, लोक निर्माण, आदिम जाति कल्याण, अनुसूचित जाति कल्याण, पिछड़ा वर्ग, राजस्व, सामाजिक न्याय, वन, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा विभाग आदि हैं। पिछले कई दिनों से चल रही बजट तैयारी के दौरान तय किया गया है कि एडशिनल रिसोर्स मोबलाइजेशन (एआरएम) से हर विभाग को जोड़ा जायेगा। जो विभाग ज्यादा रिसीड करेगा उसे आगे उतना ही बजट मिलेगा।
समीक्षा के दौरान पाया गया है कि सरकार का खजाना चलाने के लिये आबकारी, सेलटेक्स, परिवहन, खनिज जैसे विभागों पर ही दबाव नहीं बनाया जाये। राजस्व विभाग से कहा गया है कि अगर किसी प्रमाण पत्र बनाने का शुल्क वर्षों से दो रुपये है तो उसके शुल्क में मामूली बढ़ोत्तरी की जाये। सरकार ने अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है कि विभाग को अगर सुविधा मिल रही है तो बदले में राजस्व जरूर देना होगा।
बजट में अनुदान सिस्टम में बदलाव लाया जायेगा। जैसे कि बिजली बिल हाफ करने की योजना में अनुमान पर अनुदान नहीं मिलेगा। लैपटॉप, साइकिल, मुख्यमंत्री कन्या सामूहिक विवाह, छात्रवृत्ति, कर्जमाफी, सब्सीडी आदि से जुड़ी योजनाओं में पारदर्शिता लाई जायेगी। सूत्रों की माने से छात्रों में प्रतियोगिता बढ़ाने के लिये लैपटॉप वितरण की संख्या घटाई जा सकती है।
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