दिव्यांग के लिए 'उम्मीदों का आसमां', सरकार देती है इतनी सुविधाएं

दिव्यांग के लिए 'उम्मीदों का आसमां', सरकार देती है इतनी सुविधाएं

 
3 दिसंबर को 'इंटरनैशनल डे फॉर डिसेबल्ड पर्सन' है। लोगों के सफर को ज्यादा आसान बनाने के लिए एक्पर्ट्स से बात कर पूरी जानकारी दे रहे हैं लोकेश के. भारती 
 
सुविधाएं आने- जाने की
सरकार ने डिफरेंटली एबल्ड लोगों के लिए कई सुविधाएं दी हुई हैं। कई बार कम जानकारी की वजह से लोग सभी सुविधाओं का फायदा नहीं ले पाते, लेकिन जब सुविधाएं हैं तो उनका फायदा उठाना चाहिए। 

ट्रेन में सुविधा
डिफरेंटली एबल्ड व्यक्ति एक अटैंडेंट के साथ रेल में रियायती दर पर टिकट खरीदकर यात्रा कर सकते हैं। डिफरेंटली एबल्ड के साथ में सफर कर रहा अटैंडेंट भी इन रियायतों का हकदार है। 

मिलेगी ऐसे छूट
- सेकंड क्लास, स्लीपर, फर्स्ट क्लास, थर्ड एसी, एसी चेयरकार में 75% 
- फर्स्ट एसी और सेकंड एसी में 50% 
- राजधानी/शताब्दी गाड़ियों की थर्ड एसी और एसी चेयरकार में 25% 
- एमएसटी और क्यूएसटी में 50% 

कोई डेफ ऐंड म्यूट शख्स अगर किसी भी काम के लिए अकेले या किसी सहयोगी के साथ यात्रा कर रहा है तो: 
- सेकंड क्लास, स्लीपर और फर्स्ट क्लास में 50% 
- एमएसटी और क्यूएसटी में 50% 

जरूरी कागजात 
दृष्टिहीनों के लिए 
आंखों के अस्पताल या डॉक्टर से (कम से कम एमबीबीएस) द्वारा जारी प्रमाणपत्र की कॉपी, जिसमें लिखा हो कि व्यक्ति पूरी तरह दृष्टिहीन है। 

लोकोमोटर विकलांगता से पीड़ित 
80% और उससे ज्यादा हाथ-पांव की कमियों से पीड़ित व्यक्ति इस श्रेणी में छूट पाने के हकदार हैं। इसके लिए चीफ मेडिकल ऑफिसर (सीएमओ) या सरकारी अस्पताल द्वारा गठित बोर्ड से जारी प्रमाणपत्र चाहिए। 

वीलचेयर्स की मदद 
ऐसे लोग जिनके पैर काम नहीं करते या पैरों में ताकत कम है, उनके लिए वीलचेयर किसी वरदान से कम नहीं। आजकल तो ऐसी वीलचेयर भी आ गई हैं, जो आपको सीधे खड़ा कर सकते हैं। हालांकि उनकी कीमत ज्यादा होती है। अब तो ऐसी सुविधा हो गई है कि आप वीलचेयर में अपनी जरूरत के हिसाब से बदलाव भी करवा सकते हैं। 

वीलचेयर का चुनाव करते समय किन बातों का रखें ध्यान 
1. उपयोग करने वाले में कितनी ताकत है 
2. स्टोरेज कपैसिटी 
3. कितना उपयोग करना है? 
4. शरीर का कौन-सा अंग दिक्कत में है 
5. किस तरह के एरिया में उपयोग करना है 
6. बजट 

कितने तरह की वीलचेयर
मैनुअल 
यह वीलचेयर दुनियाभर में सबसे ज्यादा उपयोग में लाई जाती है। इसे अमूमन वे लोग उपयोग करते हैं जिनके शरीर के ऊपरी भाग, खासकर हाथों में ताकत होती है। इसे पुश रिम की मदद से चलाया जाता है इसलिए इसे चलाने के लिए हाथों में पर्याप्त ताकत होनी चाहिए। यह दो तरह की होती है: फोल्डिंग फ्रेम वीलचेयर और रिजिड फ्रेम। इसे खुद नहीं चला सकते, किसी की मदद लेनी पड़ती है। इनका उपयोग ज्यादातर एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, हॉस्पिटल, सुपर मार्केट आदि जगहों पर होता है। 

मोटराइज्ड 
यह इलेक्ट्रिसिटी से चलती है। इसमें बैटरी और इलेक्ट्रिक मोटर लगे होते हैं। एक बार बैट्री फुल चार्ज हो जाए तो इससे 15 किमी तक आसानी से चल सकते हैं। 

इनके अलावा भी कई दूसरे तरह के वीलचेयर मिलते हैं। मसलन, मोबिलिटी स्कूटर, स्पोर्ट्स वीलचेयर, रीक्लाइनिंग वीलचेयर, बीच वीलचेयर, स्टेयर क्लाइंबिंग वील चेयर आदि। Sageindia कई तरह के वीलचेयर बनाती है। इसके अलावा Invacare Corp., OttoBock Healthcare जैसे कई नाम मार्केट में मौजूद हैं। इनके बारे में पूरी जानकारी आप गूगल पर इन्हीं नामों से सर्च कर देख सकते हैं। 

खास है बैसाखी
सर्जिकल स्टोर्स में अमूमन दो तरह की बैसाखी मिलती हैं: 
1. अंडर आर्म क्रच: इसकी जरूरत उन लोगों को होती है जिनका एक पैर तो ठीक होता है, लेकिन दूसरे पैर में ताकत बिल्कुल भी नहीं होती। 
कीमत: करीब 1200 रुपये 
2. एल्बो क्रच: यह उन लोगों के लिए उपयोगी है जिनकी दोनों टांगों में काफी कम ताकत होती है। 
कीमत: करीब 1100 रुपये 

इस बैसाखी को सहारे की नहीं है जरूरत
IIT दिल्ली के कुछ इंजिनियर्स एक खास तरह की बैसाखी पर काम कर रहे हैं। इन्हें आईआईटी और केंद्र सरकार ने फंड उपलब्ध कराया है। इसका नाम है 'फ्लैक्सक्रच'। अगले साल अप्रैल या मई तक सर्जिकल स्टोर्स में ये उलब्ध हो जाएंगी। इनकी कीमत 1600 रुपये है। सामान्य बैसाखी की लाइफ जहां 2 से 3 महीने की होती है, वहीं इसकी 8 महीने की होती है। 
इसकी खूबियां 
- खड़ा होने के लिए किसी सहारे की जरूरत नहीं 
- आमतौर पर उपलब्ध बैसाखी से 4 गुना ज्यादा मजबूत 
- चलते वक्त 20 फीसदी तक कम शॉक 
- पकड़ काफी बेहतर 
ज्यादा जानकारी के लिए: flexmotiv.com देखें। 
नोट: प्लेस और क्वॉलिटी के हिसाब से कीमत में अंतर हो सकता है। 

जयपुर फुट
प्रोस्थेटिक फुट के मामले में यह दुनियाभर में फेमस है। यह संस्था कृत्रिम पैर बनाकर देती है ताकि लोग चल-फिर सकें। डिफरेंटली एबल्ड लोगों के लिए यह संस्था पिछले चार दशकों से भी ज्यादा समय से काम कर रही है। अगर आप जरूरतमंद हैं तो इसके केंद्र पर जाएं और कुछ ही दिनों में अपने लिए प्रोस्थेटिक फुट मुफ्त में पाएं। ज्यादा जानकारी के लिए jaipurfoot.org पर विजिट करें। यहां इसके नजदीकी केंद्र के बारे में भी आपको जानकारी मिल जाएगी। 

एजुकेशन 
देश में विजुअली चैलेंज्ड लोगों के लिए दो तरह का स्कूलिंग सिस्टम मौजूद है। हालांकि इनमें सामान्य स्कूलों की तरह ही पढ़ाई होती है। आमतौर पर नर्सरी या क्लास वन में ऐडमिशन में परेशानी नहीं होती, लेकिन क्लास 6 या उससे ऊपर के क्लास में ऐडमिशन चाहते हैं तो थोड़ी दिक्कत होती है। दरअसल, ये स्कूल उन बच्चों को ज्यादा