पश्चिम बंगाल से दिल्ली, महाराष्ट्र पहुंची डॉक्टरों की हड़ताल, मरीज और तीमारदार परेशान

पश्चिम बंगाल से दिल्ली, महाराष्ट्र पहुंची डॉक्टरों की हड़ताल, मरीज और तीमारदार परेशान

नई दिल्ली/मुंबई/कोलकाता
पश्चिम बंगाल से शुरू हुई जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल आज महाराष्ट्र और दिल्ली तक आ पहुंची है। इसके चलते देश के बड़े हिस्से में स्वास्थ्य सेवाओं का संकट खड़ा हो सकता है। हड़ताल के समर्थन में दिल्ली मेडिकल असोसिएशन, आईएमए और डॉक्टरों के अन्य कई संगठन भी आ गए हैं। इन्होंने आज दिल्ली, महाराष्ट्र समेत देशभर में हड़ताल का आह्वान किया है। आईएमए से जुड़े डॉ. हरजीत सिंह भट्टी ने दावा किया कि आज एम्स, सफदरजंग के अलावा निजी क्लिनिक-नर्सिंग होम भी बंद रहेंगे। एम्स में नए मरीजों का इलाज नहीं होगा, जबकि सफदरजंग में केवल इमर्जेंसी चलेगी। एमसीडी हॉस्पिटल के डॉक्टर शनिवार से स्ट्राइक पर जाएंगे। महाराष्‍ट्र के रेजिडेंट डॉक्‍टरों ने भी आज शाम 5 बजे तक सांकेतिक हड़ताल का ऐलान किया है। ऐसे में डर है कि देशभर में डॉक्टर इस हड़ताल में शामिल हो सकते हैं। हड़ताल के चलते मरीजों और तीमारदारों को संकट का सामना करना पड़ रहा है और इलाज ठीक तरह से न मिलने से मरीजों की तबीयत भी बिगड़ रही है।


पश्चिम बंगाल में हड़ताल कर रहे जूनियर डॉक्टरों ने गुरुवार को दोपहर दो बजे तक काम पर लौटने के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश को नहीं माना और कहा कि सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा संबंधी मांग पूरी होने तक हड़ताल जारी रहेगी। वहीं मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनकारियों पर बरसते हुए विपक्षी बीजेपी और कम्युनिस्ट पार्टी पर उन्हें भड़काने और मामले को सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगाया। डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से कई सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों अस्पतालों में तीसरे दिन भी आपातकालीन वॉर्ड, ओपीडी सेवाएं, पैथोलॉजिकल इकाइयां बंद रहीं।

जूनियर डॉक्टरों पर 200 लोगों ने किया था हमला
दरअसल कोलकाता स्थित एनआरएस मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान एक 75 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हो गई थी। इस पर बुजुर्ग के परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया था और दो डॉक्टरों की पिटाई कर दी गई थी। आरोपों के मुताबिक करीब 200 लोग ट्रकों में भरकर आए थे और अस्पताल परिसर पर हमला बोल दिया। इस हमले में दो जूनियर डॉक्टर बुरी तरह घायल हो गए थे।

अस्पतालों में भी चिकित्सकीय सेवाएं बंद
वहीं निजी अस्पतालों में भी चिकित्सकीय सेवाएं बंद रहीं। डॉक्टर कोलकाता में एनआरएस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक मरीज की मौत के बाद भीड़ द्वारा अपने दो सहकर्मियों पर हमले के मद्देनजर प्रदर्शन कर रहे हैं। भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) ने घटना के खिलाफ और हड़ताली डॉक्टरों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए शुक्रवार को ‘अखिल भारतीय विरोध दिवस’ घोषित किया है। इस बीच एनआरएस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के प्रधानाचार्य साइबल मुखर्जी और चिकित्सा अधीक्षक और उपप्रधानाचार्य प्रो. सौरभ चटोपाध्याय ने संस्थान के संकट से निपटने में विफल रहने की वजह से इस्तीफा दे दिया है।

विपक्ष ने गतिरोध के लिए बनर्जी पर हमला किया है और बीजेपी ने उनपर ‘हिटलर’ की तरह काम करने का आरोप लगाया। जब मुख्यमंत्री दोपहर में सरकारी एसएसकेएम अस्पताल पहुंची तो डॉक्टरों ने ‘हमें इंसाफ चाहिए’ के नारे लगाए। उन्होंने कहा, ‘मैं आंदोलन की निंदा करती हूं। जूनियर डॉक्टरों का आंदोलन माकपा और भाजपा का षड्यंत्र है।’’ बनर्जी के पास स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का भी प्रभार है।

कड़ी कार्रवाई की चेतावनी
उन्होंने चिकित्सकों को चार घंटे के भीतर काम पर लौटने को कहा था लेकिन बाद में समय-सीमा में संशोधन करके इसे अपराह्न दो बजे कर दिया। उन्होंने ऐसा नहीं करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी और कहा कि उन्हें छात्रावास खाली करने होंगे। बनर्जी की समय सीमा के बावजूद डॉक्टरों ने अपनी हड़ताल जारी रखी। डॉक्टरों की एक टीम ने इस मुद्दे पर राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी से मुलाकात की।

राज्यपाल ने भी उनसे हड़ताल खत्म करने की अपील की। त्रिपाठी से भेंट के बाद राजभवन के बाहर एक जूनियर डॉक्टर ने कहा, ‘मांग पूरी होने तक हम अपना आंदोलन जारी रखेंगे। हमारी मांगें साधारण हैं... उचित सुरक्षा मिले और सभी अस्पताल में सशस्त्र पुलिस बल तैनात हों साथ ही एनआरएस अस्पताल में शनिवार को हुए हमले में शामिल अपराधियों को गैर जमानती धाराओं में गिरफ्तार किया जाए।’

हड़ताल पर ममता ने बीजेपी को कोसा
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने जो कहा, हमें उनसे उसकी उम्मीद नहीं थी। बहरहाल, बनर्जी ने आरोप लगाया कि बाहर के लोग चिकित्सीय कॉलेजों और अस्पतालों में व्यवधान डालने के लिए घुस आए हैं। उन्होंने बीजेपी पर हड़ताल को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश करने का भी आर