पापुनि का पुराना घोटाला आया सामने, छिड़ी बहस
रायपुर। घपले घोटालों का केन्द्र छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम अपने कारनामों के चलते लगातार किसी न किसी चर्चा में बने रहता है। पुराने जिन्न की तरह जहां पर भी फाइल पर हाथ डालो गड़बड़झाला सामने आ जाता है। एक दशक पुराना मामला जिसमें करोड़ों रुपए की अनियमितता पायी गई थी छत्तीसगढ़ राज्य संपरीक्षा विभाग के एक पत्र ने फिर से बाहर ला दिया है। अब इस पर पाठ्यपुस्तक निगम के मौजूदा और पूर्व अध्यक्ष आरोप प्रत्यारोप पर उतर आए हैं।
दरअसल, 2008-09 के लोकल फंड आॅडिट में पाठ्यपुस्तक निगम में 100 करोड़ से ऊपर की वित्तीय अनियमितता सामने आई।ये अनियमितता 2004 से 2010 के बीच की थी। 25 जुलाई 2017 को इन तमाम अनियमितताओं पर पाठ्यपुस्तक निगम से स्पष्टीकरण मांगा गया और 4 महीनों के भीतर जवाब देने को कहा गया, लेकिन निगम के अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया। इस मामले के चार साल बाद फिर से छत्तीसगढ़ राज्य संपरीक्षा की ओर से पाठ्यपुस्तक निगम को पत्र लिख कर 101 करोड़ से ज्यादा की वित्तीय अनियमितता पर जवाब देने को कहा गया है। चंूकि मामला 2017 के कार्यकाल से जुड़ा है, लिहाजा मौजूदा अध्यक्ष पुराने कार्यकाल को लेकर हमलावर हो गए हैं।
इस हमले पर तत्कालीन अध्यक्ष देवजी भाई पटेल ने भी पलटवार कर दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि 2008-09 की वित्तीय अनियमितता पर 2017 में स्पष्टीकरण क्यों मांगा गया। इसके लिए आॅडिट अधिकारियों से भी सवाल होने चाहिए। बहरहाल, इस आरोप प्रत्यारोप से इतना तो साफ हो गया है कि पाठ्यपुस्तक निगम में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुए हैं।
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